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‘वित्तीय संकट से लटका’‘नौसेना का आधुनिकीकरण’

  • Updated on 1/4/2021

7800 किलोमीटर से अधिक की लम्बी तटरेखा के साथ भारतीय नौसेना को हर समय देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन के साथ चल रहे भारत के विवाद के बीच भारतीय नौसेना को अपने आधुनिकीकरण की योजना में धन की कमी के कारण परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे में 200 शिप्स लेने की बजाय इनकी संख्या कम कर के 175 की जा सकती है और तीसरे एयरक्राफ्ट करियर की योजना को भी फिलहाल टाला जा सकता है। इससे निश्चित ही चीन के विरुद्ध बने आस्ट्रेलिया, जापान, अमरीका और भारत के समूह ‘क्वाड’ में भारत की स्थिति कमजोर होती है क्योंकि ये देश समुद्र में चीन का प्रभाव घटाने के लिए भारत का सहयोग चाहते हैं। 

भारत ने अपनी सेना का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के साथ लगती पश्चिमी सीमा पर तैनात कर रखा है और यदि  भारत को  चीन के साथ भी उत्तरी सीमा पर इसी तरह की तैनाती करनी है तो देश के रक्षा बजट में थल सेना पर होने वाला खर्च और बढ़ाना पड़ेगा। पहले ही भारत के रक्षा बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा देश की लगभग साढ़े 13 लाख की मजबूत थल सेना पर खर्च होता है और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम बजट मिल पाता है। 

रक्षा बजट में नौसेना की हिस्सेदारी 2012 से 18 प्रतिशत से कम हो कर 2019-20 में 13 प्रतिशत रह गई है और यह नौसेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं में सबसे बड़ी समस्या है। वित्त वर्ष 2019-20 में जारी हुए रक्षा बजट में से सर्वाधिक 39,302.64 करोड़ रुपए वायु सेना को जारी हुए हैं जबकि थल सेना को 29,461.25 करोड़ रुपए और नौसेना को सबसे कम 23,156.43 करोड़ रुपए का आबंटन हुआ। नौसेनाध्यक्ष एडमिरल कर्मबीर सिंह धन की कमी के कारण  आधुनिकीकरण में आ रही रुकावट के संबंध में सरकार को जानकारी दे चुके हैं और मौजूदा हालत में नौसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की जरूरत के बारे में उन्होंने सरकार को बताया है। 

नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को यह भी बताया है कि उसको कम बजट दिए जाने की स्थिति में नौसेना अपने आधुनिकीकरण की योजनाओं में बदलाव कर सकती है। फिलहाल नौसेना के बेड़े में वृद्धि के लिए 50 शिप और पनडुब्बियां  निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा नौसेना किसी भी सूरत में 2022 तक अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजैक्ट ‘विक्रांत’ के निर्माण को पूरा करना चाहती है। फिलहाल नौसेना के पास एक मात्र एयरक्राफ्ट करियर ‘विक्रमादित्य’ ही है। नौसेना की योजना कम से कम 3 एयरक्राफ्ट करियर रखने की है ताकि 2 हमेशा ही ऑपरेशंस में रहें। इसके अलावा ‘डिफैंस एंड रिसर्च डिवैल्पमैंट आर्गेनाइजेशन’ ने 2026 तक नौसेना को दो इंजन वाले हल्के लड़ाकू विमान बना कर देने की पेशकश की है। 

दुनिया भर में चीन के बढ़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए भारत को अपनी नौसेना को मजबूत करना बहुत जरूरी है लेकिन लद्दाख सीमा पर चीन के साथ बढ़े विवाद के चलते नौसेना की तरफ से बजट की मांग बढऩे लगी है क्योंकि लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की तैनाती और रख रखाव का खर्च बहुत अधिक है और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था के बीच भारत के लिए इतना खर्च करना बहुत मुश्किल काम है। दूसरी ओर यदि हम चीन की अर्थव्यवस्था की बात करें तो यह भारत के मुकाबले 6 गुणा बड़ी है और चीन की सेना भी भारतीय सेना के मुकाबले संख्या में डेढ़ गुना ज्यादा है। 

अमरीका के रक्षा विभाग के अनुसार पिछले दो दशक में चीन ने अपनी सेना की ताकत बढ़ाने के लिए तमाम संसाधन झोंके हैं और सेना को तकनीकी तौर पर मजबूत बनाने के लिए भी खूब खर्च किया है। इतना ही नहीं चीन के सियासतदानों ने इस दिशा में जबरदस्त राजनीतिक इच्छा शक्ति भी दिखाई है और यदि उसे लद्दाख में भारत के विरुद्ध सेनाओं की लंबे समय के लिए तैनाती करनी है तो उसे आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर कोई समस्या नहीं आएगी। चीन के साथ लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर में चल रही खींचतान के बीच  देश की तीनों सेनाओं का और अधिक मजबूत होना बहुत जरूरी है। 

हालांकि वायुसेना में राफेल आने के बाद इसकी ताकत बढ़ी है लेकिन देश की तीनों सेनाओं को अभी भी आधुनिकीकरण के लिए सरकार की तरफ से मदद की बड़ी जरूरत है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22  के लिए देश का आम बजट पेश करेंगी तो निश्चित रूप से उनके मन में देश की नौसेना द्वारा रक्षा बजट में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग का सवाल भी होगा और उम्मीद करनी चाहिए कि अगले बजट के दौरान वह संतुलित रक्षा बजट पेश करेंगी और  सेना के तीनों अंगों को उनकी मांग के अनुसार बजट में हिस्सेदारी मिलेगी और इस से देश की ताकत भी बढ़ सकेगी। 

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