Tuesday, May 17, 2022
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third wave of corona can be fatal for children aljwnt

‘बच्चों के लिए घातक हो सकती है कोरोना की तीसरी लहर’

  • Updated on 5/17/2021

जहां कोविड-19 (Covid 19) हामारी की पहली लहर ने अधिकतर बुजुर्गों को निशाना बनाया वहीं वर्तमान में जारी दूसरी लहर का युवा पीढ़ी पर काफी असर देखने को मिल रहा है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह लहर कब अपने चरम पर होगी और कब कोरोना के मामलों में संतोषजनक कमी आएगी परंतु विशेषज्ञ अभी से तीसरी लहर को लेकर कुछ चिंताजनक शंकाएं व्यक्त करने लगे हैं। 

‘नारायण हैल्थ’ के अध्यक्ष डा. देवी शैट्टी सहित अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी की तीसरी लहर के लिए पहले से तैयारी करनी बहुत जरूरी है। डा. देवी शैट्टी को कर्नाटक सरकार ने कोरोना की सम्भावित तीसरी लहर के लिए बनाई टास्क फोर्स का चेयरमैन नियुक्त किया है। 

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डॉ. देवी शैट्टी के अनुसार तीसरी लहर को लेकर अभी किसी तरह की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है परंतु यदि अमरीका तथा यूरोप में कोरोना वायरस के व्यवहार तथा प्रभाव को देखा जाए तो उसका असर अन्य स्थानों पर भी उसी प्रकार हो रहा है। ऐसे में बुद्धिमत्ता यही होगी कि तीसरी लहर का सामना करने के लिए हम पहले से तैयार रहें। 

सबसे अधिक चिंताजनक विशेषज्ञों की यह चेतावनी है कि तीसरी लहर बच्चों को अधिक कुप्रभावित कर सकती है क्योंकि तब तक वयस्कों में से अधिकांश या तो पहले से ही संक्रमित हो चुके होंगे या उन्हें कोरोना से बचाने वाली वैक्सीन लग चुकी होगी। 

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आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कोरोना की दूसरी लहर से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र में मासूम बच्चे अभी से सुरक्षित नहीं हैं। राज्य में लगभग 40 दिनों में 10 वर्ष से कम उम्र के 76,401 बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इस वर्ष 1 जनवरी से 12 मई तक 10 वर्ष की उम्र से कम के 1,06,222 बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं। 

बच्चों पर महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अस्पतालों में नवजात बच्चों के लिए आई.सी.यू. वार्ड बनाए जा रहे हैं। राज्य में बीते वर्ष 2020 में 67,110 बच्चे ही कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। 

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तीसरी लहर सच में यदि बच्चों को अधिक निशाना बनाती है तो अस्पतालों में उनके उपचार एवं देखभाल का काम बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो पहले से ही चरमरा चुकी हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बुरी तरह झकझोर सकता है। 

डॉ. देवी शैट्टी के अनुसार, ‘‘12 वर्ष से छोटे बच्चों की बात करें तो उनका उपचार तथा देखभाल बड़ों की तुलना में काफी अलग और कठिन होगा। बच्चों के लिए कोविड उपचार पहली दो लहरों से पूरी तरह से अलग होगा। तीसरी लहर की तैयारी के लिए डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की एक पूरी सेना की आवश्यकता होगी।’’ 

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‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चों को बड़ों की तरह सम्भालना सम्भव नहीं होता। उदाहरण के लिए यदि किसी आई.सी.यू. में कोरोना के 20 मरीज हैं तो एक नर्स उनकी दवा-दारू की जिम्मेदारी सम्भाल सकती है क्योंकि बड़े अपना ध्यान रखने में सक्षम होते हैं परंतु यदि बड़ों की जगह वहां 20 बच्चे हों तो उनके लिए कहीं अधिक नर्सों की जरूरत होगी क्योंकि न तो बच्चे आसानी से मास्क लगाएंगे, न ही उन्हें वैंटीलेटर लगाना आसान होगा और उन्हें दवाइयां खिलाना भी कठिन होगा।’’
‘‘अधिक छोटे बच्चों को तो 24 घंटे सम्भालना उनके माता-पिता के अलावा किसी अन्य के लिए वैसे भी सम्भव नहीं हो सकता। दूसरी ओर उनके माता-पिता को उनके साथ आई.सी.यू. में रखना भी व्यावहारिक नहीं हो सकता, खासकर यदि उनके और बच्चे हों तो वे उन्हें घर पर कैसे अकेला छोड़ सकते हैं।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘हमें छोटे बच्चों के माता-पिता को जल्दी से जल्दी टीका लगाने की जरूरत है। कामकाजी और निम्न-आय वर्ग के माता-पिता का टीकाकरण तीसरी लहर से होने वाले नुक्सान को कम से कम करने की कुंजी होगा। तीन महीने के अंदर-अंदर उनका टीकाकरण करना जरूरी है क्योंकि इससे उनके माध्यम से बच्चों को कोरोना होने की सम्भावना काफी कम हो जाएगी। हालांकि, देश की बड़ी जनसंख्या को देखते हुए ऐसा करना भी आसान नहीं होगा।’’ 
बच्चों के लिए जरूरी दवाइयों जैसे कि बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल आदि का उत्पादन पहले से बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चों में मामले बढऩे पर बाजार से दवाओं को खत्म होने में देर नहीं लगेगी क्योंकि इन दवाओं को वर्तमान मांग के अनुसार ही तैयार किया जाता है। 

डॉ. शैट्टी के अनुसार दूसरी लहर के तहत तेजी से बढ़े मामलों के बारे में किसी ने सोचा नहीं था और जब इतने अधिक मामले एक साथ आते हैं तो अमरीका तथा इंगलैंड जैसे विकसित देशों के लिए भी स्थिति को सम्भालना आसान नहीं हो सकता। बेशक सरकार के प्रयासों को सर्वोत्तम न कहा जा सके, इस वक्त हरसम्भव प्रयास किए जा रहे हैं। 
आवश्यक है कि इस संकट के दौर से सीख लेते हुए हम आगे किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए तैयार रहें। 
जैसा कि अंग्रेजी में कहावत है- ‘होप फॉर द बैस्ट, प्रिपेयर फॉर द वस्र्ट’ यानी ‘अच्छे की आशा रखो, बुरे के लिए तैयार रहो।’

- विजय कुमार

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