Wednesday, Dec 01, 2021
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दुनिया पर दिखने लगा अमरीकी चुनावों का असर

  • Updated on 11/30/2020

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने वीरवार को कहा कि अगर इलैक्टोरल कालेज 14 दिसम्बर को बाइडेन (Joe Biden) के लिए वोट करेगा तो वह व्हाइट हाऊस छोड़ देंगे। शायद यह पहला संकेत है कि राष्ट्रपति ट्रम्प अब अपनी हार को स्वीकार करने लगे हैं। किंतु अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इतनी देर नहीं लगती किसी बड़े बदलाव को स्वीकार करने में और उसके साथ नए कदम उठाने में। मध्य पूर्व के राजनीतिक जगत में कुछ ऐसा ही हो रहा है।

दो घटनाएं इसका संकेत देती हैं। पहला तो शुक्रवार को, उच्च श्रेणी के ईरानी परमाणु भौतिक वैज्ञानिक मोहसिन फख्रीजाद की हत्या, पूर्वी तेहरान के एक उपनगर आबसर्द में होना और दूसरा सऊदी अरब के क्राऊन पिं्रस, इसराईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के बीच सऊदी अरब के शहर नोम में रविवार की आश्चर्यजनक बैठक के बाद का मुद्दा।

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बैठक का होना सभी दलों ने अस्वीकार कर दिया लेकिन मीडिया द्वारा एक दिन बाद ही इसका खुलासा कर दिया गया। माना जा रहा है कि इसके पीछे दो संभावित मकसद हो सकते हैं।

पहला, ईरान और नए बाइडेन प्रशासन के बीच संबंधों में संभावित सुधार को खतरे में डालना और दूसरा, ईरान को जवाबी कार्रवाई में संलग्र होने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि एक तरह से युद्ध की सी संभावना बन सके। ईरान के राष्ट्रपति रुहानी का कहना है कि वैश्विक स्थिति बदल रही है और क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। जब श्री रुहानी ईरान के ‘दुश्मनों’ का उल्लेख करते हैं तो वह स्पष्ट रूप से ट्रम्प प्रशासन, इसराईल और सऊदी अरब के बारे में बात कर रहे हैं।

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मध्य पूर्व में राजनीति के बदलते आसार और उसके परिणाम के बारे में इसराईल और सऊदी अरब भी चिंतित हैं। बाइडेन ने अपने चुनाव अभियान के दौरान यह स्पष्ट कर दिया था कि वह ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होना चाहते हैं, जिसके लिए 2015 में बराक ओबामा द्वारा बातचीत की गई थी और जिसे 2018 में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वापस ले लिया गया था।

ईरान द्वारा उत्पादित समृद्ध यूरेनियम की बढ़ी मात्रा के बारे में खबरें आ रही हैं। परमाणु ऊर्जा उत्पादन और सैन्य परमाणु हथियार दोनों के लिए समृद्ध यूरेनियम एक महत्वपूर्ण घटक है। यह एक चिंता का विषय बनता जा रहा है। छह वैश्विक शक्तियों के साथ 2015 के एक समझौते ने ईरान के समृद्ध यूरेनियम के उत्पादन पर बंदिशें लगा दी थीं, लेकिन जब से अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 में इस सौदे को छोड़ दिया, ईरान जानबूझ कर अपने समझौतों पर जोर दे रहा है। हालांकि, यह अपने परमाणु कार्यक्रम को विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जोर देता है।

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इसराईल के लम्बे समय से विरोध के बावजूद जनवरी में अमरीकी राष्ट्रपति बनने पर जो बाइडेन ने ईरान के साथ फिर से जुड़ने का वायदा किया है। इससे पहले अमरीका के सहायता प्राप्त समझौते के तहत इसराईल पहले ही संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के साथ सामान्यीकरण सौदों पर हस्ताक्षर कर चुका है। सूडान पहले ही इसराईल के साथ एक समझौते के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसे अभी तक औपचारिक रूप नहीं दिया गया है।

उन मुद्दों के बीच जो ट्रम्प प्रशासन के अंतिम हफ्तों में इस तरह के सामान्यीकरण समझौते को आगे बढ़ा सकते हैं, सऊदी अरब को हथियार बेचने के लिए एक अमरीकी सौदा हो सकता है। यू.ए.ई. इसराईल सौदे के बाद अमरीका ने यू.ए.ई. को उन्नत एफ-35 लड़ाकू जैट की बिक्री को मंजूरी दी है। सऊदी अरब भी अग्रिम अमरीकी हथियार के लिए एक सौदे में दिलचस्पी रखता है, कुछ ऐसा जो संभवत: ट्रम्प प्रशासन से बाइडेन की तुलना में प्राप्त करने का एक आसान मौका होगा।
सितम्बर में ही सऊदी अरब ने इसराईल की उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को खोलने पर सहमति व्यक्त की थी। यह देश उन अरब देशों की सूची में शीर्ष स्थान पर है जो संभावित रूप से इसराईल के साथ एक सामान्य समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, विशेष रूप से ईरान से बढ़ते खतरे के प्रकाश में। हाल ही में हुई इस बैठक को ही तेहरान के लिए एक मजबूत संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि ईरान के खिलाफ क्षेत्रीय गठबंधन बढ़ रहा है।

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सऊदी अरब के इसराईल के साथ सामान्यीकरण समझौते के मुद्दे पर देर हो सकती है। हालांकि माना जाता है कि सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुल अजीज सऊदी के इसराईल के साथ इस समझौते के विरुद्ध हैं, जबकि क्राऊन पिं्रस मोहम्मद बिन सलमान इसका समर्थन करते हैं।

रियाद के एक विदेशी राजनीति के एक्सपर्ट के मुताबिक क्राऊन पिं्रस सलमान इस समय किसी भी समझौते पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे क्योंकि वह इसराईल से सामान्यीकरण को बाइडेन सरकार के सामने चारे की तरह इस्तेमाल करेंगे ताकि वह अन्य मुद्दों जैसे कि सऊदी अरब में मानव अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों से बाइडेन सरकार को दूर रखें। ऐसे में आने वाले तीन हफ्तों में मध्यपूर्व में हलचल रहने के आसार हैं।

- विजय कुमार

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