Friday, Dec 09, 2022
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Film Review: 'द कश्मीर फाइल्स' में छिपा है कश्मीरी-पंड़ितों का दर्द

  • Updated on 3/12/2022

फिल्म: द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)
एक्टर: अनुपम खेर (kher), दर्शन कुमार (darshan kumar), मिथुन चक्रवर्ती (mithun chakraborty), पल्लवी जोशी (pallavi joshi), पुनीत इस्सर (puneet issar)
डायरेक्टर: विवेक रंजन अग्निहोत्री (vivek ranjan agnihotri)
रेटिंग : 4.5/5

ज्योत्सना रावत। निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन की ऐतिहासिक घटना पर बनी है। यह फिल्म 11 मार्च यानी आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में दिखाई सच्चाई ने दर्शकों को अंदर तक हिला दिया है। फिल्म के मेकर्स का दावा है कि इसकी कहानी कश्मीरी पंडितों के दर्द को लोगों के सामने लाएगी। इसमें अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी जैसे कलाकारों ने काम किया है। 'द ताशकंद फाइल्स' के बाद विवेक फिर से रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म लेकर आए हैं।

कहानी
फिल्म की शुरुआत 1990 के दशक से शुरू होती है और आगे तक चलती है। कृष्णा (दर्शन कुमार) दिल्ली में पढ़ रहा होता है और अपने दादाजी पुष्कर नाथ पंडित (अनुपम खेर) की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए वह श्रीनगर जाता है। कश्मीर के अतीत के बारे में उसे कुछ खास नहीं पता बस अपने दादा जी से ही सुना है। कश्मीर जाकर अपने परिवार से जुड़ी सच्चाई जानने में लग जाता है। फिर उसकी मुलाकात दादाजी के चार दोस्तों से होती है। कृष्णा उनसे धीरे धीरे कश्मीरी पंडितों के साथ हुई घटना के बारे में जानता है। इसी क्रम में दिखाया गया है कि कैसे कश्मीर की गलियों में आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों को ढूंढ-ढूंढकर मारा था। ये सब देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। 

एक्टिंग
अनुपम खेर ने अपनी एक्टिंग से एक बार फिर सबको हैरान कर दिया। वहीं, मिथुन चक्रवर्ती ने शानदार काम किया है। इनके अलावा फिल्म में दर्शन कुमार, पल्लवी जोशी, प्रकाश बेलावड़ी, पुनीत इस्सर, अतुल श्रीवास्तव, चिन्मय मांडलेकर, भाषा सुंबली इन सभी ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

डायरेक्शन

विवेक अग्निहोत्री ने कई सालों की रिसर्च के बाद यह फिल्म बनाई है, जो कि फिल्म देखने पर साफ झलकता है। फिल्म में उन कश्मीरी पंडितों का दर्दनाक सफर बहुत उम्दां तरीके से दिखाया गया है, जिन्हें रातों-रात अपने ही घर से निकाल दिया गया और उन्हें रिफ्यूजी टैंट में रहने को मजबूर किया गया। कितनों ने अपनी जान भी गंवा दी। 

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