Sunday, Oct 17, 2021
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मुख्यमंत्री ‘येद्दियुरप्पा गए’ उनके स्थान पर उनके ‘करीबी बोम्मई आए’

  • Updated on 7/29/2021

दक्षिण भारत में एकमात्र भाजपा शासित राज्य कर्नाटक के चार बार मुख्यमंत्री रहे बी.एस. येद्दियुरप्पा का शुरू से ही विवादों से नाता रहा तथा अतीत में अन्य बातों के अलावा उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं।
2008 के चुनावों में कर्नाटक में येद्दियुरप्पा के नेतृत्व में पहली बार भाजपा  सरकार बनाने के लिए 5 विधायकों का इंतजाम करके उन्हें सरकार बनाने में सहयोग देने वाले ‘बेल्लारी’ के उत्खनन कारोबारी तथा राजनीतिज्ञ रैड्डी बंधुओं से उनकी निकटता के कारण भी विवाद पैदा हुए।
इन्हीं रैड्डी बंधुओं ने अवैध रूप से लौह अयस्क देश से बाहर भेजकर सरकार को लगभग 3500 करोड़ रुपए का नुक्सान पहुंचाया था। इन्हीं के दबाव के कारण येद्दियुरप्पा को 2009 में अपनी ही सरकार से अपनी पसंद के अफसरों तथा अपनी भरोसेमंद अकेली महिला मंत्री शोभा करंदलजे को मंत्री पद से हटाना पड़ा था जो अब केंद्र में मंत्री हैं।
कुछ महीनों से येद्दियुरप्पा के सांसद बेटे बी.वाई. विजयेंद्र द्वारा राज्य सरकार के कामकाज में कथित अनुचित हस्तक्षेप के लग रहे आरोपों के चलते वहां की राजनीति अत्यधिक गर्माई हुई थी। 
पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के अनुसार विजयेंद्र स्वयं को सुपर सी.एम. की तरह पेश करने लगे थे और उन पर सत्ता के दुरुपयोग तथा भ्रष्टाचार के आरोप भी लगने लगे थे। इससे येद्दियुरप्पा के लिए मुश्किल पैदा हो गई थी।
हालांकि कुछ ही दिन पूर्व भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा  ने कहा था कि येद्दियुरप्पा अच्छा काम कर रहे हैं परंतु अचानक 25 जुलाई को येद्दियुरप्पा ने त्यागपत्र देने का संकेत देने के बाद 26 जुलाई को त्यागपत्र दे दिया।
27 जुलाई को पार्टी के विधायक दल की बैठक में राज्य के गृह, कानून और संसदीय कार्य मंत्री बसावराज ‘बोम्मई’ को विधायक दल का नेता चुन लिया गया जिन्होंने 28 जुलाई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। विधायक दल की बैठक में ‘बोम्मई’ के नाम का प्रस्ताव स्वयं येद्दियुरप्पा ने पेश किया जिस पर सभी ने सर्वसम्मति की मोहर लगा दी। 
हालांकि इससे पहले पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अनेक नामों पर विचार किया था जिनमें आर.एस.एस. तथा भाजपा के वफादार के रूप में मशहूर 6 बार विधायक रहे और अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित एस. अंगारा और उपमुख्यमंत्री गोविंद करजोल के नाम सबसे आगे थे, परंतु अंतिम समय पर बैठक में ‘बोम्मई’ के अलावा कोई अन्य नाम पेश नहीं किया गया। 
नए मुख्यमंत्री के चुनाव से पहले ही येद्दियुरप्पा के बेटे एवं सांसद बी.वाई. विजयेंद्र ने कह दिया था कि पार्टी द्वारा नए मुख्यमंत्री का चुनाव हैरान करने वाला होगा। 
कहने को तो येद्दियुरप्पा (78) ने भाजपा के 75 वर्ष की आयु के मापदंड के चलते त्यागपत्र दिया है परंतु पार्टी नेतृत्व ने उनके त्यागपत्र के बाद राज्य में भाजपा की नई टीम गठित करने के लिए तुलनात्मक दृष्टि से कम आयु के बसावराज ‘बोम्मई’ (61) को मुख्यमंत्री बनाया है।
येद्दियुरप्पा के सबसे करीबी और विश्वासपात्र होने के कारण ‘बोम्मई’ को चुना गया है क्योंकि इस समय येद्दियुरप्पा का पसंदीदा उम्मीदवार न चुनना अगले चुनावों में भाजपा के लिए महंगा पड़ सकता है। 
येद्दियुरप्पा की भांति ही ‘बोम्मई’ के भी ‘लिंगायत’ समुदाय से संबंधित होने के कारण ‘लिंगायत’ समुदाय में इस बदलाव से नाराजगी भी पैदा नहीं होगी। येद्दियुरप्पा के अलावा भाजपा के केंद्रीय नेताओं से निकटता भी उनके चयन के मुख्य कारणों में से एक बताया जा रहा है। 
कुल मिलाकर केंद्रीय भाजपा नेतृत्व ने येद्दियुरप्पा के स्थान पर ‘बोम्मई’ की नियुक्ति करने का कदम सोच- समझ कर ही उठाया होगा परंतु येद्दियुरप्पा के स्थान पर उन्हीं की ‘सिफारिश’ पर नियुक्त किए गए ‘बोम्मई’ उनकी छाया से निकल कर स्वतंत्र रूप से काम कर पाते हैं या नहीं इसका जवाब तो भविष्य ही देगा।  
समय की जरूरत के अनुसार येद्दियुरप्पा के स्थान पर भाजपा नेतृत्व ने तुलनात्मक दृष्टि से युवा नेता को कर्नाटक की बागडोर सौंपी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह प्रदेश की जनता को कैसा शासन प्रदान करते हैं और आंध्र प्रदेश व अन्य राज्यों के साथ जारी गोदावरी जल विवाद तथा महाराष्ट के साथ चल रहे सीमा विवाद आदि समस्याओं को किस प्रकार सुलझाते हैं।

—विजय कुमार

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