Tuesday, Sep 25, 2018

मुंबई को अलविदा कह इस एक्टर ने उठाया यह बड़ा कदम, अब कर रहा खेती

  • Updated on 4/16/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मुंबई में रहने वाले कलाकारों में से कितनो के बारे में आपने सुना होगा की वो इस चकाचौंध भरे शहर को छोड़ अपने गांव को लौट गए? शायद एक भी नही। लेकिन आज हम आपको एक एेसे सख्श के बारे में बताने वाले है जिसने मुंबई को अलविदा कह कर अपने गांव को स्मार्ट सिटी बनाने का जिम्मा उठाया है। 

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फेमस शो 'साराभाई वर्सेज साराभाई' के एक्टर राजेश कुमार ने एक्टिंग की दुनिया से दूरियां बना ली है और अब उन्होंने बिहार के एक गांव को स्मार्ट गांव बनाने का फैसला किया है। दरअसल, साराभाई में राजेश, रोसेश की भूमिका में नजर आते थे और इस शो में वह एक कॉमेडी एक्टर के रूप में नजर आए थे।

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अब राजेश 125 किलोमीटर दूर बर्मा गांव में खेती कर रहे हैं। उन्होंने खेती के बारे में जानकारी देने के साथ साथ उन्होंने शून्य-बजट आध्यात्मिक खेती में हाथ बटाना शुरू कर दिया है। 

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कैसे आए थे मुंबई

पटना में जन्में राजेश अपनी गर्भवती बहन की देखरेख के लिए 1998 में बिहार से मुंबई पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने खुद अभिनय के क्षेत्र में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी कॉमेडी से अपने कई प्रशंसक बनाए। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन बिहार यूनिवर्सिटी से पूरी की और वह मुंबई के सेंट जेविअर कॉलेज से मास कम्युनिकेशन करना चाहते थे। 

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इसी बीच उनके एक दोस्त ने उन्हें एक छोटा सा रोल प्ले करने को कहा, इसमें राजेश को एक छोटी सी लाइन बोलनी थी, 'हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी कांग्रेचुलेशन ये रही आपकी टिकट', इसे बोलने में उन्होंने 20 रीटेक लिए थे और इस रोल के लिए उन्हें 1,000 रुपये मिले थे। इसके बाद ही राजेश के एक्टर बनने की जर्नी शुरू हुई थी।

इसलिए कर रहे हैं खेती

पटना में जन्मे राजेश के मुताबिक वे एक बार पेड़ के नीचे बैठे थे उस समय उन्हें एक आइडिया आया कि बर्मा गांव की हालत सुधारने में कुछ मदद की जाए। उसके बाद वे जब बर्मा गांव पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उस गांव में कोई सुविधाएं भी नहीं हैं। पानी, बिजली की भी बिल्कुल व्यवस्था नहीं हैं। इस बात पर उन्होंने गांव को स्मार्ट बनाने के लिए प्रयास शुरू किया और बिजली पानी की व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किए।

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धीरे-धीरे वे इस गांव की हालत सुधार रहे हैं। जानवरों का दूध निकालना, घास काटना, खेती करने के साथ साथ वे पूरे काम करते हैं। वह अपने गांव में कई बार गांव के लोगों के साथ पंचायत करते देखे जाते हैं। इतना ही नहीं वह लोगों के पास जाकर उनकी समस्याओं के निदान में भी जुटे दिखते हैं। 

क्या है शून्य-बजट आध्यात्मिक खेती

शून्य-बजट आध्यात्मिक खेती प्रकृति, विज्ञान, आध्यात्म एवं अहिंसा पर आधारित खेती की टेक्निक है। इस टेक्निक में रासायनिक खाद, गोबर खाद, जैविक खाद, केंचुआ खाद एवं जहरीले रासायनिक-जैविक केमिकल नही खरीदने होते बल्कि केवल एक देसी गाय से 30 एकड़ खेती कर सकते हैं। इस टेक्निक में केवल 10% पानी एवं 10% बिजली की जरूरत होती है, मतलब 90% पानी एवं बिजली की बचत हो जाती है।

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