Tuesday, Apr 07, 2020
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सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को ‘मुआवजे’

  • Updated on 1/24/2020

 

 दुर्घटना का नाम सुनते ही व्यक्ति एकदम गम्भीर हो जाता है। वह भी भारत जैसे देश में जो विश्व के लगभग 200 देशों में करवाए गए एक सर्वे के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर की दौड़ में प्रथम स्थान पर है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें 1 लाख 50 हजार नागरिक मारे जाते हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 5 लाख व्यक्ति प्रति वर्ष गम्भीर रूप से शारीरिक चोटों के शिकार होते हैं। इन आंकड़ों को यदि और सूक्ष्म रूप से समझा जाए तो प्रत्येक 10 मिनट में लगभग 3 भारतवासी सड़क  दुर्घटनाओं में अपना जीवन गंवा चुके होते हैं और प्रत्येक 10 मिनट में लगभग 10 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती कराए जाते हैं। भारत की सड़कों पर वाहनों की नहीं, मृत्यु की दौड़ चल रही होती है। कौन कब इसका शिकार हो जाए, इसका किसी को कुछ पता नहीं।

वाहन दुर्घटनाओं में कैसे कमी लाई जा सके
भारत की केन्द्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में भारी संशोधनों के माध्यम से ट्रैफिक नियमों में जुर्माने की राशि बढ़ाकर इस प्रयास में जुटी है कि किसी प्रकार से वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। मोटर वाहन कानून दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को मुआवजे का दावा करने की पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराता है। सभी अदालतों में मोटर दुर्घटना मुआवजा प्राधिकरण प्रत्येक जिला स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इन मुआवजा अदालतों की जिम्मेदारी है कि वे तीव्र गति से मुआवजा याचिकाओं पर आदेश जारी करें। परन्तु ये अदालतें भी आम दीवानी अदालतों की तरह प्रत्येक याचिका को निपटाने में कई वर्ष लगाती हैं। दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजे से संबंधित प्रावधानों का ज्ञान भी नहीं होता। 

सड़क पर कहीं भी दुर्घटना होने पर जहां एक तरफ  पीड़ितों को तुरन्त अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है, वहीं दुर्घटना स्थल पर खड़े अन्य व्यक्तियों का यह दायित्व होना चाहिए कि वे दुर्घटना के तुरन्त बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहनों तथा उस स्थल की स्पष्ट तस्वीरें मोबाइल फोन से रिकार्ड करें। दुर्घटनास्थल की छोटी-सी वीडियो भी बनाई जानी चाहिए। किसी भी सड़क दुर्घटना की एफ.आई.आर. उस स्थानीय पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जानी चाहिए जिसके क्षेत्र में दुर्घटना घटी हो, क्योंकि एफ.आई.आर. के बिना आपको दुर्घटना में घायल व्यक्ति के इलाज आदि तथा मृतक का मुआवजा नहीं मिल सकेगा।

पुलिस के आने पर फोटो और वीडियो पुलिस को सौंपी जाएं तथा दुर्घटना पीड़ित व्यक्ति के परिवार को भी दी जाएं। प्रत्येक सड़क दुर्घटना के बाद पुलिस द्वारा दोषी ड्राइवर का लाइसैंस, वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र तथा बीमा प्रमाण पत्र की प्रतियां लेकर ड्राइवर के विरुद्ध आपराधिक मुकद्दमा दर्ज किया जाता है। पीड़ित व्यक्ति के परिवार को मुआवजे की याचिका व्यक्तिगत रूप से मुआवजा प्राधिकरण में प्रस्तुत करनी चाहिए। दुर्घटना में दोष किसी का भी हो परन्तु प्रत्येक मृत्यु के लिए 50 हजार रुपए का मुआवजा याचिका प्रस्तुत करने के तुरन्त बाद मिलने का प्रावधान है। गम्भीर और स्थायी शारीरिक क्षति के लिए इसी प्रकार 25 हजार रुपए का मुआवजा मिलता है। 

दुर्घटना का कारण बनने वाले ड्राइवर का दोष सिद्ध होने पर अदालत पीड़ित व्यक्ति की आय, आयु, परिवार के सदस्यों की संख्या, वैवाहिक स्तर, शिक्षा और परिवार को हुई आॢथक क्षति को देखकर भारी मुआवजा राशि का निर्धारण करती है। दुर्घटना से संबंधित मुआवजे का भुगतान वाहन की बीमा कम्पनी  द्वारा ही किया जाता है। इसलिए मोटर वाहन कानून के अन्तर्गत प्रत्येक वाहन का तृतीय पक्ष बीमा अनिवार्य किया गया है। सामान्य चैकिंग के दौरान भी किसी वाहन का बीमा न होने पर ट्रैफिक पुलिस का दायित्व है कि ऐसे मालिक का केवल चालान ही न करे अपितु उसे बीमा करवाने के लिए बाध्य करे जिससे बेकसूर दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा मिलने में बाधा न हो। जिस वाहन का बीमा न हो और वह दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो ऐसे मुआवजे की राशि वाहन मालिक को देनी पड़ती है। ऐसे लोगों से मुआवजा राशि वसूल करने के लिए अदालतों के पास उनकी सम्पत्ति जब्त करने का अधिकार भी होता है। 

दूसरी तरफ  यदि दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति का दोष भी दुर्घटना का कारण होता है तो अदालत उसके दोष का अनुपात निर्धारित करने के बाद कुल मुआवजा राशि को भी उसी अनुपात में कम कर देती है। यदि कोई दोषी ड्राइवर स्वयं भी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त होता है तो वह ड्राइवर वाहन मालिक का नौकर होने के कारण कर्मचारी मुआवजा कानून के अन्र्तगत मालिक से मुआवजा प्राप्त कर सकता है। 

कैसे करें मुआवजे का मुकद्दमा
मुआवजे का मुकद्दमा पीड़ित व्यक्ति अपने निवास की जिला अदालत में भी कर सकता है जिससे उसे मुकद्दमे के सिलसिले में कहीं दूर हुई दुर्घटना वाले स्थान पर न जाना पड़े। ऐसे मुकद्दमे करने के लिए अक्सर स्थानीय वकील बिना प्रारम्भिक फीस के भी उपलब्ध हो जाते हैं और मुआवजे की राशि मिलने के बाद सामन्यत: 10 प्रतिशत या उससे कम फीस मुआवजा राशि में से ही ले लेते हैं। ऐसे मुकद्दमे अदालत में प्रस्तुत करने की कोई समय सीमा नहीं है परन्तु पीड़ितों को चाहिए कि वे यथाशीघ्र मुकद्दमों को अदालत में प्रस्तुत करें। 

भारत में कुल दुर्घटनाओं में से लगभग 30 प्रतिशत दुर्घटनाएं ऐसी होती हैं जिनमें दोषी ड्राइवर वाहन को लेकर भाग जाता है और वाहन का नम्बर भी किसी गवाह द्वारा नोट नहीं किया जाता। ऐसे मामलों को ‘हिट एंड रन’ श्रेणी में माना जाता है और ऐसे दुर्घटना पीड़ितों को मृत्यु के केस में 2 लाख रुपए तथा गम्भीर शारीरिक क्षति होने पर 50 हजार रुपए की राशि दी जाती है। 

मोटर दुर्घटनाओं का मुआवजा एक प्रकार का सामाजिक कल्याण का कानून है। अदालतों ने इस कानून की व्याख्या में हमेशा उदारता से ही निर्णय दिए हैं। रेल दुर्घटनाओं में मरने वाले व्यक्तियों को एकमुश्त 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी जाती है, जबकि मोटर दुर्घटनाओं में मुआवजा राशि पीड़ित व्यक्ति की अवस्था पर निर्भर करती है।

-विमल वधावन

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