Monday, Mar 30, 2020
increased tension goodwill of leaders in the country

देश में नेताओं की अनर्गल बयानबाजी से बढ़ रहा तनाव और लुप्त हो रही सद्भावना

  • Updated on 2/7/2020

इन दिनों जहां दिल्ली में सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. तथा दिल्ली के चुनावों को लेकर देश का राजनीतिक वातावरण गर्माया हुआ है और युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है वहीं राजनीतिज्ञों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर एक-दूसरे के विरुद्ध दिए जा रहे विषैले बयानों से भी जैसे आग में घी डालने का काम किया जा रहा है। इससे समाज में तनाव बढ़ रहा है और सद्भावना लुप्त हो रही है। 

हाल ही में पूर्व मंत्री एवं सांसद अनंत कुमार हेगड़े (भाजपा) तथा भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, कांग्रेस के राहुल गांधी और अधीर रंजन चौधरी तथा तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने अत्यंत विवादास्पद बयान दिए हैं।
महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए स्वतंत्रता आंदोलन को नाटक करार देकर भाजपा के अनंत कुमार हेगड़े आलोचना के पात्र बने तो संबित पात्रा को एक टी.वी. कार्यक्रम में भड़काऊ बयान देने पर चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस थमाया है। इस बयान में उन्होंने हिन्दुओं को ‘आगाह’ करते हुए कहा था कि ‘‘सावधान हो जाएं वर्ना वह दिन दूर नहीं जब देश के दंगाई और गद्दार घर में घुस कर मारेंगे।’’

भाजपा ही क्यों, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं हैं :
नागरिकता कानून को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने 3 फरवरी को भाजपा नेताओं को नकली हिन्दू बताया और कहा कि ‘‘वे बंदूक की गोलियों के दम पर लोगों की जुबान बंदी की कोशिश कर रहे हैं।’’

अधीर रंजन चौधरी ने अगले ही दिन 4 फरवरी को कहा कि ‘‘केंद्र में गोडसे की सरकार है इसलिए हम इससे और क्या उम्मीद कर सकते हैं।’’ अधीर रंजन ने यह बात 3 फरवरी को भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा द्वारा लोकसभा में राजीव गांधी को ‘राजीव फिरोज खान’ कहने के जवाब में कही।

4 फरवरी को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को दु:शासनों की पार्टी और मोहम्मद बिन तुगलक की वंशज करार दिया। (उल्लेखनीय है कि महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण करने वाला दु:शासन दुर्योधन का भाई था जबकि मोहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) दिल्ली का सुल्तान था जो इतिहास में एक सिरफिरे शासक के रूप में उलटे-सीधे फैसलों के लिए बदनाम है।)  

अनंत हेगड़े (भाजपा) द्वारा महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम को ‘नाटक’ करार देने के जवाब में अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘‘आज ये महात्मा गांधी को गाली देते हैं। ये रावण की औलाद हैं।’’ यहीं पर बस नहीं, 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने कहा, ‘‘यह जो नरेंद्र मोदी भाषण दे रहा है, 6 महीने बाद घर से बाहर नहीं निकल पाएगा। हिन्दोस्तान के युवा इसको ऐसा डंडा मारेंगे, इसको समझा देंगे कि हिन्दोस्तान के युवा को रोजगार दिए बिना यह देश आगे नहीं बढ़ सकता।’’

राहुल गांधी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के बारे में कहा, ‘‘वह केवल लोगों को बांट रहे हैं। इनके भाषण में सब झूठ ही मिलेगा।’’ 5 फरवरी को ही अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया जिससे सदन में बवाल मच गया और उस शब्द को सदन की कार्रवाई से निकालना पड़ा। पहले भी विवादास्पद बयान देते रहने वाले अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को घुसपैठिया कह कर विवाद खड़ा कर दिया था। 

5 फरवरी को ही ममता बनर्जी ने भाजपा को ‘फैंकुओं’ की पार्टी बताया और कहा कि ‘‘यह पार्टी धर्म के आधार पर देश को बांट कर लोगों को बंदूकों और गोलियों से धमकाती है और केवल बोगस न्यूज देने में विश्वास रखती है। मेरा जन्म भारत में हुआ है, बंदूकों और गोलियों से लोगों पर हमला करवाने वाली भाजपा के शासन वाले देश में नहीं।’’
उक्त उदाहरणों से स्पष्टï है कि कटु वचन बोल कर देश का माहौल बिगाडऩे में कोई किसी से कम नहीं है। जब राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता ही इस तरह की बयानबाजी करेंगे तो फिर नीचे के काडर वाले नेताओं से तो अच्छे आचरण की आशा करना ही व्यर्थ है। निश्चय ही ऐसे बयान देकर राजनीतिज्ञ अपनी और अपने दलों की बदनामी का ही कारण बन रहे हैं।         

—विजय कुमार 

 

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