Friday, Oct 29, 2021
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मद्रास हाईकोर्ट द्वारा केंद्र को सी.बी.आई. आजाद करने का निर्देश

  • Updated on 8/20/2021

1941 में स्थापित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) भारत सरकार की प्रमुख जांच एजैंसी है जिसकी सेवाएं आपराधिक एवं महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए ली जाती हैं। यह प्रधानमंत्री कार्यालय में डी.ओ.पी.टी. (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) के अंतर्गत कार्य करती है परंतु समय- समय पर इसकी भूमिका और निष्पक्षता पर प्रश्र भी उठते रहते हैं।

सुप्रीमकोर्ट ने मई 2013 में कोयला खानों के लाइसैंसों के आबंटन में अनियमितताओं संबंधी सी.बी.आई. की जांच में हस्तक्षेप के प्रमाणों का हवाला देकर भ्रष्ट्राचार संबंधी आरोपों का सामना कर रही तत्कालीन कांग्रेस सरकार को फटकार लगाते हुए सी.बी.आई. को  ‘पिंजरे में बंद तोता’ एवं ‘हिज मास्टर्स वायस’ कहा था। 

उस समय विपक्ष में रही भाजपा ने सी.बी.आई. पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नियंत्रित होने का आरोप लगाया था। 
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सी.बी.आई. के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर एक बहस छिड़ गई थी तथा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जनवरी, 2017 में आरोप लगाया था कि ‘नरेंद्र मोदी सरकार ने सी.बी.आई. को कांसप्रेसी (साजिश) ब्यूरो आफ इंडिया में बदल दिया है।’ 

और अब मद्रास हाईकोर्ट ने 17 अगस्त को केंद्र सरकार से सी.बी.आई. को कानूनी दर्जा देकर प्रशासकीय हस्तक्षेप से मुक्त करने और इसकी स्वायत्तता यकीनी बनाने के लिए कानून बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। 

मद्रास हाईकोर्ट ने विपक्षी दलों का हवाला देते हुए कहा कि ‘सी.बी.आई. भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथों में एक राजनीतिक औजार बन गई है जिसे स्वतंत्र करने तथा ‘नियंत्रक और महालेखा परीक्षक’ (कैग) की भांति स्वायत्तता देने की जरूरत है जो केवल संसद के प्रति जवाबदेह हो।’

हाईकोर्ट ने सी.बी.आई. को अधिक शक्तियां देने तथा इसका अधिकार क्षेत्र बढ़ाने और इसके लिए अलग बजट आबंटित करने के अलावा इसके निदेशक को भारत सरकार के सचिव के समान शक्तियां प्रदान करने की बात भी कही जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करे।

चूंकि लम्बे समय से सी.बी.आई. के कामकाज और इसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लगता आ रहा है, अत: इसे कथित सरकारी दबाव से मुक्त करने के लिए कानूनी स्वायत्तता प्रदान करके सरकार अपने ऊपर लगने वाले आरोपों से बच सकती है। यही नहीं, इससे जहां सी.बी.आई. की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी वहीं गंभीर आपराधिक मामलों के दोषियों को उनके अंजाम तक जल्दी पहुंचाया जा सकेगा।

—विजय कुमार 

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