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कोरोना वैक्सीन तैयार करने वाला दम्पति

  • Updated on 12/21/2020

दो वर्ष पूर्व डॉ. उगुर साहिन ने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में संक्रामक रोग विशेषज्ञों के एक सम्मेलन में एक साहसिक भविष्यवाणी की थी कि वैश्विक महामारी की स्थिति में तेजी से वैक्सीन (Corona Vaccine) विकसित करने के लिए उनकी कम्पनी अपनी ‘आर.एन.ए. टैक्नोलॉजी’ का उपयोग कर सकती है। 

उस समय डॉ. साहिन तथा उनकी कम्पनी ‘बायोएनटैक’ के बारे में कम ही लोग जानते थे। अपनी पत्नी डॉ. ओजलेम तुरेसी के साथ मिल कर बनाई  उनकी कम्पनी ज्यादातर कैंसर उपचारों पर केंद्रित थी। तब तक बाजार में न तो यह कम्पनी कोई उत्पाद लाई थी और न ही ‘कोविड-19’ का कोई अस्तित्व  था लेकिन उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई। 

गत मास ‘बायोएनटैक’ और ‘फाइजर’ ने घोषणा की कि डा. साहिन तथा उनकी टीम द्वारा विकसित कोरोना वायरस वैक्सीन परीक्षण में बीमारी को रोकने में 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी रही है। इन परिणामों ने ‘बायोएनटैक’ और ‘फाइजर’ को दुनिया भर में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों की जान ले चुकी महामारी के इलाज की दौड़ में सबसे आगे खड़ा कर दिया। 

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जनवरी में जब डॉ. साहिन ने मैडीकल जर्नल ‘द लांसेट’ में एक लेख पढ़ा तो उन्हें यकीन हो गया कि उस समय चीन के कुछ हिस्सों में तेजी से फैल रहा कोरोना वायरस एक महामारी में बदल जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अपनी कम्पनी के वैज्ञानिकों की छुट्टियां रद्द करते हुए प्रोजैक्ट ‘लाइटस्पीड’ के अंतर्गत वैक्सीन पर काम शुरू कर दिया था।
एक साक्षात्कार में डा. साहिन ने कहा था, ‘‘दुनिया में अधिक कम्पनियां नहीं हैं जिनके पास हमारे जैसी वैक्सीन तैयार करने की क्षमता तथा तेजी है। यह एक अवसर की तरह महसूस नहीं हुआ, बल्कि एक कत्र्तव्य था क्योंकि मुझे लगा कि शायद हम ही पहला टीका लेकर आएं।’’

अनेक सम्भावित वैक्सीन की पहचान करने के बाद डा. साहिन ने निष्कर्ष निकाला कि तेजी से परीक्षण करने, नियामकों से अनुमोदन जीतने और बाजार में सर्वश्रेष्ठ वैक्सीन लाने के लिए कम्पनी को मदद की आवश्यकता होगी। ‘बायोएनटैक’ और ‘फाइजर’ 2018 से फ्लू वैक्सीन पर एक साथ काम कर रही थीं और इस वर्ष मार्च में कोरोना वायरस वैक्सीन पर सहयोग करने के लिए वे सहमत हुईं।

तुर्की के इस्केंडेरन में जन्मे डॉ. साहिन जब 4 वर्ष के थे तो उनका परिवार जर्मनी आ बसा और उनके माता-पिता फोर्ड फैक्टरी में काम करने लगे। बचपन से डाक्टर बनने के इच्छुक डा. साहिन कोलोन विश्वविद्यालय में चिकित्सक बन गए। 1993 में उन्होंने ट्यूमर कोशिकाओं में इम्युनोथैरेपी पर अपने कार्य के लिए डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

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करियर की शुरूआत में ही उनकी मुलाकात डा. तुरेसी से हुई। पहले नन बनने की इच्छुक तुरेसी अंतत: डाक्टर बन गईं। 53 वर्षीय डा. तुरेसी आज ‘बायोएनटैक’ की मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं। जर्मनी में जन्मी तुरेसी तुर्की के एक चिकित्सक की बेटी हैं जो इस्तांबुल से यहां आए थे। जिस दिन उनकी शादी थी, डा. साहिन और डा. तुरेसी शादी के बाद काम के लिए प्रयोगशाला लौट आए थे। 

उनकी जोड़ी शुरू में अनुसंधान और अध्यापन पर केंद्रित थी। ज्यूरिख विश्वविद्यालय में डा. साहिन ने रॉल्फ जिनकेर्नागेल की प्रयोगशाला में भी काम किया जिन्हें 1996 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया। 

कई वर्षों बाद उन्होंने ‘बायोएनटैक’ की स्थापना की जिसका उद्देश्य कैंसर का इलाज करने के लिए संदेशवाहक आर.एन.ए. सहित प्रौद्योगिकियों की एक विस्तृत शृंखला का उपयोग करना था। 

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महामारी से पहले भी उनकी कम्पनी तेजी पकड़ रही थी। इसने सैंकड़ों मिलियन डॉलर जुटाए और अब बॢलन तथा अन्य जर्मन शहरों और कैम्ब्रिज में कार्यालयों के साथ इसके कर्मचारियों की संख्या 1,800 से अधिक है। 2018 में इसने फाइजर के साथ अपनी साझेदारी शुरू की। 

गत वर्ष ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाऊंडेशन’ ने एड्स तथा टी.बी. के इलाज पर हो रहे काम में 55 मिलियन डॉलर का निवेश किया। 2019 में डा. साहिन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में मुसलमानों के लिए द्विवार्षिक ईरानी सम्मान ‘मुस्तफा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

2016 में डॉ. साहिन और डा. तुरेसी ने 1.4 बिलियन में अपनी कम्पनी ‘गैनीमैड’ को बेच दिया। गत वर्ष ‘बायोएनटैक’ शेयर बाजार में लिस्ट हुई और हाल के महीनों में इसका बाजार मूल्य 21 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है जिससे वे जर्मनी में सबसे अमीर युगल बन गए हैं। 

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दोनों अरबपति अपने कार्यालय के पास एक मामूली से अपार्टमैंट में अपनी किशोर बेटी के साथ रहते हैं। उनके पास कार नहीं है और वे साइकिल से काम पर जाते हैं। फाइजर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बोरला के अनुसार, ‘‘वह बहुत ही अनूठे व्यक्तित्व के स्वामी हैं। वह केवल विज्ञान की चिंता करते हैं। बिजनैस पर चर्चा करना बिल्कुल पसंद नहीं करते। वह एक वैज्ञानिक तथा सिद्धांतवादी व्यक्ति हैं। मुझे उन पर 100 प्रतिशत भरोसा है।’’

डॉ. साहिन एक प्रवासी हैं जिसे लेकर जर्मनी में बहस तथा राजनीति होती रही है परंतु उनके पास इसके लिए समय नहीं है। ‘बायोएनटैक’ वैक्सीन विकसित करने में इतनी व्यस्त रही कि कम्पनी फाइजर के साथ अपने समझौते को अभी तक अंतिम रूप नहीं दे सकी है। डा. साहिन कहते हैं, ‘‘ऐसे व्यवसाय में विश्वास तथा व्यक्तिगत संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सब कुछ इतनी तेजी से हो रहा है।’’

यहां यह बात उल्लेखनीय है कि डा. उगुर साहिन तथा उनकी पत्नी डा. ओजलेम तुरेसी तुर्की की दमनकारी नीतियों से तंग आकर वहां से जर्मनी भाग आए और वहां अपनी कम्पनी कायम की और उन्होंने जिस अमरीकी कम्पनी फाइजर के मालिकों के साथ अपनी वैक्सीन के विपणन की डील की है वे भी यूनान की आॢथक स्थिति से पलायन करके अमरीका आए थे। 

आजकल के जमाने में जबकि सारे देशों में आॢथक संकट के कारण आप्रवासी विरोधी रवैया अपना कर उन्हें अपने देशों में आ कर रहने से रोकने के प्रयास कर रहे हैं, ये दो बड़े उदाहरण हैं कि वैक्सीन के निर्माता और वितरक दोनों ही प्रवासी हैं। जहां भी आॢथक स्वतंत्रता होगी वहां नई अवधारणाओं को अवश्य बढ़ावा मिलेगा।

- विजय कुमार

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