Sunday, Oct 17, 2021
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the wrath of nature in the world is not stopping musrnt

नहीं थम रहा विश्व में प्रकृति का प्रकोप

  • Updated on 7/27/2021

हम अक्सर लिखते रहते हैं, कुछ समय से विश्व के हालात देखते हुए अनेक लोगों का कहना ठीक लगता है कि दुनिया पर शनि की साढ़ेसाती का प्रकोप जारी है। कहीं कोरोना महामारी प्राण ले रही है, कहीं फंगस तो कहीं भूकंप, आसमानी बिजली, भूस्खलन, बाढ़, वर्षा, जंगलों की आग आदि से भारी तबाही हो रही हैः

* 16 जुलाई तक वर्षा, बाढ़ व भूस्खलन से बैल्जियम और जर्मनी में 126 से अधिक लोगों की मौतें तथा 1300 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं। वर्षा से जर्मनी में रेलवे को 1.5 अरब डालर का नुक्सान हुआ है। यूरोप के कुछ अन्य देशों में द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के बाद पहली बार इतनी भारी बारिश हुई है, जिससे 70,000 करोड़ रुपए की सम्पत्ति नष्ट हुई है। 
* 16 जुलाई को असम के कई जिलों में 3.4 तीव्रता तथा जापान के ‘हाचिजोजिमा’ द्वीप में 5.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। 
* 18 जुलाई को बिहार में रोहतास जिले के शिवसागर इलाके में आसमानी बिजली गिरने से 3 लोगों की जान चली गई। 
* 19 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक तथा आस-पास के इलाकों में 3.2 तीव्रता के तथा इंडोनेशिया में 5.2 तीव्रता के भूकंप आए। 
* 19 जुलाई को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में वर्षा से संबंधित दुर्घटनाओं में कम से कम 3 लोगों की डूब जाने से तथा ठाणे के ‘कलवापुर’ इलाके में एक चट्टान के खिसक कर एक ‘चाल’ पर गिर जाने से 5 लोगों की मौत हो गई। इसी दिन उत्तराखंड में बादल फटने से एक ही परिवार के 3 सदस्य मारे गए।
* 20 जुलाई को महाराष्ट्र के नासिक में भूकंप के झटके महसूस किए गए, बिहार में आसमानी बिजली गिरने से 4 लोग मारे गए, चीन में सुरंग धंसने से 3 लोगों की मौत हो गई। इसी दिन पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बाढ़ ने 21 लोगों की जान ले ली तथा 22 गंभीर रूप से घायल हो गए।
* 21 जुलाई को बीकानेर में 5.3 तथा लेह में 3.6 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसी दिन चीन के मध्य हेनान प्रांत में 1000 वर्षों में हुई सबसे भयानक वर्षा से 33  लोगों की मौत  व 1400 करोड़ रुपए की सम्पत्ति नष्ट हो गई तथा हिमाचल में विभिन्न स्थानों पर वर्षा से 3 लोगों की मौत के बाद इस मौसम में अब तक वहां मृतकों की संख्या 167 हो गई।
  * 22 जुलाई को महाराष्ट्र के कई स्थानों पर 24 घंटों में साधारण से 344 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकार्ड की गई जिससे राज्य के कई जिलों में हालात बद से बदतर हो गए। राज्य में 26 जुलाई तक वर्षा और भूस्खलन से मृतकों की संख्या 164 का आंकड़ा पार कर चुकी है। पश्चिमी महाराष्ट्र एवं तटवर्ती कोंकण का पूरा क्षेत्र जलमग्न और चिपलून शहर तो पानी में लगभग डूब ही गया है। 
इसी दिन ‘पनामा’ और ‘कोस्टारिका’ में 6.8 तीव्रता व राजस्थान के बीकानेर सहित अनेक स्थानों पर 4.8 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे।
* 24 जुलाई को उत्तरकाशी में 3.4 तीव्रता तथा फिलीपींस में 6.7 तीव्रता के भूकंप आए, 24 जुलाई तक अमरीका के 13 राज्यों में 85 जगह जंगलों में लगी आग से 14 लाख एकड़ इलाका जल कर तबाह हो गया है। 
* 25 जुलाई को न्यूजीलैंड में ‘केरमाडैड’ द्वीप के निकट 6.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, हिमाचल के किन्नौर में भूस्खलन के बाद एक यात्री वाहन पर चट्टानें गिरने से 9 पर्यटकों के प्राण चले गए तथा बैल्जियम में वर्षा और बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 36 तक पहुंच गया।
* इसी दिन नार्वे की राजधानी ओस्लो के दक्षिण में देर रात तेज आवाज के साथ उल्का पिंड गिरा। इसकी आवाज और तेज रोशनी से लोग दहल गए और यह प्रकाश पुंज तथा आवाज कुछ ही क्षण में लुप्त हो गई।
* 26 जुलाई को हैदराबाद के दक्षिणी इलाके में रिक्टर पैमाने पर 4.00 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए।
वैज्ञानिकों ने ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के कारण समुद्र का जल स्तर बढऩे और अंधाधुंध औद्योगिक विकास को अनेक आपदाओं का कारण बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रकृति से अनावश्यक छेड़छाड़ बंद न की गई तो 2070 तक पृथ्वी का तापमान इतना अधिक बढ़ जाएगा कि यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। 
इसी बीच अमरीकी अनुसंधानकर्ताओं ने यह दावा किया है कि चंद्रमा की चाल से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है। उनके अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते समुद्र के जल स्तर के साथ चांद अपनी कक्षा से डगमगाएगा जिससे धरती पर 2030 में भारी बाढ़ आ सकती है।

—विजय कुमार 

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