Monday, Jun 27, 2022
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Jhund Review: एक स्पोर्ट्स फिल्म जो आपको जीवन के खेल के बारे में बहुत कुछ बताती है

  • Updated on 3/2/2022

रेटिंग : 4
निर्देशक, निर्माता : नागराज पोपटराव मंजुले 
निर्माता : भूषण कुमार, कृष्ण कुमार
कास्ट : अमिताभ बच्चन, रिंकू राजगुरु, आकाश थोसारी, विक्की कादियान, गणेश देशमुख

सोनाली सिन्हा। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म झुंड को लेकर पिछले लंबे समय से चर्चा हो रही है। फिल्म 'स्लम सॉकर' (Slum Soccer) एनजीओ चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विकास बरसे के जीवन पर आधारित है, जिसका निर्देशन मराठी हिट फिल्म 'सैराट' के डायरेक्टर नागराज मंजुले ने किया है। झुंड' एक स्पोर्ट्स फिल्म जो आपको जीवन के खेल के बारे में बहुत कुछ बताती है। यह फिल्म इस बात पर एक कमेंट्री है कि हम एक समाज के रूप में क्या कर सकते हैं ताकि वंचितों को उनके प्लस पॉइंट की पहचान करने में मदद मिल सके और दूसरे, उज्जवल पक्ष पर छलांग लगाने के लिए सीमा पार कर सकें।झुंड 4 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फिल्म देखने से पहले पढ़ें ये रिव्यू। 

कहानी
फिल्म की कहानी पूर्व खेल कोच विजय बरसे (अमिताभ बच्चन) पर आधारित है, जिन्होंने एक फुटबॉल एसोसिएशन की स्थापनाकी है। विजय बरसे कॉलेज के प्रोफेसर होते हैं जहां उन्होंने कई बच्चों को फुटबॉल में प्रशिक्षित किया है। लेकिन जब उनकी नजर कॉलेज के बाहर झुग्गी बस्ती के बच्चों पर जाती है, जो नशे में धूत और हर अपराध से ग्रस्त होते हैं। ये सब देख प्रोफेसर ठान लेते हैं कि वह उन बच्चों को सही रास्ता दिखाएंगे। फिर एक दिन फुटबॉल के जरिए वह झुग्गी के उन बच्चों की जिंदगी में एंट्री लंते हैं। फुटबॉल खेलने के लिए पहले वह बच्चों को पैसों की लालच देते हैं, फिर बाद में खेल को आदत बना देते हैं। धीरे धीरे वहीं बच्चे सभी बुरी आदतों को छोड़ फुटबॉल के बारे में सोचने लगते हैं। अपनी कड़ी मेहनत और लग्न से विजय बरसे ना सिर्फ उन बच्चों को एक अच्छा फुटबॉल प्लेयर बनाते हैं बल्कि एक अच्छा इंसान बनाने में भी सक्षम होते हैं। क्या विजय बरसे की कोशिश रंग लाती है या नहीं, ये जानने के लिए तो आपको सिनेमाघर तक जाना ही पड़ेगा...

एक्टिंग
अभिताभ ने विजय बरसे के किरदार के साथ न्याय किया है। वह अपने दमदार अभिनय से आपको फिल्म में बांधे रखेंगे। वहीं फिल्म के क्लाइमैक्स में बिग बी का लंबा मोनोलॉग आपका दिल जीत लेगा। झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों ने भी शानदार परफॉर्मेंस दी है। सभी की मेहनत फिल्म देखने पर आपको साफ पता चल जाएगी।

डायरेक्शन
नागराज मंजुले ने इस फिल्म के जरिए एक सामजिक मुद्दा उठाया है। हमारे देश भारत में बस रही दो अलग अलग दुनिया की दीवार को तोड़कर मिलाने की कोशिश की है।

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