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कोझिकोड विमान दुर्घटना से हवाई अड्डों की दयनीय दशा उजागर

  • Updated on 8/11/2020

7 अगस्त को केरल के कोझिकोड में ‘एयर इंडिया एक्सप्रैस’ के विमान के उतरते समय रन-वे से फिसल कर आगे निकल कर खाई में जा गिरने से 18 लोगों की मौत के बाद जानकारों ने कहा है कि देश में अनेक हवाई अड्डों की एयर स्ट्रिप्स दुर्घटनाओं के जोखिम पर हैं तथा सरकार और विमानन अधिकारियों ने पिछली विमान दुर्घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा। तय मानकों के अनुसार देश में 6 टेबल टॉप हवाई अड्डों मंगलौर, करिपुर, लेंगपुई, पैकेयांग, कुल्लू और शिमला सहित 12 हवाई अड्डों के रन-वे खतरनाक श्रेणी में हैं। 

शिमला का ‘जुब्बरहट्टी हवाई अड्डा’ सुरक्षा के लिए तय मानकों से 300 मीटर छोटा है और देश के सर्वाधिक जोखिम भरे टेबल टॉप हवाई अड्डों में से एक है। जम्मू और पटना हवाई अड्डों के रन-वे भी अत्यधिक जोखिम पर हैं। पटना हवाई अड्डों के एक ओर रेलवे लाइन और दूसरी ओर हाईवे है। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन मोहन रंगनाथन का कहना है कि  ‘‘राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार ऑडिट न किए जाने के चलते हमारे देश के अनेक हवाई अड्डों तो केवल कागजों में ही सुरक्षित हैं।’’ 

श्री रंगनाथन का कहना है कि उन्होंने 2011 में अधिकारियों को चेताया था कि ‘‘विशेष रूप से वर्षा के दौरान लैंङ्क्षडग के लिए कोझिकोड हवाई अड्डों का रन-वे असुरक्षित होने के कारण इसे सुधारने की आवश्यकता है।’’ श्री रंगनाथन के अनुसार, ‘‘हवाई अड्डों की सुरक्षा से जुड़े लोगों को इसके लिए जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। सुरक्षा नियमों का पालन न करने की स्थिति में इन्हें बंद कर देना चाहिए या निर्धारित मापदंडों के पूरा होने तक यहां विमानों की उड़ानें निलंबित कर दी जानी चाहिएं।’’ 

एक अन्य विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ यशवंत शेनाय ने इसके लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डी.जी.सी.ए.) को दोषी ठहराते हुए कहा है कि: ‘‘यही नियमों का सबसे बड़ा उल्लंघनकत्र्ता है। इसका नेतृत्व एक आई.एस. अधिकारी कर रहा है जिसे विमानन की कोई जानकारी नहीं है। विश्व के किसी भी देश में प्रशासकों को विमानन अधिकारी नियुक्त नहीं किया जाता।’’ 

डी.जी.सी.ए. के एक पूर्व अधिकारी का भी कहना है कि ‘‘हवाई अड्डों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विमानन संगठन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किए जाने की आवश्यकता है।’’बेशक ‘एयर इंडिया एक्सप्रैस’ ने 26 अगस्त, 2016 को कोझिकोड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों को सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों और हवाई पट्टी की सूची में शामिल किया था और कहा था कि यह देश के टेबल टॉप रन-वे वाले हवाई अड्डों में से एक है परंतु अब इसके रख-रखाव पर सवाल उठने लगे हैं। 

गत वर्ष 2 जुलाई को इस हवाई अड्डों पर उतरते समय ‘एयर इंडिया एक्सप्रैस’ के विमान का पिछला हिस्सा हवाई पट्टी से टकराने के बाद डी.जी.सी.ए. ने  हवाई अड्डा निदेशक को हवाई अड्डों के कई स्थानों पर सुरक्षा संबंधी बड़ी त्रुटियां मिलने के बाद कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। विमानन विशेषज्ञों ने ऐसी दुर्घटनाएं रोकने के लिए विदेशों में प्रचलित  ‘ई मास’ तकनीक अपनाने की सलाह दी है जिसके अंतर्गत सेफ्टी एरिया में विमान को रन-वे से फिसलने पर जमीन में धंसते हुए रोकने के लिए ‘फोम कंक्रीट’ लगाई जाती है। 

कुछ वर्ष पूर्व विदेश से अध्ययन करके लौटी विमानन विशेषज्ञों की टीम ने डी.जी.सी.ए. को यह तकनीक अपनाने का सुझाव दिया था परंतु इस पर अमल नहीं हो पाया।कोझिकोड की दुर्घटना ने एक बार फिर देश के अनेक हवाई अड्डों में व्याप्त त्रुटियों और उनसे उत्पन्न सुरक्षा संबंधी खतरों की ओर ध्यान दिलाया है। इससे पहले कि एक और विमान दुर्घटना का इंतजार किया जाए, हवाई अड्डों के निर्माण में विद्यमान त्रुटियां तुरन्त दूर करने और जब तक त्रुटिपूर्ण हवाई पट्टियों में सुधार नहीं कर दिया जाता तब तक ऐेसे हवाई अड्डों से उड़ानों पर रोक लगा देना ही सुरक्षा की दृष्टि से उचित होगा।

—विजय कुमार

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