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Farmers benefit in the third installment of reliefs package but much more to be done aljwnt

राहतों की तीसरी किस्त में किसानों को लाभ परन्तु अभी बहुत कुछ करना बाकी

  • Updated on 5/16/2020

संकट के दौर से गुजर रहे देश के उद्योगजगत और कारोबारियों को राहत देने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 मई को देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए कहा था कि इस पैकेज के अंतर्गत समाज के विभिन्न वर्गों को दी जाने वाली राहतों का खुलासा वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 13 मई से किस्तवार करेंगी।

इसी के अनुरूप 13 मई को श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 7 सैक्टरों के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपए के आॢथक पैकेज से संबंधित घोषणाएं कीं, जिनमें एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग), ई.पी.एफ., प्रत्यक्ष कर, रियल एस्टेट, बिजली कम्पनियों, नॉन बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां और कंस्ट्रक्शन कम्पनियां शामिल हैं।  इन घोषणाओं में वित्त मंत्री का सर्वाधिक जोर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर रहा।

अगले दिन 14 मई को छोटे किसानों, प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्वरोजगार करने वालों के लिए 3.16 लाख करोड़ रुपए की राहतों की घोषणा की गई। और अब 15 मई को वित्त मंत्री ने राहतों की तीसरी किस्त की घोषणा की है। वित्त मंत्री के अनुसार इन राहतों का उद्देश्य लोकल प्रोडक्ट को ग्लोबल बनाने पर जोर देना और सप्लाई चेन को सुधारना है।

कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए घोषित 11 कदमों के अंतर्गत खेती से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अनाज भंडारण और फसल की कटाई के बाद अनाज के प्रबंधन के अलावा अन्य कृषि आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड दिया गया है।

* इसके अलावा किसानों को उनके उत्पाद की सही कीमत दिलाने के लिए 3 सुधारों की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

* माइक्रो फूड एंटरप्राइकिाज के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का फंड बनाया गया है जिससे 2 लाख फूड प्रोसैसिंग इकाईयों को लाभ होगा।  लोगों को रोजगार मिलेगा और आय के साधन बढ़ेंगे।

* समुद्री और घरेलू मछली पालन के लिए 11 हजार करोड़ रुपए और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 9 हजार करोड़ रुपए का कोष जारी किया जाएगा।

* पशुपालन को बढ़ावा देने और भैंसों, भेड़ों तथा बकरियों को विभिन्न रोगों से बचा कर पशु पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उनके टीकाकरण पर 13 हजार 343 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे 53 करोड़ मवेशी बीमारियों से मुक्त होंगे।

* पशुपालन में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर 15 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे अधिक दूध उत्पादन होगा और इसके लिए प्रोसैसिंग यूनिट आदि लगाए जाएंगे।

* हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए 4 हजार करोड़ रुपए का फंड स्वीकार किया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार इससे किसानों को 5 हकाार करोड़ रुपए की आय होगी।

* ‘टॉपटू टोटल’ योजना के अंर्तगत 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पहले यह केवल टमाटर, आलू और प्याज के लिए था, लेकिन अब सप्लाई चेन सुधारने के लिए यह सभी फल-सब्जियों पर लागू किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत सभी फल-सब्जियों और माल-भाड़े पर 50 प्रतिशत सबसिडी स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज के लिए दी जाएगी।

* कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश बढ़ाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव किया जाएगा। किसानों को अभी अपना उत्पाद ए.पी.एन.सी. लाइसैंस धारकों को ही बेचना पड़ता है परन्तु अब वे अपने उत्पाद को दूसरे राज्यों में भी जाकर बेच सकेंगे।

किसानों को अपने उत्पाद बेचने में सहायता देने के लिए ई-ट्रेडिंग की सुविधा दी जाएगी और इससे किसानों की आय बढ़ेगी और सप्लाई चेन बेहतर होगी।

वित्त मंत्री द्वारा किसानों से जुड़ी राहतों की घोषणा से किसानों को अवश्य कुछ लाभ मिलने की उम्मीद की जा सकती है। आशा करनी चाहिए कि अपनी अगली घोषणाओं में वित्त मंत्री समाज के छूट गए वर्गों के लिए भी कुछ राहतों का ऐलान अवश्य करेंगी।

वित्त मंत्री के अनुसार इन राहतों से किसानों की निश्चित आय में वृद्धि होगी और उनका उत्पीड़न रुकने से किसानों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। परन्तु अभी भी किसानों के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।

- विजय कुमार

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