Thursday, Aug 11, 2022
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मेंटल हेल्थ जैसे मुद्दे को इन फिल्मों ने पर्दे पर उतारा पॉजिटिव तरीके से

  • Updated on 10/10/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आज के समय में मेंटल हेल्थ (mental health) एक ऐसा टॉपिक है, जिस पर बात करना और समझना सभी के लिए बहुत जरूरी है। किसी भी मुद्दे को लोगों तक पहुंचाना हो तो फिल्में इसका बहुत अच्छा विकल्प हैं। गौरतलब है कि फिल्मों के माध्यम से लोगों तक किसी भी संदेश को पंहुचाना काफी हद तक आसान है। आज के समय में मानसिक बीमारियों को कोई समझ नहीं पाता और हमारे समाज में इन्हें केलव पागल का नाम दे दिया जाता है। आइए हम आपको कुछ ऐसी हिंदी फिल्मों के बारे में बताते हैं, जिनमें बहुत ही पॉजिटिव तरीके से मेंटल हेल्थ इशूज को लोगों तक पंहुचाने की कोशिश की गई।

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फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ (three idiots) साल 2009 में आई थी इस फिल्म में मेंटल प्रेशर जैसे मुद्दे को लोगों तक पंहुचाया गया था। यह फिल्म लोगों को बहुत पसंद आई थी। 

अभिनेता फरहान अख्तर (farhan akhtar) की फिल्म 'कार्तिक कालिंग कार्तिक' (kartik calling kartik) मानसिक बीमारी का बहुत अच्छा उदाहरण थी। यह फिल्म 2007 में आई थी। 

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शाहरुख खान (shahrukh khan) की फिल्म 'डियर जिंदगी' (dear zindagi) जिसमें उनके साथ आलिया भट्ट (आलिया भट्ट) मुख्य किरदार में थीं। इस फिल्म को ज्यादा समय नहीं हुआ यह 2016 में आई थी। इसमें इंसोमेनिया जैसी बीमारी को दिखाया गया है।

फिल्म 'तारे जमीन पर' (taare zamee per) भी मानसिक बीमारी को बहुत अच्छा उदाहरण है। 

प्रियंका चोपड़ा (priyanka chopra) की फिल्म ‘बर्फी’ (barfi) जो 2012 में आई थी। जिसमें मानसिक रोग को बहुत सकारात्मकता से दिखाया गया था। इसमें रणबीर कपूर (ranbir kapoor) मुख्य भूमिका में थे।


वैसे कुछ ऐसी फिल्में भी हैं जिनमें इस बीमारी को गलत तरीके से दिखाया। पहले कुछ फिल्मों में अगर कोई रोगी पागल खाने में है तो उसे सिर्फ इलेक्ट्रिक शौक (एलेक्ट्रोकंक्लुसिव थेरेपी) दी जाती थी। जबकि ये गलत है, ऐसा असल में नहीं होता।  ‘राजा (raja), दामिनी (damini), खामोशी (khamoshi), रात और दिन (raat or din) कुछ ऐसी ही फिल्में हैं।

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