Wednesday, Jun 16, 2021
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‘लॉकडाऊन देर से लगाने के कारण’ ‘हरियाणा में बिगड़ी कोरोना की स्थिति’

  • Updated on 5/8/2021

इस समय जबकि देश के अधिकांश राज्य कोरोना महामारी के जबरदस्त प्रकोप की चपेट में हैं, इसके कारण बेरोजगार होने वाले लोगों की संख्या डेढ़ करोड़ से अधिक है तथा 23 करोड़ लोगों की आय घट कर न्यूनतम आय के स्तर से भी नीचे चली गई है। 

सर्वाधिक कोरोना प्रभावित राज्यों में हरियाणा 13वें और पंजाब 16वें स्थान पर है। हरियाणा में 7 मई को 250 से अधिक रोगी वैंटीलेटरों और 1200 से अधिक लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। इस दिन राज्य में 162 मरीजों की मौत हुई तथा 13867 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। 

राज्य में प्रतिदिन पॉजिटिव पाए जाने वाले रोगियों की संख्या 29.92 प्रतिशत तक पहुंच गई है अर्थात कोरोना के लिए जांच किए जाने वाले प्रत्येक 100 में से लगभग 30 व्यक्ति संक्रमित पाए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि हरियाणा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाले फरीदाबाद और गुडग़ांव आदि घनी आबादी वाले शहरों को बुरी तरह चपेट में लेने के बाद महामारी ने गांवों में भी पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। गत 2 सप्ताह में हिसार के ‘सिसाए’ गांव में 25 से अधिक मौतें हुई हैं।

रोहतक के टिटोली गांव में भी 2 सप्ताह में 33 लोगों की जान गई है। इनमें 4 की मौत कोरोना के कारण अस्पतालों में हुई व अन्यों की मृत्यु रहस्य के घेरे में है क्योंकि उनका अंतिम संस्कार अधिकारियों को सूचित किए बगैर किया गया। इस गांव में हरचौथा व्यक्ति कोरोना से संक्रमित पाया गया है।

राज्य के हिसार जिले में पिछले मात्र 35 दिनों में ही कोरोना ने इतने लोगों को चपेट में ले लिया जितने रोगी पिछले पूरे वर्ष में संक्रमित हुए थे। राज्य की जेलों में भी कोरोना तेजी से फैल रहा है। नसीबपुर जेल में बंद 512 कैदियों में से लगभग 60 प्रतिशत कैदी संक्रमित पाए गए। 

राज्य में अभी तक सिर्फ 12 प्रतिशत जनसंख्या को ही वैक्सीन की पहली खुराक दी जा सकी है तथा 18-44 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए ‘स्लॉट’ नहीं मिल रहे। यही नहीं, कोरोना का पता लगाने के लिए किए जाने वाले ‘आर.टी. पी.सी.आर. टैस्ट’ की रिपोर्ट आने में एक-एक सप्ताह का समय लग रहा है।  

सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डाक्टर हैं और न ही उपकरण। कई अस्पतालों में वैंटीलेटर पैक पड़े हैं क्योंकि इन्हें चलाने वाले कर्मचारी ही नहीं हैं। ब्लड प्रैशर जांचने वाली मशीन तथा ऑक्सीमीटर आदि की भी कमी है। अब स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने कोरोना के विरुद्ध संघर्ष तेज करने के लिए 4 आई.ए.एस. तथा 9 एच.सी.एस. अधिकारियों को विभिन्न जिलों में तैनात किया है, वैक्सीनेशन केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई  जा रही है तथा अधिकारियों को कोरोना के अधिक मामलों वाले गांवों की शिनाख्त करने का आदेश दिया गया है परंतु इतना ही काफी नहीं है।

लिहाजा लोगों द्वारा मास्क लगाने, सोशल डिस्टैंसिंग और बार-बार हाथ धोने आदि बचावात्मक नियमों का पालन करवाने में तेजी लाने और सख्ती बरतने की भी आवश्यकता है क्योंकि ग्रामीण और शहरी इलाकों से लगातार सुरक्षात्मक निर्देशों की अवहेलना करने की शिकायतें मिल रही हैं। 

गांवों में कोरोना के लिए टैस्टिंग का दायरा बढ़ाने की भी जरूरत है क्योंकि बदले हुए हालात में अधिक केस ग्रामीण क्षेत्रों से ही आ रहे हैं और अनेक स्थानों पर सामुदायिक संक्रमण फैलने के संकेत भी मिल रहे हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा के अनुसार, ‘सरकार द्वारा कोरोना का मुकाबला करने की कोई तैयारी न करने का खमियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।’’  इनैलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कहा है कि, ‘‘कोरोना से प्रदेश की हालत बेहद खतरनाक हो गई है तथा सरकारी लोगों की मिलीभगत से ऑक्सीजन और इंजैक्शन की कालाबाजारी हो रही है।’

विरोधी दल तो कोरोना से निपटने के मामले पर सरकार की आलोचना करेंगे ही, सरकार में भागीदार जजपा नेता दिग्विजय चौटाला ने भी इस महामारी में प्रत्येक कार्यकत्र्ता से जरूरतमंदों की हर सहायता करने का आह्वान किया है। यह भी कहा जाता है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए चिकित्सक बहुत पहले से ही लॉकडाऊन लगाने की सलाह दे रहे थे। 

बहरहाल अब स्थिति बेकाबू हो जाने के बाद पहले 9 जिलों में शनिवार और रविवार का लॉकडाऊन लागू किया गया और अब 3 मई को इसे बढ़ा कर पूरे हरियाणा में एक सप्ताह का कर दिया गया है। यदि सरकार पहले ही चेतावनी पर अमल करके लॉकडाऊन लगा कर उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाती तो शायद आज हरियाणा की स्थिति इस प्रकार की न होती।

—विजय कुमार 

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