Sunday, Apr 18, 2021
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fraud through mobile app in the name of loan at low interest aljwnt

सस्ते ऋण के लालच में ऐप्स के ‘मायाजाल में फंस रहे लोग’

  • Updated on 2/15/2021

कोरोना काल के दौरान जब देश में लॉकडाउन (Lockdown) हुआ तो लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। ऐसे में लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ तो लोग बैंकों की तरफ कर्ज लेने के लिए भागे लेकिन बैंकों की लंबी औपचारिकताओं और लोन हासिल करने की शर्तों को पूरा न कर पाने से निराश लोग ऐसे एप्स के जाल में फंस गए जो एक मिनट के भीतर कर्ज उपलब्ध करवाते थे। 

लोगों ने ऐसे एप्स के जरिए मात्र 15 दिनों तक की छोटी अवधि से लेकर लम्बी अवधि तक के लिए जरूरत पडऩे पर कर्ज तो ले लिया लेकिन अब यही कर्ज उनकी मानसिक परेशानी का कारण बन रहा है। इन एप्स के जरिए दिए गए कर्ज पर ब्याज की दर 30 प्रतिशत तक थी जो बैंकों द्वारा ली जाने वाली 10 से 20 प्रतिशत ब्याज की दर की तुलना में काफी अधिक थी। इन एप्स के जरिए जिन लोगों को कर्ज दिया जा रहा था उनकी निजी जानकारी भी ये एप्स प्राप्त कर रहे थे। इस निजी जानकारी में कर्ज लेने वाले व्यक्ति की फोन नंबर की जानकारी के अलावा फोन में मौजूद फोटोग्राफ्स और व्यक्ति की लोकेशन को ट्रैक करने की अनुमति मांगी गई थी। 

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एप्स को इतनी व्यक्तिगत जानकारी देना ही कर्जधारकों के लिए सिरदर्द बन गया है क्योंकि अब इन एप्स के रिकवरी विभाग से जुड़े लोग कर्जदाताओं को फोन करके भद्दी शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं और कर्ज के बारे में तमाम दोस्तों और रिश्तेदारों को जानकारी देने की धमकियां देकर मानसिक तौर पर प्रताडि़त कर रहे हैं।ट्रेसा और जैनिस मकवाना नाम के दो कर्जधारकों को ऐसी ही मानसिक प्रताडऩा से गुजरना पड़ा। जैनिस का आरोप है कि उसके भाई अभिषेक ने इसी तरह के एप से 1500 डॉलर का कर्ज लिया था और नवम्बर में एप के रिकवरी विभाग द्वारा दी गई धमकियों के बाद उसने आत्महत्या कर ली। और उसकी मौत के बाद भी उसके परिवार के लोगों को धमकियां दी जाती रहीं।

इसी तरह के एक मामले में कलाई सेल्वन नाम के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कलाई सेल्वन के दोस्त ने इसी तरह के एप से कर्ज लिया था और वह मानसिक प्रताडऩा से गुजर रहा था। उसे देखकर कलाई सेल्वन ने अपने दोस्त की तरह पीड़ित व्यक्तियों का डाटा इकट्ठा करना शुरू किया। उन्होंने 8 महीनों में 46,000 शिकायतें एकत्र की हैं और उन्हें अब भी रोजाना ऐसे एप्स का शिकार होने वाले लोगों के 100 से 200 तक ऐसे फोन आते हैं। 

पुलिस ने इन एप्स से जुड़े इस तरह के प्रताडऩा के मामलों में 17 दिसम्बर को गुरुग्राम, दिल्ली और हैदराबाद में छापे मारकर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है और पुलिस इनके साथ जुड़े लोगों की जांच कर रही है।मामले की जांच से जुड़े साइबर सुरक्षा के माहिर अमित दुबे के अनुसार  जांच में यह सामने आया है कि इस तरह के एप्स न सिर्फ व्यक्तिगत डाटा चोरी कर रहे हैं बल्कि उन्हें इस बात की भी जानकारी है कि कर्ज लेने वाले व्यक्ति ने यह पैसा कहां ट्रांसफर किया है और इसका इस्तेमाल किस रूप में हुआ है।

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इस तरह के एप्स का संचालन करने वाले अदृश्य लोग कर्ज लेने वालों का अन्य अनेक तरीकों से शोषण कर रहे हैं। यह डाटा स्टोर करके अपराधी सिंडिकेटों को बेचने के अलावा ‘डार्क वैब’ पर भी डाला जा सकता है। यहां तक कि एक ही व्यक्ति इस तरह के अनेक एप्स बनाकर एक ही सर्वर के माध्यम से उनका संचालन करता पाया गया है आमतौर पर ऐसे सर्वर भारतीय न्याय प्रणाली के अधिकार क्षेत्र से दूर चीन में हैं और इन पर नियंत्रण कर पाना कठिन है। 

यही नहीं, जब आप एक एप से कर्ज ले लेते हैं तो वह एप आपका डाटा अन्य एप के साथ शेयर कर देता है जिससे आपको कर्ज के अन्य आकर्षक ऑफर मिलने शुरू हो जाते हैं। इससे व्यक्ति एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेता जाता है और अजीब स्थिति में फंस जाता है। इनमें से अधिकतर एप्स को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मान्यता नहीं है इसलिए गूगल ने कई एप्स को अपने प्ले स्टोर से हटा दिया है। यदि आपको भी पैसे की जरूरत है तो मान्यता प्राप्त बैंक से ही कर्ज लें और ऐसे किसी एप्स के जाल में न फंसें ताकि आपको भी मानसिक प्रताडऩा के दौर से न गुजरना पड़े।

वित्त मंत्रालय को भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस पर आर.बी.आई. की मदद से कानून बनाना चाहिए ताकि आर.बी.आई. के साथ पंजीकरण के बिना कोई भी व्यक्ति किसी एप के जरिए लोगों को सस्ते कर्ज का प्रलोभन देकर फंसा न सके।

- विजय कुमार

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