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‘देश को बेहतरी की ओर ले जाने वाले’ ‘चंद महत्वपूर्ण निर्णय’

  • Updated on 1/12/2021

कभी-कभी केंद्र और राज्यों की सरकारें जनहित से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आदेश जारी करती हैं। ऐसे आदेशों की शृंखला में हाल ही में ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ के अलावा गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व महाराष्ट्र सरकारों तथा सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने चंद ऐसे आदेश जारी किए हैं जिनका भ्रष्टाचार मुक्त स्वच्छ प्रशासन, आम लोगों की सुरक्षा, उन्नति व सेहत से सीधा संबंध है। 

* 15 दिसम्बर, 2020 को ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ ने भ्रष्टाचार निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पग उठाते हुए देश के सभी संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों व बीमा कम्पनियों से भ्रष्ट कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई को 6 महीने के भीतर अंतिम रूप देने का आदेश दिया। 
‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ के संज्ञान में आया था कि भ्रष्टाचार निवारण से जुड़े अधिकारी इस मामले में समय सीमा का पालन नहीं कर रहे। इससे भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में समय लगने के कारण ऐसे मामलों को अंजाम तक पहुंचाने में देरी हो रही है। 

*  16 दिसम्बर को ‘गुजरात सरकार’ ने समाज विरोधी तत्वों द्वारा जमीनों पर अवैध कब्जे करने के रुझान पर रोक लगाने के लिए कठोर दंड प्रावधानों वाला ‘अवैध कब्जा निरोधक कानून’ पारित किया ताकि छोटे किसानों एवं आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा की जा सके।
इसके अनुसार दोषियों के लिए 14 वर्ष कैद के प्रावधान के साथ-साथ इस तरह के मामलों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर सुलझाने की व्यवस्था की गई है। इस कानून के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से राज्य में समितियों और विशेष अदालतों का गठन कर दिया गया है। 

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* 16 दिसम्बर को ही ‘राजस्थान सरकार’ ने समाज के सर्वाधिक उपेक्षित वर्ग ‘ट्रांसजैंडरों’ और ‘भिखारियों’ को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता देने के उद्देश्य से उनके लिए नए कौशल विकास कार्यक्रम आरंभ करने का निर्णय किया है। इससे ‘ट्रांसजैंडरों’ और ‘भिखारियों’ को समाज की मुख्यधारा में शामिल होने में सहायता मिलेगी।
* 18 दिसम्बर को ‘हरियाणा के परिवहन आयुक्त’ ने वाहनों की ‘ओवरलोडिंग’ से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया। इसके अंतर्गत ‘ओवरलोडिंग’ करने वाले वाहन चालकों को जुर्माना करने के साथ-साथ उनका ड्राइविंग लाइसैंस और वाहन की आर.सी. भी रद्द कर दी जाएगी। यह आदेश भी दिया गया है कि कोई भी वाहन चालक अथवा वाहन का मालिक वाहन से संबंधित कोई भी काम एजैंटों के माध्यम से न करवाए और ऐसा करता पाए जाने पर उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। 

* 29 दिसम्बर को ‘मध्य प्रदेश सरकार’ ने खाद्य वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए एक अध्यादेश पारित करके उम्रकैद का प्रावधान किया है। इसके अलावा ‘एक्सपायरी डेट’ निकल चुकी खाद्य वस्तुएं बेचने वालों के लिए 5 वर्ष कैद और 1 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने कहा कि उपभोक्ताओं को मिलावटखोरों के रहम पर नहीं छोड़ा जा सकता। 

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* 4 जनवरी को ‘केंद्र सरकार’ ने ‘ट्रांसजैंडरों’ को दरपेश समस्याएं दूर करने और उनका जीवन स्तर उन्नत करने के  लिए 500 करोड़ रुपए की पंचवर्षीय योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत ‘ट्रांसजैंडर’ समुदाय से संबंधित छात्रों को छात्रवृत्ति देना, इन्हें आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना, इनके लिए मकानों का निर्माण और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं प्रदान करना आदि शामिल है। 

* 7 जनवरी, 2021 को सुप्रीमकोर्ट ने आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बने गुटखे को प्रतिबंधित करने की कानूनी लड़ाई में महाराष्ट्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने ‘औरंगाबाद खंडपीठ’ के आदेश पर रोक लगाते हुए अब महाराष्ट्र में गुटखा, पान मसाला व सुगंधित तंबाकू बेचना गैर-जमानती अपराध बनाने के साथ ही इसके लिए 10 साल कैद की सजा का रास्ता साफ कर दिया है। 

मिलावट करने वाले व्यापारियों को कठोरतम दंड दिया जाए
उक्त निर्णयों से जहां सरकारी अधिकारियों का भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी, वहीं दबंगों द्वारा कमजोर वर्ग के लोगों की जमीनों पर किए जाने वाले अवैध कब्जों पर रोक लगाने, वाहनों की ‘ओवरलोङ्क्षडग’ से होने वाली दुर्घटनाएं रोकने, ‘ट्रांसजैंडरों’ एवं ‘भिखारियों’ के पुनर्वास तथा लोगों को गुटखे के सेवन से होने वाली कैंसर जैसी बीमारी से भी बचाया जा सकेगा। परंतु अतीत का अनुभव बताता है कि पारित आदेशों और कानूनों का कठोरतापूर्वक पालन नहीं होने से इनका वास्तविक उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है और वे निरर्थक सिद्ध होते हैं, अत: आवश्यकता इस बात की है कि उक्त आदेशों और निर्णयों को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित करके इन्हें देश भर में लागू किया जाए ताकि सभी इनसे लाभ उठा सकें।

—विजय कुमार 

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