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punjab kesari group enters his 56th anniversary djsgnt

‘पंजाब केसरी’ का 56वें वर्ष में प्रवेश ‘पाठकों का हार्दिक धन्यवाद’

  • Updated on 6/13/2020

पूज्य पिता लाला जगत नारायण जी ने ‘हिंद समाचार’ के नाम से 4 मई, 1948 को 3000 प्रतियों के साथ अपने उर्दू दैनिक का प्रकाशन शुरू किया तथा यह अन्य समकालीन उर्दू दैनिकों ‘मिलाप’, ‘प्रताप’, ‘वीरभारत’ और ‘प्रभात’ का मुकाबला करते हुए सफलता की सीढियां चढ़ता चला गया। 

1965 तक पहुंचते-पहुंचते इसकी प्रसार संख्या 60-70 हजार तक पहुंच गई और फिर 13 मई, 1984 को यह 1 लाख 1 हजार 475 प्रतियों का आंकड़ा छू कर देश का सर्वाधिक प्रसारित उर्दू दैनिक बन गया। 

लाला जी ने 13 जून,1965 को 6000 प्रतियों के साथ हिन्दी दैनिक ‘पंजाब केसरी’ आरंभ किया। तब इसके पृष्ठï 8-10 होते थे तथा मूल्य केवल 15 पैसे था। अभी इसे आरंभ हुए कुछ ही समय बीता था कि पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ गया। उन दिनों पूज्य पिता जी राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने सीमा का दौरा करके जवानों का हौसला बढ़ाने की उनकी ड्यूटी लगा दी। उस समय मैं पिता जी के साथ युद्ध क्षेत्र में जाकर और वहां जवानों और अधिकारियों से मिलने के बाद उनके फोटो खींचकर लाता था जो हमारे दोनों समाचार पत्रों में प्रकाशित होते थे।

‘हिंद समाचार’ और ‘पंजाब केसरी’ की निष्पक्षता तथा किसी भी राजनीतिक विचारधारा से न जुडऩे के संकल्प के कारण हमें उस दौर की लगभग सभी सरकारों की गलत नीतियों की आलोचना करने पर उनका कोपभाजन भी बनना पड़ा। 
1974 में जब पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह ने हमारी आवाज दबाने के लिए पहले ‘ङ्क्षहद समाचार’ और ‘पंजाब केसरी’ के विज्ञापन बंद किए और फिर बिजली काट दी तो मुझे एक युक्ति सूझी और हमने अखबार ट्रैक्टर की सहायता से छाप कर पाठकों तक पहुंचाए। 

इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में शेख अब्दुल्ला और हरियाणा में बंसी लाल की सरकारों ने भी हम पर प्रतिबंध लगाए परन्तु सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर उन्हें कुछ समय में ही इन्हें हटाना पड़ा। 26 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक भारत में लागू आपातकाल के दौरान पूज्य लाला जी को गिरफ्तार कर लिया गया। आपातकाल में सबसे पहले उन्हीं की गिरफ्तारी की गई थी और प्रैस की स्वतंत्रता से कोई समझौता न करते हुए वह पूरे 21 महीनों तक जालंधर, फिरोजपुर, नाभा तथा पटियाला की जेलों में बंद रहे। 

बहरहाल, अपनी इस संघर्ष यात्रा के दौरान ‘ङ्क्षहद समाचार’ ग्रुप ने आतंकवाद के विरुद्ध भारी संघर्ष किया और अपने दो मुख्य संपादकों पूज्य पिता लाला जगत नारायण और श्री रमेश चंद्र के अलावा 2 समाचार सम्पादक और उप-संपादक, 60 अन्य संवाददाता, छायाकार, ड्राइवर, एजैंट और हॉकर खोए। 

‘ङ्क्षहद समाचार’ और ‘पंजाब केसरी’ रूपी नन्हे पौधों को अपने स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन से सींच कर पत्रकारिता जगत के वट वृक्ष बनाने वाले पूज्य पिता लाला जगत नारायण जी आज हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनके मिशन को मेरे कंधे से कंधा मिलाकर लाला जी के दोनों पोतों प्रिय अविनाश और अमित चोपड़ा के अलावा अब तीन पड़पोते और 1 पड़पोती आगे बढ़ा रहे हैं।

आज आई.आर.एस. 2019 के अनुसार भारत में पंजाब केसरी के 1.17 करोड़ से अधिक पाठक हैं तथा यह 9 केंद्रों जालंधर, चंडीगढ़, लुधियाना, बङ्क्षठडा, पानीपत, हिसार, शिमला, पालमपुर और जम्मू से प्रकाशित हो रहा है।
इसी प्रकार सहयोगी पंजाबी दैनिक ‘जग बाणी’ के आई.आर.एस. 2019 के अनुसार 39.77 लाख पाठक हैं और यह 4 केंद्रों जालंधर, लुधियाना, चंडीगढ़ तथा बङ्क्षठडा से प्रकाशित हो रहा है।

इस बीच दिल्ली से हिन्दी दैनिक ‘नवोदय टाइम्स’ का प्रकाशन भी आरंभ किया गया है जिसकी प्रसार संख्या ए.बी.सी. (औसत जुलाई-दिसम्बर, 2018) के अनुसार 1,46,264 प्रतियां हैं और इसके लगभग 10 लाख पाठक हैं।
यही नहीं इसी अवधि के दौरान पंजाब केसरी परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्यों ने पंजाब केसरी टी.वी. और जग बाणी टी.वी. भी शुरू कर दिया है।

इस सबके अलावा पंजाब केसरी परिवार समाज सेवा की विभिन्न गतिविधियों से भी लगातार जुड़ा रहा है जिसके अंतर्गत :
ऌपूज्य लाला जी द्वारा शुरू किए गए विभिन्न राहत कोषों में 67 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि प्रधानमंत्री राहत कोष एवं मुख्यमंत्रियों के राहत कोषों आदि में दी गई हैै।

पाठकों के सहयोग से आतंकवाद पीड़ित परिवारों के लिए चलाए जा रहे ‘शहीद परिवार फंड’ के अंतर्गत अभी तक 15.23 करोड़ रुपए की सहायता 10029 जरूरतमंद परिवारों को बांटी जा चुकी है जबकि शेष राशि जल्दी ही अन्य जरूरतमंद परिवारों में बांटी जाएगी। जम्मू-कश्मीर के सीमांत इलाकों तथा अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए पाठकों सहयोग से राहत सामग्री के 570 ट्रक अब तक बांटे जा चुके हैं।

बेशक कोरोना प्रकोप से ‘पंजाब केसरी ग्रुप’ भी अप्रभावित नहीं रहा तथा इसके कुछ कर्मचारियों में इसके लक्षण दिखाई दिए जो अब पूर्णत: स्वस्थ हैं पर स्टाफ की सुरक्षा को देखते हुए हमें 20 अप्रैल से 5 मई तक अपना जालंधर स्थित कार्यालय पूरी तरह बंद कर देना पड़ा परंतु प्रिय अविनाश व अमित एवं उनके पुत्रों के प्रयास और प्रेरणा से हमारे कर्मचारियों ने घरों से काम करके निॢवघ्न अखबार तैयार करना जारी रखा और पाठकों तक पहुंचाया।
इस दौरान हमारी प्रसार संख्या में कुछ कमी आई परंतु आशा है कि हम आप सबके सहयोग, संरक्षण से यह कमी जल्दी पूरी कर लेंगे।

हमारी इन उपलब्धियों के लिए श्रेय के वास्तविक पात्र तो आप ही हैं। अत: आज जबकि आपका प्रिय ‘पंजाब केसरी’ 56वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, इस शुभ अवसर पर हम अपने पाठकों, शुभङ्क्षचतकों, सहयोगियों और संरक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए आशा करते हैं कि आपका स्नेह हमें इसी प्रकार मिलता रहेगा और हम पहले की तरह आपकी सेवा करते रहेंगे।

- विजय कुमार

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