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महबूबा के विरुद्ध पी.डी.पी. में विद्रोह राष्ट्र विरोधी आचरण का नतीजा

  • Updated on 10/28/2020

1947 में भारत के स्वतंत्र होने के बाद राजा हरि सिंह नहीं चाहते थे कि कश्मीर का भारत में विलय हो परन्तु जब 20 अक्तूबर, 1947 को कबायलियों के वेश में पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर में घुस कर लूटपाट और मारकाट शुरू कर दी तो उनके अनुरोध पर स. पटेल की भेजी हुई सेना ने पाक सैनिकों को खदेड़ दिया और हरि सिंह ने 26 अक्तूबर, 1947 को विलय समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। 

उस समय वहां पाकिस्तान से आए हुए विस्थापित न ही यहां जमीन खरीद सकते थे और न ही विवाह कर सकते थे। प्रजा परिषद के नेता पं. प्रेमनाथ डोगरा ने उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए काफी काम किया तथा पूज्य पिता लाला जगत नारायण जी ने भी इसमें उनका साथ दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पं. जवाहर लाल नेहरू ने राजा हरि सिंह के कहने पर जम्मू-कश्मीर में शेख अब्दुल्ला को प्रधानमंत्री बनाया पर 1953 में उन्हें बर्खास्त करके गिरफ्तार कर लिया गया जिसके बाद बख्शी गुलाम मोहम्मद प्रधानमंत्री बने। 11 वर्ष बाद 1964 में शेख अब्दुल्ला के विरुद्ध प्रदेश सरकार द्वारा सभी आरोप वापस ले लेने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।  

जम्मू-कश्मीर पर सर्वाधिक समय तक अब्दुल्ला परिवार और उनकी पार्टी नैशनल कांफ्रैंस का ही शासन रहा तथा शेख अब्दुल्ला के बाद उनके पुत्र फारूक अब्दुल्ला और पोते उमर अब्दुल्ला प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जहां वाजपेयी सरकार में उमर अब्दुल्ला विदेश राज्यमंत्री रहे, वहीं मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार में वह अक्षय ऊर्जा मंत्री रहे। उस दौरान फारूक अब्दुल्ला की राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति बनने की चर्चा भी रही।डा. फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने अपनी आत्मकथा ‘आतिशे चिनार’ में स्वीकार किया है कि कश्मीरी मुसलमानों के पूर्वज हिन्दू थे और स्वयं डा.फारूक अब्दुल्ला भी कश्मीर के बाहर दिए गए साक्षात्कार और भाषणों में अपने पूर्वजों के हिन्दू होने का उल्लेख कर चुके हैं।

कुछ समय तक जम्मू-कश्मीर में सब ठीक-ठाक चल रहा था परन्तु यहां के हालात 90 के दशक में खराब होने शुरू हुए जब महबूबा मुफ्ती की छोटी बहन रूबिया सईद का 7 दिसम्बर, 1989 को  जे.के.एल.एफ. ने उस समय अपहरण कर लिया था जब इनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की संयुक्त मोर्चा सरकार में गृह मंत्री थे।
‘रूबिया’ को आतंकवादियों से छुड़वाने के लिए केंद्रीय सरकार ने 5 खूंखार आतंकवादियों को रिहा करने की मांग स्वीकार कर ली थी। 

महबूबा हमेशा अपने पिता के साथ मिल कर राजनीति में सक्रिय रहीं और दोनों ने 1999 में मिल कर ‘पीपुल्स डैमोक्रेटिक पार्टी’ (पी.डी.पी.) बनाई जिसकी अब वह अध्यक्ष हैं परन्तु पार्टी पर इनका नियंत्रण ढीला होता गया।19 जून, 2018 को जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में पी.डी.पी. के अंदर महबूबा की कार्यशैली को लेकर असंतोष पनपने लगा तथा पी.डी.पी. की बदहाली के लिए इनकी नीतियों को जिम्मेदार करार देते हुए अनेक वरिष्ठï पी.डी.पी. नेताओं ने महबूबा के विरुद्ध विद्रोह करके पार्टी को अलविदा कह दिया। 

इस दौरान 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी आपत्तिजनक प्रावधानों और अनुच्छेद 35 (ए) को समाप्त करने की घोषणा से एक दिन पहले 4 अगस्त, 2019 को फारूक और उमर अब्दुल्ला व महबूबा आदि को गिरफ्तार कर लिया गया।इस वर्ष 13 अक्तूबर को रिहाई के फौरन बाद महबूबा ने अनुच्छेद 370 की बहाली तथा जम्मू-कश्मीर की  5 अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति की बहाली हेतु संघर्ष करने के लिए फारूक व अन्यों के साथ मिलकर  ‘पीपुल्स अलायंस फार गुपकार डैक्लेरेशन’ का गठन कर दिया। 
23 अक्तूबर को महबूबा ने प्रदेश में अनुच्छेद 370 दोबारा लागू होने तक भारत का तिरंगा न उठाने और अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने से पहले तक का जम्मू-कश्मीर का दर्जा बहाल करने हेतु हम जमीन-आसमान एक कर देंगे कह कर धमाका कर दिया।

इस पर जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन शुरू हो गए तथा महबूबा के पुतले जलाने के अलावा 26 अक्तूबर को भाजपा कार्यकत्र्ताओं ने जम्मू में ही पी.डी.पी. के कार्यालय पर तिरंगा फहरा कर अपना विरोध जताया और श्रीनगर के लाल चौक पर भी तिरंगा फहराया। महबूबा के बयान से नाराज पी.डी.पी. के तीन सदस्यों टी.एस. बाजवा, वेद महाजन और हुसैन-ए-वफा ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया क्योंकि महबूबा अपने कामों और बयानों से देशभक्ति की भावनाओं को आहत कर रही हैं।
जहां महबूबा भारत विरोधी आचरण से आलोचना की पात्र बनी हैं, देश के दूसरे भागों में राजनीतिज्ञों ने अपने कार्यों से ऐसी मिसालें पैदा की हैं। लालू यादव ने रेल मंत्री होते हुए रेल सेवाओं का विस्तार किया और पहली बार रेलवे ने 2007-08 में 25000 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। लालू ने स्वयं को एक सफल मैनेजमैंट गुरु सिद्ध किया तथा ‘हार्वर्ड विश्वविद्यालय’ ने उनका वहां लैक्चर करवाया।

उल्लेखनीय है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री स. मनमोहन सिंह ने 7 अप्रैल, 2005 को भारत में श्रीनगर से पी.ओ.के. में मुजफ्फराबाद के लिए बस सेवा शुरू की तो पी.ओ.के. से इस ओर आने वाले लोगों को यहां खुशहाली देखकर पता चला कि पाकिस्तान सरकार कुछ भी न कर उनका शोषण कर रही है और इसका परिणाम अब पाकिस्तान के शासकों के विरुद्ध लगातार प्रदर्शनों में निकल रहा है।  

यह घटनाक्रम महबूबा मुफ्ती और अन्य पाक समर्थक तत्वों के लिए भी एक सबक और संदेश है कि धारा 370 तो अब बहाल होने वाली नहीं और न ही जम्मू तथा लद्दाख के लोग आप लोगों के साथ रहना चाहते हैं। 
लिहाजा ये वास्तविकता को स्वीकार कर अपना देश विरोधी रवैया छोड़ें और राष्टï्र की मुख्यधारा में शामिल हों वरना आपका हाल भी बिहार जैसा होने वाला है जो 15 वर्ष सत्तारूढ़ रहने के बाद अब अपने आपको सत्ता से वंचित होता देख रहे हैं।         

 —विजय कुमार

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