Tuesday, Jan 31, 2023
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box office collection of malang and shikara

Box Office Weekly Report : जानें Malang और Shikara में कौन है आगे?

  • Updated on 2/10/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। इस शुक्रवार 7 फरवरी को बॉक्स ऑफिस (box office) पर  आदित्य रॉय कपूर (aditya roy kapur) की 'मलंग' (malang) और  विधु विनोद चोपड़ा (vidhu vinod chopra) की  'शिकारा' (Shikara) की टक्कर हुई। 

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यहां देखें बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
'मलंग' की बात करें तो फिल्म ने अपने ओपनिंग डे पर 6.71 करोड़ और शनिवार को 8.89 करोड़ का कलेक्शन किया था। कुल मिलाकर तीन दिन में 'मलंग' ने 25.36 करोड़ का बिजनेस कर लिया है। 

वहीं दूसरी तरफ 'शिकारा' ने पहले दिन 1.20 करोड़ का कलेक्शन किया है। शनिवार को 1.85 करोड़ का कलेक्शन किया था। कुल मिलाकर तीन दिन में 'शिकारा' ने 4.95 करोड़ का बिजनेस कर लिया है। 

यानि की पहले वीकेंड पर फिल्म ने 25.36 करोड़ की कमाई कर 'शिकारा' को पछाड़ दिया है।

दिलचस्प है फिल्म 'मलंग' की कहानी
फिल्म 'मलंग' में दो कहानियां एक साथ चलती हैं यानि की एक वर्तमान की और एक पुरानी। फिल्म की कहानी शुरु होती हैं दो अजनबियों सारा (दिशा) और अद्वैत (आदित्य) से जिनकी मुलाकात गोवा में हुई होती है। वहीं इनकी इन मुलाकातों के साथ दोनों में गहरा प्यार हो जाता है। वहीं अब हम किसी लव स्टोरी की बात करें तो उसमें दिक्कतें न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता । वहीं इसके बाद दोनों की जिंदगी एक नया मोड़ लेती है।

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कहानी शुरु होती हैं नए अद्वैत से, जो एक के बाद एक हत्याएं कर रहा है। वहीं अद्वैत को पकड़ने के लिए दो पुलिस अधिकारी उसके पीछे लग जात हैं, एक है अंजनी अगाशे (अनिल कपूर) और दूसरा माइकल (कुणाल खेमू)। ये दोनों एक ऐसे अधिकारी हैं जो मुजरिमों को एनकाउंटर दिलाने में विश्वास रखते हैं। फिल्म की कहानी में एक ऐसा ट्विस्ट आता है जब सभी किरदारों की कहानी एक दूसरे से जुड़ी चली जाती है।

झंकझोर देने वाली है शिकारा की कहानी
फिल्म की कहानी है शिव कुमार धर (Aadil Khan) और उसकी पत्नी शांति (Sadia Khan) की जो कश्मीर की खूबसूरत वादियों में एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। काफी मेहनत करके दोनों वहां पर एक प्यारा सा अपना एक घर बनाते हैं और उसका नाम रखते हैं 'शिकारा'। जहां एक तरफ वो अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुशी से जी रहे होते हैं वहीं दूसरे तरफ घाटी में सांप्रदायिक हिंसा जन्म ले लेती है। ये हिंसा इतनी बढ़ जाती है कि कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर जाने के लिए धमकाया जाने लगता है।

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अगर कोई कश्मीरी पंडित वहां नजर आ जाता है तो उसका घर जला दिया जाता है। घाटी में लगातार बढ़ रहा ये तनाव कश्मीरी पंडितों के सामने सिर्फ दो ही विकल्प छोड़ता है- या तो वो कश्मीर से हमेशा के लिए दूरी बनाकर अपनी जिंदगी बचाते या फिर वहां हो रही सांप्रदायिक हिंसा का शिकार बनते। आखिरकार शिव और शांति मजबूरी में अपने सपनों का घर छोड़कर रिफ्यूजी की जिंदगी जीने लगते हैं। अब रिफ्यूजी बनने के बाद ये दोनों किन-किन परिस्थितियों से गुजरते हैं और इनके साथ क्या होता है ये आप फिल्म देखकर महसूस कर सकते हैं।

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