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#Exclusive आलिया को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देना चाहते हैं वरुण, पढ़ें क्यों

  • Updated on 2/23/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ के बाद अब आलिया भट्ट ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ बनने के लिए तैयार हैं। फिल्म में बद्रीनाथ बने वरुण धवन इन दिनों अपनी दुल्हनिया आलिया को लेकर देशभर में फिल्म को प्रमोट कर रहे हैं। फिल्म 10 मार्च को रिलीज हो रही है। फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान हैं और फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले हुआ है। प्रमोशन के सिलसिले में वरुण और आलिया दिल्ली में थे। यहां उन्होंने नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी से खास बातचीत की।

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आपका किरदार कितना अलग है हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया से?
आलिया: इस फिल्म में मेरा किरदार बिल्कुल अलग है। मेरा किरदार एक ऐसी लड़की है जो अपनी जिंदगी से काफी कुछ चाहती है। वो सिर्फ किसी की बीवी या बेटी बनकर नहीं रहना चाहती। उसके अपने कुछ सपने हैं जिन्हें वो पूरा करना चाहती है। साथ ही वो एक पढ़ी-लिखी लड़की है और उसके लिए उसका आत्मसम्मान बेहद जरूरी है।

आपकी एक वर्सेटाइल फिल्म जर्नी है, फिल्मों को चुनने के पीछे क्या सोच होती है?
आलिया:जब मैं किसी फिल्म के लिए ‘हां’ कहती हूं तो मेरा एकमात्र मकसद होता है कि मैं कुछ नया कर सकूं। मैं नहीं चाहती कि मेरे फैन मुझे एक जैसे किरदारों में देखें। इससे वो भी बोर हो जाएंगे और मैं भी तो इसलिए मैं एक जैसे किरदारों को नहीं निभाना चाहती। मैं खुश हूं कि मैं अपने दिल की सुनती हूं और यही बात लोगों को पसंद आती है।

‘उड़ता पंजाब’ आपके करिअर में क्या स्थान रखती है?
आलिया: ‘उड़ता पंजाब’ की मेरे करिअर में ही नहीं, मेरे दिल में भी एक बेहद खास जगह है। उस फिल्म के दौरान मैंने जो किरदार प्ले किया था वो बेहद डार्क था। हमने फिल्म के लिए करीब 21 दिन की शूटिंग की थी लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैंने 70 दिन शूट किया है। दिमागी तौर पर वो किरदार बहुत थकाने वाला था। उस किरदार से बाहर आने में मुझे काफी समय लगा। लेकिन मैं खुश हूं कि लोगों ने मेरे काम को पसंद किया।

‘बस मस्ती भरी लव स्टोरी नहीं है फिल्म’
अपनी फिल्म को लेकर आलिया बताती हैं, ‘ऐसा नहीं है कि यह फिल्म मस्ती और प्रेम कहानी के बारे में बात करती है। मनोरंजन के साथ फिल्म में एक खास संदेश भी है कि हमें महिलाओं को सम्मान देने के साथ-साथ उन्हें प्रोत्साहित भी करना चहिए।’ 

क्या ये सच है कि इस फिल्म में किरदार के नाम से आप जुड़ाव महसूस करते हैं?
वरुण: हां, एक तो मैं शिव भक्त हूं इसलिए जब मुझे ये फिल्म ऑफर हुई तो मुझे लगा कि ये भोले बाबा का संदेश हैं और दूसरा जब मुझे पहली बार फिल्म ऑफर हुई थी तो मुझे एक डायलॉग सुनाया था, जिसमें मुझे अपना नाम बताना था और हमारे निर्देशक शशांक ने उस किरदार का नाम बद्री रखा था। जैसे ही मैंने ये नाम सुना मैं बेहद उत्साहित हुआ और अपने दोस्त फोन लगाया जो मुझे प्यार से बद्री बुलाता है। उसने कहा कि हो सकता है यह भगवान का कोई स्पेशल गिफ्ट हो, बिना सोचे इस फिल्म को ‘हां’ कह दे। बस मैंने फिल्म के लिए ‘हां’ कर दी।

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फिल्मी और निजी जीवन में डांस को कितना अहम मानते हैं?
वरुण:मेरा मानना है कि डांस का सिर्फ हम सितारों  के लिए ही नहीं, बल्कि सभी लोगों के जीवन में  खास योगदान होता है। डांस एक ऐसा जरिया है जिससे आप अपनी हर एक भावना को व्यक्त कर सकते हैं फिर चाहे वो प्यार हो, गुस्सा या दुख। इसलिए मैंने डांस पर आधारित एक फिल्म भी की थी।

हम्प्टी शर्मा से कितना अलग है बद्रीनाथ?
वरुण: इस फिल्म की कहानी और मेरा किरदार उस फिल्म से बिल्कुल अलग है। हम्प्टी एक पंजाबी लड़का था और वो थोड़ा शहरी था लेकिन बद्री एक छोटे से शहर का रहने वाला लड़का है। उसका रहन-सहन, भाषा यहां तक कि सोच भी कई मायनों में काफी अलग है। वो थोड़ा संकुचित सोच वाला व्यक्ति है, लेकिन जब वह आलिया से मिलता है तो उसके जीवन में क्या बदलाव आते हैं, यही फिल्म की कहानी है।

‘बचपन में बहुत शरारती था’
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए वरुण बताते हैं कि मैं शुरू से ही फिल्मों का बहुत शौकीन और शरारती रहा हूं। मुझे याद है मैं शायद 12 साल का रहा होऊंगा जब मुझे पापा के ही एक गाने पर परफॉर्म करने के लिए कहा गया था लेकिन मैं उस पर डांस नहीं करना चाहता था। तब मैंने अपने दोस्तों को बोलकर अंत समय में गाने की सीडी बदलवा दी थी और दलेर मेहंदी के गाने तुनक तुनक तुन तारा रा रा... पर डांस किया था। 

आप दोनों की जोड़ी एक बार फिर पर्दे पर नजर आने वाली है, कितने उत्साहित हैं?
वरुण: मैं हमेशा ही आलिया के साथ काम करके बहुत खुश होता हूं। वैसे तो हम लोगों ने एक साथ अपना फिल्मी करिअर शुरू किया था। लेकिन असल में आलिया मुझसे बहुत सीनियर है (हंसते हुए)। आलिया की पहली फिल्म ‘संघर्ष’ थी जिसमें वो एक बाल कलाकार के रूप में नजर आई थीं तो इस लिहाज से वो मेरी सीनियर हैं। मैं आलिया के साथ काम करके हमेशा एंजॉय करता हूं।
आलिया: हम दोनों के बीच की ऑफस्क्रीन केमिस्ट्री बहुत अच्छी है और शायद यही ऑनस्क्रीन भी दिखता है। हम भी यह देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं दर्शक इस बार हमारी जोड़ी को कितना प्यार देते हैं।

आप दोनों फिल्म को जोर-शोर से प्रमोट कर रहे हैं। कितना एंजॉय करते हैं इस दौर को?
वरुण: मैं अपनी फिल्मों को बहुत प्रमोट करता हूं और कभी-कभी तो मेरी पीआर टीम भी मुझसे शिकायत करती है। लेकिन मुझे ये करने में बड़ा मजा आता है। मैं चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग मेरी फिल्म के बारे में जानें और देखें। आलिया के साथ काम करने का एक फायदा यह भी है कि वह मुझसे भी ज्यादा फिल्मों को प्रमोट करती है।

आलिया: वरुण से ज्यादा तो कोई भी प्रमोशन नहीं कर सकता लेकिन हां, हम कोशिश करते हैं लोगों तक फिल्म पहुंचे। आखिर हम फिल्म बनाते किस लिए हैं? ऑडियंस के लिए ही न तो एक कोशिश रहती है उन तक पहुंचने की।

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फिल्म की शूटिंग झांसी और कोटा में हुई है। कैसा रहा वहां का अनुभव?
आलिया: वहां पर शूटिंग करने का एक अलग ही अनुभव था। ऐसा शायद पहली बार है जब किसी फिल्म की शूटिंग कोटा में हुई है। वहां जाने से पहले हम ये तो जानते थे कि कोटा आईटी हब है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स वहां रहते हैं, इसका अंदाजा नहीं था हमें।

वरुण: जब हम वहां शूटिंग करने गए तो सबसे पहले तो यही एक खास अनुभव था कि वहां पहली बार शूटिंग हो रही है। इसके अलावा हमें उम्मीद नहीं थी कि वहां लोगों से हमको इतना प्यार मिलेगा। जब हम स्टूडेंट ऑफ द ईयर की शूटिंग कर रहे थे तो मुझे याद है कि बहुत खास भीड़ नहीं हुआ करती थी लेकिन वहां जाकर पता लगा कि लोग हमें कितना प्यार करते हैं। एक बार तो हालत इतनी खराब हो गई थी कि पुलिस को लाठी चार्ज तक करना पड़ा था।

वरुण आप मां के करीब हैं और आलिया पिता के। इसको कैसे परिभाषित करेंगे?
वरुण: वैसे तो आपके जीवन में माता और पिता दोनों की ही एक खास जगह होती है। लेकिन मुझे लगता है कि हमारे जीवन में मां की भूमिका बेहद खास रहती है। मैं भी अपनी मां के बेहद करीब हूं, मैंने देखा है कि एक महिला किस तरह अपना करिअर और घर दोनों संभालती है। मैं उनकी बहुत इज्जत करता हूं और प्यार भी।

आलिया: जैसा कि वरुण ने कहा कि दोनों ही हमारे जीवन में बेहद खास होते हैं, ये सच है लेकिन मैं बचपन में मां के ज्यादा करीब थी क्योंकि, पापा को इतना वक्त नहीं मिलता था। हालांकि फिल्मों में आने के बाद मैंने पापा को खुद के बेहद करीब पाया और अब मैं कह सकती हूं कि वो ही हैं जिनसे मैं अपने दिल की बात सबसे पहले शेयर करूंगी। पापा में सबसे खास बात है कि वो आपको भावनाओं का फुल पैकेज देते हैं।

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