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B'day Spl: बिहार के इस छोटी जगह से आए पंकज त्रिपाठी एक कुक से ऐसे बन गए सुपरस्टार

  • Updated on 9/5/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) को आज किसी पहचान की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। पंकज का नाम ऐसे अभिनेताओं में शुमार हैं जो हर तरह का किरदार निभा लेते हैं। आज पंकज का 43 वां जन्मदिन है। पंकज का जन्म गोपालगंज बिहार में हुआ। पकंज का परिवार खेती से जुड़ा हैं। पकंज ने शुरूआती पढ़ाई पटना से की और इसके बाद उन्होंने होटल मैनेजमेंट का कोर्स करके एक होटल में 2 साल तक कुक की नौकरी की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसके बाद उन्होंने एक्टिंग सीखने के लिए दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का रुख किया। यहीं से शुरु हुआ उनकी जिंदगी का नया सफर। 

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हर तरह के किरदार में फिट

फिल्म 'न्यूटन' से लेकर 'बरेली की बर्फी' में काम कर चुके पंकज त्रिपाठी आज भी काफी सादा जीवन बिताते हैं। पकंज ने अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में अभिषेक बच्चन और भूमिका चावला स्टारर फिल्म 'रन' से की थी। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में नेगेटिव किरदार निभाए।  

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लंबे संघर्ष के बाद सफलता

पंकज ने सिनेमा की दुनिया में पहचान बनाने के लिए काफी लंबा संघर्ष किया है। लेकिन उन्हें अनुराग कश्यप की फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से पहचान मिली। पकंज करीब 40 फिल्मों और 60 टीवी सीरियल्स में काम कर चुके हैं। लेकिन एक बात जो जानकर आपको हैरानी होगी, वो ये है कि पकंज के घर में आज भी टीवी नहीं है। पंकज 'मसान', 'फुकरे', 'बरेली की बर्फी', 'स्त्री', 'न्यूटन' सहित 'मिर्जापुर' और 'सेक्रेड गेम्स' जैसी वेब सीरीज में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके हैं। 

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सादगी से रहना पसंद

पकंज बेशक अब सिनेमा की दुनिया का जाना-पहचाना नाम बन गए हों, लेकिन असल जिंदगी में वह अब भी एक सीधे-सादे इंसान ही हैं। बिहार के रहने वाले पंकज के माता-पिता अब भी गांव में ही रहते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बिहार में जहां उनके माता-पिता रहते हैं, वहां अब भी टीवी नहीं है। ऐसा नहीं है कि वो टीवी खरीद नहीं सकते। टीवी न होने की वजह ये है कि पकंज के माता-पिता को टीवी पसंद नहीं है।

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कभी नहीं हारी हिम्मत

इसके अलावा पंकज ने अपने शुरुआत दिनों के किस्से भी शेयर किए। उन्होंने बताया कि जब वह बिहार से मुंबई एक्टिंग करने आए थे तब उन्हें ऑडिशन के लिए भी बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। उन्हें सिक्योरिटी गार्ड स्टूडियो के अंदर घुसने ही नहीं देते थे और जब चांस मिलता तो प्रोड्यूसर रिजेक्ट कर देते थे। पंकज कहते है उस वक्त बहुत दुख हुआ लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी, हालांकि आज वही प्रोड्यूसर कई बार ऑफर के लिए मिलते हैं। 

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