Friday, Apr 23, 2021
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india is overshadowing china in vaccine diplomacy aljwnt

'वैक्सीन डिप्लोमैसी’ में चीन पर भारी पड़ रहा है भारत

  • Updated on 1/27/2021

भारतीय धर्मग्रंथों में ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ अर्थात सृष्टि के आरोग्य रहने और भले की बात कही गई है। इसी शिक्षा पर चलते हुए भारत ने ‘कोरोना महामारी’ (Coronavirus) के मुकाबले के लिए निर्मित अपने वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ यानी एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड तथा भारत बॉयोटैक की ‘कोवैक्सीन’ उन सब पड़ोसी देशों को उपलब्ध करवाने का फैसला किया जो देश वैक्सीनेशन की रिसर्च के कार्य और निर्माण खुद सक्षम नहीं थे। 

इसी दिशा में चलते हुए भारत ने 21 जनवरी को पड़ोसी देश बंगलादेश को वैक्सीन की 20 लाख  खुराकें उपहार स्वरूप दी हैं। इसके बाद बंगलादेश ने चीन की वैक्सीन को छोड़कर भारत को 30 लाख खुराकों का नया ऑर्डर दिया है। 
दिसम्बर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के मध्य वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग के माध्यम से इस विषय में चर्चा हुई थी और दोनों पक्ष वैक्सीन के तीसरे चारण के परीक्षण के अलावा इसके निर्माण और आपूर्ति में परस्पर सहयोग पर सहमत हुए थे। 

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चीन भी बंगलादेश के साथ अपनी बनाई गई वैक्सीन ‘सिनोवैक’ की आपूर्ति के लिए बातचीत कर रहा था लेकिन जब चीन ने बंगलादेश से इस दवाई के परीक्षण पर हुए खर्च में हिस्सेदारी की बात कही और पैसे मांगे तो बंगलादेश का रुख भारत की ओर हो गया। 

इस बीच भारत के पड़ोसी नेपाल और श्रीलंका भी वैक्सीन के लिए भारत तक पहुंच कर रहे हैं और बारबाडोस भी भारत से ही वैक्सीन पाने की उम्मीद में है। 

ब्राजील और कंबोडिया जैसे देशों ने भी कोरोना वैक्सीन के लिए चीन की बजाय भारत को तवज्जो दी है। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन-सेन ने भी कंबोडिया स्थित भारतीय राजदूत देवयानी खोबरगड़े के साथ भेंट के दौरान भारत से वैक्सीन के क्षेत्र में सहयोग का अनुरोध किया है और कंबोडिया ने भारत में निर्मित दोनों दवाओं की खरीद में रुचि दिखाई है।

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चीन ने कंबोडिया को खरबों डॉलर का कर्ज दे रखा है और वह अब तक कंबोडिया का प्रमुख सहयोगी रहा है। चीन ने कंबोडिया के नागरिकों के लिए पांच लाख खुराकें उपहार स्वरूप दी भी हैं परंतु कंबोडिया को अपने लगभग पौने दो करोड़ की आबादी के लिए और दवा की जरूरत है। 

दुनिया के कई देशों को चीन में बनी वैक्सीन पर भरोसा नहीं है, जबकि भारत दुनिया में सबसे अधिक वैक्सीन का निर्माता है, इसलिए विश्व के कई देश इसके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। 

भारत अब तक कोरोना वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ की 55 लाख खुराकें निकाल चुका है। इनमें से 20 लाख खुराकें ब्राजील को भेजी गई हैं। ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसनारो ने 8 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करके वैक्सीन की 20 लाख खुराकों की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया था। ब्राजील अपने 21 करोड़ लोगों की वैक्सीनेशन करने की योजना बना रहा है तथा वह भारत से और ज्यादा वैक्सीन खरीदेगा। 

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अपने 30 लाख नागरिकों की वैक्सीनेशन की तैयारी कर चुके इंडोनेशिया ने भी वैक्सीनेशन के लिए भारत के साथ करार करने की योजना बनाई है। इंडोनेशिया की ‘इंडोफार्मा’ कंपनी भारत के ‘सीरम इंस्टीच्यूट’ के साथ इस सिलसिले में बातचीत कर रही है। 

ब्राजील में चीन की दवा ‘कोरोनावैक’ के ट्रायल के दौरान इस दवा की सफलता की दर 50 प्रतिशत रही है जो ‘एस्ट्राजेनेका’, ‘मॉडर्ना, और फाइजर की दवा के मुकाबले में काफी कम है। इंडोनेशिया में भी ‘कोरोनावैक’ की सफलता की दर 65.3 प्रतिशत रही है। 

एक ओर जहां सिक्किम की सीमा पर चीन और भारत के सैनिकों के भिडऩे की खबरें आ रही हैं और सीमा पर तनाव बना हुआ है, ऐसे में भारत वैक्सीन डिप्लोमेसी के जरिए अपने पड़ोसी देशों और दक्षिण एशिया के देशों को अपने साथ जोडऩे में सफल हो रहा है। दवा उद्योग के क्षेत्र में भारत की साख का देश को लाभ पहुंचा है।

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यूरोपीय संघ ने अभी तक आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के उपयोग को अधिकृत नहीं किया है। इसके दवा नियामक को इस सप्ताह इस पर एक महत्वपूर्ण राय देने की उम्मीद है लेकिन इसका एस्ट्राजेनेका के साथ 400 मिलियन वैक्सीन प्रदान करने का अनुबंध है।

इस वर्ष की पहली तिमाही में लगभग 80 मिलियन लोगों को वैक्सीन लगाने का विचार था लेकिन एस्ट्राजेनेका ने शुक्रवार को अधिकारियों को बताया कि वास्तविक मात्रा 60 प्रतिशत कम होगी, जिसका अर्थ है कि केवल 31 मिलियन खुराक मिल पाएगी। ऐसे में सीरम इंटस्टीच्यूट ऑफ इंडिया (एस.आई.आई.) ने एस्ट्राजेनेका और नोवावैक्स टीकों के लिए एक ही प्रति खुराक मूल्य कैप की घोषणा की, जो बिल और मेङ्क्षलडा गेट्स फाऊंडेशन और गावी द्वारा अब यूरोप में भी भेजा जा सकता है। 

हालांकि बुधवार को यह सामने आया कि दक्षिण अफ्रीका भी सीरम इंडिया से 1.5 मिलियन एस्ट्राजेनेका शॉट्स खरीदेगा। 
भारत निर्मित दवा की विश्वनीयता पर आज दुनिया भरोसा कर रही है और दवा आपूर्ति के मामले में भारत को अन्य देशों के मुकाबले एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह निश्चित रूप से भारत की दवा कूटनीतिक जीत ही है।

- विजय कुमार

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