Sunday, Jan 19, 2020
india becomes the choice of global banking industry

ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री की पसंद बना भारत

  • Updated on 8/12/2019

एक ओर जहां भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में मंदी के मिल रहे संकेतों को लेकर आर्थीक विशेषज्ञ चिंता जताते हुए सरकार से स्थिति को सम्भालने के लिए करों में कमी जैसे जरूरी कदम उठाने का आह्वान कर रहे हैं वहीं एक दिलचस्प रुझान के अंतर्गत दुनिया भर की बैंकिंग इंडस्ट्री (Banking Industries) अपने काम का बड़ा हिस्सा भारत (India) में स्थानांतरित कर रही है। 

यह रुझान इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि आमतौर पर ‘फाइनांशियल सैंटर्स’ ऐसे स्थान पर ही फलते-फूलते हैं जहां माहौल उनके अनुकूल हो- जैसे कि प्राइवेट बैंकों (Private Bank) की भरमार, निवेश के लिए कम्पनियों तथा निवेशकों तक बैंकों की आसान पहुंच, विदेशियों के प्रति खुलापन, संस्थान तथा बिजनैस फ्रैंडली कानून के साथ ही कर्मचारी उच्च स्तर की जीवनशैली  का आनंद ले सकें। 

हालांकि, भारत की बात करें तो यहां कारोबारी माहौल इन मापदंडों से मेल नहीं खाता जहां तरह-तरह के जटिल कानूनों की भरमार है, घरेलू बाजार भी पर्याप्त सक्षम नहीं है, कारोबारियों के लिए पूंजी हासिल करना कठिन और इंटरनैशनल फम्र्स की पहुंच भी सीमित है। इतना ही नहीं, जीवनशैली के स्तर की बात करें तो वहां भी स्थितियां बहुत आकर्षक नहीं हैं।
परंतु वैश्विक बैंकिंग फम्र्स अपने काम के एक बड़े हिस्से के लिए भारत को चुन रही हैं। दरअसल, आज बैंकों के अधिकतर कार्यों में टैक्नोलॉजी का खूब दखल है। बैंकों को अपने एप्स से लेकर अन्य डिजीटल सुविधाओं के लिए आई.टी. तथा कम्प्यूटिंग तकनीकों पर निर्भर होना पड़ता है। ऐसे में अब वे ‘स्टैटिस्टिक्स’, ‘डाटा मैनेजमैंट’, ‘क्लाऊड बेस्ड ऑप्रेशन्स’ के लिए भारतीय माहिरों की सेवाएं लेने के लिए यहां का रुख कर रहे हैं। 

प्रॉपर्टी उपलब्ध करवाने वाली कम्पनी ब्लैकस्टोन के अनुसार  2014 से अंतर्राष्ट्रीय फम्र्स को लीज पर दी उसकी प्रॉपर्टी में चार गुणा वृद्धि हुई है। 

बहुराष्ट्रीय इन्वैंस्टमैंट बैंक तथा फाइनांशियल सॢवसेज कम्पनी ‘गोल्डमैन साक्स’ का बेंगलूर में नया कैम्पस 250 मिलियन डॉलर की लागत से तैयार हुआ है। भीतर कदम रखते ही महसूस होता है कि आप उनके न्यूयॉर्क स्थित आलीशान हैडक्वार्टर में पहुंच गए हो। बेंगलूर में इसके कर्मचारियों की संख्या 2004 में 291 थी जो अब बढ़ कर 5000 हो चुकी है। 
यू.बी.एस. ने गत कुछ वर्षों में देश में तीन नए सैंटर खोले हैं। इनमें से नवीनतम पुणे की एक बिल्डिंग में है जिसमें क्रैडिट सूस्सी, एलियांज तथा नार्दर्न ट्रस्ट के दफ्तर भी मौजूद हैं। करीब मौजूद अन्य इमारतों में बार्कलेज तथा सिटी बैंक के दफ्तर हैं।

आई.टी. (I.T) माहिरों के मामले में भारत की विश्व भर में पहचान रही है परंतु दुनिया (World) भर के बैंकर इस बात से हैरान हैं कि स्थानीय चुनौतियों के बावजूद भारत एक ऐसी बुद्धिजीवी शक्ति बनने में सफल रहा है कि उसका लाभ लेने के लिए बड़ी से बड़ी बैंकिंग फम्र्स भारत का रुख कर रही हैं जिससे आने वाले दो-तीन वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।


 

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