Tuesday, Mar 09, 2021
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भगवान राम के प्रति नेपाली प्रधानमंत्री ओली का मूर्खतापूर्ण बयान

  • Updated on 7/16/2020

विश्व के एकमात्र हिन्दू देश और निकटतम पड़ोसी नेपाल के साथ हमारे सदियों से गहरे संबंध हैं। दोनों ही देशों के लोगों में रोटी-बेटी का रिश्ता है। प्राचीनकाल से ही नेपाल पर भारतीय साम्राज्यों का प्रभाव रहा है और इसकी बागडोर गुप्तवंश, लिच्छवी, सूर्यवंशी, सोमवंशी और किरातवंशी आदि राजाओं के हाथ में रही है। 

यही नहीं 11वीं शताब्दी के दूसरे हिस्से में दक्षिण भारत से आए चालुक्य साम्राज्य के प्रभाव के अधीन तत्कालीन नेपाली राजाओं ने बौद्ध धर्म को छोड़ कर हिन्दू धर्म का समर्थन किया।

कुछ वर्ष पहले तक भारत और नेपाल के बीच सब ठीक चल रहा था परंतु जब से नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई है और के.पी. शर्मा ओली प्रधानमंत्री बने हैं, उन्होंने चीनी नेताओं के उकसावे में आकर भारत विरोधी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

कहा जाता है कि चीन ने जेनेवा में उनके बैंक अकाऊंट में भारी-भरकम रकम भी जमा करवाई है। चीन के उकसावे पर ही ओली ने भारत के 3 इलाकों ‘लिपुलेख’, ‘कालापानी’ व ‘ङ्क्षलपियाधुरा’ पर अपना दावा जताने के अलावा भी अनेक भारत विरोधी पग उठाए हैं जिसके चलते नेपाल की आम जनता और विपक्षी दल ही नहीं बल्कि उनकी अपनी कम्युनिस्ट पार्टी में भी उनके विरुद्ध बगावत हो गई है और उनसे त्यागपत्र मांगा जा रहा है।

इस समय जबकि उनकी अपनी ‘नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी’ टूट की कगार पर पहुंच गई है, ओली ने यह मूर्खतापूर्ण दावा किया है कि ‘‘वास्तव  में भगवान राम नेपाल के राजकुमार थे तथा अयोध्या वास्तव में दक्षिण नेपाल के बीरगंज जिले के पश्चिम में स्थित एक गांव है।’’ 

उन्होंने यह भी दावा किया कि वाल्मीकि आश्रम नेपाल में है और कहा कि ‘‘भारत में अयोध्या को लेकर भारी विवाद है परन्तु नेपाल में नहीं है।’’

अपने इस बयान को लेकर ओली अपने ही देश में घिर गए हैं। लोग न सिर्फ उनका मजाक उड़ा रहे हैं बल्कि इसे मूर्खतापूर्ण भी बता रहे हैं।

* नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने कहा है कि ‘‘किसी भी प्रधानमंत्री के लिए ऐसा आधारहीन और अप्रमाणित बयान देना उचित नहीं। लगता है कि ओली भारत तथा नेपाल के रिश्ते बिगाडऩा चाहते हैं।’’ 

* नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे के अनुसार, ‘‘इस तरह की बयानबाजी से आप केवल शॄमदगी महसूस करवा सकते हैं। यदि असली अयोध्या बीरगंज के पास है तो फिर सरयू नदी कहां है?’’ भारत में भी ओली के विरुद्ध 14 जुलाई को दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास के बाहर नेपाली मूल के लोगों ने प्रदर्शन किया और कहा, ‘‘भारत हमेशा चीन का मित्र रहा है जबकि चीन हमेशा दुश्मनी निभाता रहा है। नेपाल के हर सुख-दुख में भारत सरकार हमेशा खड़ी रही है। इसे नेपाल के राजनेता भले ही भूल गए हों लेकिन वहां की जनता इस बात को अच्छे तरीके से जानती है।’’

* राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास के अनुसार, ‘‘चीन के दबाव में ओली ने ऐसा बयान दिया है।’’

* हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास का भी यही कहना है कि ‘‘चीन के साए में चल रहे ओली की बुद्धि भ्रष्टï हो गई है। इसलिए वह अनाप-शनाप बोल रहे हैं।’’

* श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के अनुसार, ‘‘अयोध्या और नेपाल का संबंध तोडऩे का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

* उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, ‘‘ओली को मालूम होना चाहिए कि किसी समय नेपाल भी भारत का हिस्सा रहा है।’’

* शिव सेना के मुख पत्र सामना के अनुसार, ‘‘भगवान राम पूरी दुनिया के हैं परंतु अयोध्या जहां उनका जन्म हुआ था, केवल भारत की है। चीनी ड्रैगन से नजदीकी के कारण वह भारत और नेपाल के बीच धार्मिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को भी भूल गए हैं।’’

कुल मिलाकर नेपाल के प्रधानमंत्री ने ऐसा मूर्खतापूर्ण बयान देकर जहां अपनी हंसी उड़वाई है तथा अपने देश की समस्याओं की ओर से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की है वहीं भारत और नेपाल के रिश्तों में कड़वाहट को बढ़ाने का प्रयत्न किया है।

—विजय कुमार

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