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प्रवासियों के लिए बसों के प्रबंध पर कांग्रेस व यू.पी. सरकार में फिजूल का  विवाद

  • Updated on 5/21/2020

जहां लॉकडाउन के चलते बेरोजगार हुए हजारों प्रवासी श्रमिक अपने राज्यों को लौटने के प्रयास में बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं में मर रहे हैं वहीं अनेक स्थानों पर आक्रोशित प्रवासी श्रमिकों को रोक कर पुलिस उन पर बल प्रयोग भी कर रही है जिस कारण 20 मई को गुरुग्राम सीमा पर जमा प्रवासी श्रमिकों की उत्तेजित भीड़ के पथराव से 10 पुलिस कर्मी घायल हो गए। 

प्रवासी श्रमिकों और अनेक विपक्षी दलों ने केंद्र एवं विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर इस विपत्ति में भी बेसहारा लोगों और जरूरतमंदों की समस्याएं सुनने और उन्हें सुलझाने में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों के लिए 1000 बसें चलाने की अनुमति मांगी तथा प्रदेश सरकार को इन बसों की सूची सौंपी थी।

प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहे इन बसों पर भाजपा के झंडे और बैनर भी लगवा लें परंतु मजबूर श्रमिकों को सुरक्षित उनके घर भिजवाने में इनका प्रयोग करें।' इस पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दावा किया कि, 'कांग्रेस द्वारा उपलब्ध करवाई गई बसों की सूची में स्कूटर, ऑटो रिक्शा, मैक्स (कैब), मोटरसाइकिल व कारों के नंबर दिए गए हैं।' इसके जवाब में प्रियंका गांधी ने कहा, 'स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार का बयान है कि हमारी 1049 बसों में से 879 बसें जांच में सही पाई गई हैं। कृपया इन बसों को तो चलने दीजिए। लोग बहुत कष्ट में और दुखी हैं।'

इस बीच जहां राजस्थान से आ रही बसों को भी उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया गया वहीं अब 20 मई को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा है कि 'इन 1000 बसों का प्रस्ताव करके कांग्रेस ने प्रवासी श्रमिकों के साथ भद्दा मजाक किया है। यह बसें कांग्रेस की नहीं राजस्थान सरकार की हैं। इन बसों में से आधी बसें फर्जी हैं और 450 बसों में गड़बड़ी है। इनमें से 297 बसें कबाड़ हैं और 68 की रजिस्ट्रेशन नहीं है। हम अनफिट बसें चलाने की अनुमति नहीं दे सकते।'

वहीं लखनऊ में उत्तर प्रदेश परिवहन के अधिकारी आर.पी.त्रिवेदी की शिकायत पर प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अन्यों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकद्दमा भी दर्ज करवाया गया है। 
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को मास्क न पहनने के आरोप में महामारी एक्ट के अंतर्गत आगरा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद आगरा कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया परंतु कोर्ट परिसर से बाहर निकलते ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया जिससे तनाव और बढ़ गया।

प्रियंका गांधी के अनुसार जब उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी थी कि 800 से अधिक बसें सही हालत में हैं तो फिर राज्य के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा द्वारा कांग्रेस की सूची में शामिल आधी बसों में गड़बड़ी बताने का औचित्य समझ से बाहर है! 

अंतत: अपनी चेतावनी के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शाम 4 बजे तक कोई प्रतिक्रिया न देने पर प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश बार्डर से बसें वापस बुला ली हैं परंतु यदि इस सूची में कारें या आटोरिक्शा भी शामिल थीं तो भी उत्तर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी क्योंकि कार में भी दो आदमी तो बैठ ही सकते थे। 

भाजपा और कांग्रेस में प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए बसों का विवाद निश्चय ही खेदजनक है और यदि कांग्रेस की यह पेशकश स्वीकार कर ली जाती तो बड़ी संख्या में श्रमिक अपने घर पहुंच सकते थे और उनकी समस्याओं का काफी सीमा तक अंत हो सकता था।

-विजय कुमार

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