Friday, Jul 30, 2021
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योगी द्वारा यू.पी. फिल्म सिटी बनाना अच्छी कोशिश परन्तु यह संभव हो पाएगा!

  • Updated on 12/3/2020

मुम्बई शुरू से ही देश की वित्तीय राजधानी होने के साथ-साथ समुद्र के किनारे बसा होने के कारण दूसरे देशों के साथ होने वाली तमाम गतिविधियों का प्रवेश द्वार भी है। इस नाते दुनिया की तमाम बेहतरीन वस्तुएं, फैशन सामग्री, कारें, दवाएं और सभी वस्तुएं सबसे पहले मुम्बई ही पहुंचती हैं। 

मुम्बई में ही भारत की पहली पूरी अवधि की मूक फिल्म ‘राजा हरिशचंद्र’ (मराठी) का निर्माण 107 वर्ष पहले 1913 में भारतीय सिनेमा के पितामह ‘दादा साहेब फाल्के’ (Dada Saheb Phalke) ने किया था। हालांकि इसके बाद मद्रास, कोलकाता और अविभाजित भारत के लाहौर भी फिल्म निर्माण के केंद्र बने परंतु ये मुख्यत: पंजाबी, बंगाली और दक्षिण भारतीय फिल्मों के निर्माण तक ही सीमित रहे तथा मुम्बई के ‘बॉलीवुड’ (Bollywood) का फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी स्थान बना रहा। 

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अविभाजित भारत के पंजाबी फिल्मकारों में रामानंद सागर, बी.आर. चोपड़ा, यश चोपड़ा, मो. रफी, सुरेंद्र, नूरजहां, मुनव्वर सुल्ताना, बलराज साहनी, पंडित केदार शर्मा, श्यामा, पृथ्वीराज कपूर, दलसुख पंचोली, सुरैया, ओ.पी. नैयर, शमशाद बेगम, सुरेंद्र कौर, प्रकाश कौर, गुलाम हैदर, राम दयाल, गौहर, जानकी दास, प्राण, ओम प्रकाश जैसी हस्तियां मुम्बई की फिल्म नगरी का हिस्सा जा बनीं।

इसी प्रकार कलकत्ता  से सम्बन्ध रखने वालों में कुुंदन लाल सहगल, बिमल राय आदि शामिल हैं जिनमें से अधिकांश स्वतंत्रता के दौर में मुम्बई शिफ्ट हो गए। पंजाब, दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल से सम्बन्धित अन्य फिल्मकारों ने मुम्बई को एक अलग पहचान दी और आलीशान बंगले, बड़े-बड़े फिल्म स्टूडियोज और फिल्में बनाने के अलावा अभिनय में नाम कमाया। 

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इनमें चेतन आनंद, देव आनंद, विजय आनंद, राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, मनोज कुमार, राज कुमार, राजेंद्र कुमार व ओ.पी.रल्हन आदि प्रमुख हैं। देश का अग्रणी शहर होने के कारण विभिन्न भागों से आकर बड़े-बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों ने मुम्बई को अपना केंद्र बनाया ताकि वे यहां अपने व्यापार एवं उद्योगों को बढ़ावा दे सकें।

अब उत्तर प्रदेश के नोएडा में फिल्म सिटी बनाने के लिए योगी आदित्य नाथ सक्रिय हुए हैं और वेे मुम्बई के अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान फिल्म सिटी से जुड़े कलाकारों, धन्ना सेठों, ब्रोकरों, फिल्म निर्माताओं और उद्योगपतियों आदि से मिले। उनका कहना है कि हम मुम्बई की फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में शिफ्ट नहीं कर रहे बल्कि वहां एक नई दुनिया बसाने जा रहे हैं। 

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भाजपा की पूर्व सहयोगी ‘शिवसेना’ के नेता तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पर कहा ‘‘मुम्बई में एक चुम्बकीय शक्ति है और हम राज्य से किसी को भी जबरदस्ती कारोबार बाहर नहीं ले जाने देंगे। हमने इसके लिए खून-पसीना बहाया है।’’  

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अनिल देशमुख ने कहा, ‘‘मुम्बई से बाहर ऐसा माहौल मिलना मुश्किल है और हम इसे मुम्बई से बाहर नहीं जाने देंगे।’’ और ‘शिवसेना सांसद’ संजय राऊत ने भी कहा है कि ‘‘मुम्बई की फिल्म सिटी को कहीं और शिफ्ट करना आसान नहीं है।’’

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जहां ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ ने योगी आदित्यनाथ की इस कवायद को ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ बताया है वहीं जिस होटल में योगी आदित्य नाथ ठहरे, उसके बाहर राकांपा ने हंगामा भी किया। ‘राकांपा’ नेता नवाब मलिक के अनुसार‘‘योगी आदित्य नाथ उत्तर प्रदेश में बॉलीवुड जैसी फिल्म सिटी बनाने की बात कर रहे हैं। यह अच्छी बात है परंतु यह समझ लेना कि 100 साल से मुम्बई को मिला बालीवुड का दर्जा समाप्त हो जाएगा और लोग पूरी तरह से अन्य राज्यों में चले जाएंगे, गलत होगा...बालीवुड के दर्जे को कोई समाप्त नहीं कर सकता।’’ 

बेशक योगी आदित्यनाथ ने यू.पी. के विकास के लिए अनथक प्रयास किए हैं तथा ‘फिल्म सिटी’ कायम करने का उनका प्रस्ताव अच्छा हो सकता है परंतु वह फिल्म निर्माण के लिए मुम्बई की मायानगरी जैसा विशाल बुनियादी ढांचा खड़ा कर पाएंगे इसमें कई लोगों को संदेह है।

—विजय कुमार

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