Thursday, Feb 02, 2023
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#Exclusive: हॉलीवुड की एक्शन फिल्मों से कम नहीं ‘कमांडो-2’

  • Updated on 3/1/2017
  • Author : Usha Khokhar

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। ‘कमांडो’ के बाद बॉलीवुड के एक्शन हीरो विद्युत जामवाल ‘कमांडो-2’ के जरिए दर्शकों को हैरान करने आ रहे हैं।

वह इस फिल्म में एक्शन के साथ दो-दो अभिनेत्रियों के साथ रोमांस करते दिखेंगे। फिल्म में अदा शर्मा और ईशा गुप्ता भी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन देवेन भोजानी ने किया है। इसके निर्माता विपुल शाह हैं।

यह फिल्म इसी शुक्रवार यानी 3 मार्च को रिलीज हो रही है। फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में दिल्ली स्थित नवोदय टाइम्स दफ्तर पहुंचे विपुल शाह, विद्युत जामवाल, अदा शर्मा और देवेन भोजानी ने खास बातचीत की... 

‘कमांडो’ से कैसे अलग है ‘कमांडो 2’?
देवेन: ‘कमांडो’ और ‘कमांडो-2’ में विद्युत को छोड़कर सब कुछ अलग है। इसका विषय काफी अलग है। कालेधन के कुबेरों का मुद्दा उठाया गया है। इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और यह दिखाया जाता है कि किस तरह भारतीय अधिकारी जी जान लगा देते हैं कालेधन के माफिया को ठिकाने लगाने के लिए।

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विपुल, आपने निर्देशन के लिए देवेन भोजानी का चयन क्यों किया?
विपुल : मुझे ऐसे निर्देशक की जरूरत थी, जो फिल्म में खास चीज डाल सके। एक्शन के साथ-साथ बाकी भावनाओं को भी भली-भांति कहानी में पिरो सके। जब मैंने सोचा, तो मुझे लगा कि देवेन में वह खास बात है। फिल्म पूरी होने के बाद अब मुझे लगता है कि मेरा फैसला बिल्कुल ठीक था।

एक्शन के लिए क्या तैयारियां थी?
विपुल : इस फिल्म में भी अलग तरह का एक्शन देखने को मिलेगा। इसके लिए विद्युत ने बहुत मेहनत की है। अभी तक हमें जितनी भी प्रतिक्रियाएं मिली हैं, वे बेहद अच्छी हैं। आप जब फिल्म देखेंगे तो भाषा के अलावा आपको हॉलीवुड की एक्शन फिल्म से हमारी फिल्म किसी भी पैमाने पर कम नहीं लगेगी।

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फिल्म का नाम ‘कमांडो-2’ ही क्यों रखा गया, किसी और नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया?
विपुल : एक्शन फिल्म की सीरीज होना अपने आप में अहम बात है। दर्शकों को किसी भी एक्शन हीरो के जीवन को पर्दे पर आगे बढ़ते हुए देखना खूब भाता है। ऐसा नहीं होता तो ‘जेम्स बॉन्ड’ और ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ की इतनी सीरीज नहीं बनती। दर्शक हर बार देखना चाहता है इससे आगे और क्या हो सकता है। एक्शन को हर बार कैसे अलग तरीके से दिखाया जाए ये अपने आप में चुनौती है, इसीलिए हमने फिल्म का नाम ‘कमांडो-2’ रखा है।

फिल्म के किरदार को बदलना नहीं चाहते?
देवेन : हमने इस फिल्म में ‘कंमाडो’ से कोई समानता नहीं रखी है, सिवाय विद्युत के। सीक्वल में अक्सर होता है कि दर्शक फिल्म के मुख्य किरदार से खुद को जोड़ चुके होते हैं। ऐसे में अगर हम मुख्य किरदार को बदल देते हैं तो फिर दर्शकों के लिए उससे जुड़ थोड़ा मुश्किल हो जाता।

फिल्म में विद्युत के एक्शन में क्या खास है?
विपुल : एक्शन वाले दृश्यों में विद्युत का विशेष योगदान है। अगर इसमें उनके योगदान को सराहा न जाए तो ये उनके साथ नाइंसाफी होगी। मैं खुद पर गर्व महसूस करता हूं कि मैं इतने प्रतिभाशाली अभिनेता के साथ काम कर रहा हूं। मेरा मानना है पूरे देश को एक दिन गर्व महसूस होगा कि हॉलीवुड ही नहीं, बल्कि हमारे यहांभी इतने बेहतरीन एक्शन हीरो हैं।

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अक्षय कुमार का साथ छोड़कर विद्युत के साथ कैसे नाता जुड़ा?
विपुल : हां, यह सही है कि पहले मेरी ‘ए’ सूची में अक्षय का नाम सबसे ऊपर था, लेकिन अब विद्युत भी मेरे खास दोस्त बन गए हैं। इसका ये मतलब नहीं है कि अब अक्षय से मेरी दोस्ती नहीं रही। अक्षय आज भी मेरे बेहद अच्छे मित्र हैं।

देवेन, फिल्म निर्देशन का अनुभव कैसा रहा, फिल्म की यूएसपी किसे मानते हैं?
देवेन : मैं काफी समय से निर्देशन में हाथ आजमाना चाहता था, लेकिन ऐसा कुछ खास नहीं मिला। जब विपुल ने मुझे इस फिल्म का प्रस्ताव दिया तो मुझे लगा कि ये कुछ खास है। और आज मैं कह सकता हूं कि मेरा फैसला ठीक था। फिल्म की यूएसपी एक्शन और अलग कहानी है।

बॉलीवुड के अपने सफर को कैसे देखते हैं?
विद्युत : बॉलीवुड में पैर जमाना इतना आसान नहीं है, खास तौर पर जब आपका बॉलीवुड से कोई नाता न हो। सबसे पहले आपसे यही पूछा जाता है कि आपका बॉलीवुड से क्या रिश्ता है? मैंने बहुत संघर्ष किया है शायद इसलिए खुलकर यह बात कह सकता हूं। हर कोई मेरे जितना खुशनसीब भी नहीं होता, जिसे विपुल शाह जैसे लोग इंडस्ट्री में ब्रेक देने के लिए मिल जाएं।

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अदा, आप अपने सफर को कैसे देखती हैं?
अदा : मैं अपने बॉलीवुड सफर को काफी अच्छा मानती हूं। जहां तक बात संघर्ष की है, तो वह चाहे जो भी पेशा हो, आपको थोड़ा बहुत तो संघर्ष करना ही पड़ता है। हां, ये कह लीजिए कि बॉलीवुड के संघर्ष को आप एक सीमा में बांध नहीं सकते।

क्या आप मानते हैं कि बॉलीवुड की फिल्में लोगों को फिटनेस के बारे में सचेत करने में कामयाब रही हैं?
विद्युत : फिल्मों के अलावा भी ऐसे कई माध्यम हैं, जिनके जरिए आप लोगों को स्वास्थ्य के लिए प्रेरित कर सकते हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि लोग बॉलीवुड को आंखें बंदकर फॉलो करते हैं। हमें ये समझना होगा कि हर व्यक्ति का शरीर अलग है और उसे अलग प्रकार के भोजन और वर्कआउट की जरूरत होती है।

अदा, आप इस फिल्म में किस तरह की भूमिका में दिखेंगी?
अदा : मैंने एन्काउंटर स्पेशियलिस्ट का किरदार निभाया है। यह मेरी पहली फिल्म है, जिसमें मैं इतना बोल रही हूं, साथ ही जबरदस्त एक्शन भी कर रही हूं। अब हमारी इंडस्ट्री बदल रही है और हीरो की ही तरह हीरोइन को भी मजबूत भूमिकाएं निभाने का मौका मिल रहा है।

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इस फिल्म के लिए हां कहने का क्या कारण रहा?
विद्युत : मैं अपनी हर फिल्म में कुछ न कुछ नया ढूंढ़ता हूं। मैं पहले भी ‘कमांडो’ का हिस्सा रहा हूं इसलिए इसे न करने का कोई कारण ही नहीं था मेरे पास।
अदा : इस फिल्म की कहानी और इसमें मेरा किरदार दोनों ही बिल्कुल अलग है। बॉलीवुड में अभिनेत्रियों के लिए ऐसे किरदार कम ही लिखे जाते हैं, तो मैं यह मौका बिल्कुल खोना नहीं चाहती थी।

आप दोनों ने बॉलीवुड में काफी कम फिल्में की हैं, क्या कारण मानते हैं?
विद्युत : मेरा मानना है कि फिल्में कम हों या ज्यादा, नंबरों से कोई फर्क नहीं पड़ता। बात यह है कि जब आप पर्दे पर आते हैं तो क्या कमाल करते हैं। मैं आपको यह तो दावे के साथ कह सकता हूं कि जब भी मैं पर्दे पर आता हूं तो धमाका तो जरूर करता हूं।
अदा : मैं विद्युत की बात से सहमत हूं, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितनी फिल्में की हैं। इस बात से फर्क जरूर पड़ता है कि आपने किस तरह की फिल्में की हैं।

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विद्युत के किस का किस्सा
फिल्म में विद्युत रोमांटिक सीन करते भी नजर आ रहे हैं। वह बताते हैं, फिल्म में अपनी अभिनेत्रियों के साथ किस करता नजर आऊंगा। फिल्मों में किस हो या फाइट सब होता तो नकली ही है। अगर असल में ऐसा होता तो या तो मेरी शादी हो जाती और कई सारे लोग मेरे हाथ से पिट चुके होते। लेकिन ऐसा होता नहीं है।

बचपन की यादों से जुड़ा है ‘पंजाब केसरी’
विद्युत बताते हैं कि वह अपने पिता के साथ कुछ समय जालंधर में रह चुके हैं। बकौल विद्युत, ‘मैं जब छोटा था, तो कुछ समय के लिए वहां स्कूल में पढ़ा था। पिता फौज में थे तो खबरों को लेकर मैं बहुत ज्यादा सजग रहता था। उस दौर में एकमात्र अखबार पंजाब केसरी ही सभी की जुबां पर हुआ करता था तो इसलिए जिसे भी सभी खबरों के बारे में पता होता था, उसे पंजाब केसरी कहकर बुलाया जाता था।’ 

ये बचपन की दोस्ती का मामला है
विपुल बताते हैं, ‘देवेन मेरे बचपन का दोस्त है और मैं उन्हें उनसे भी ज्यादा समझता हूं। हमने साथ में कई नाटक किए हैं। काफी कम लोग जागते हैं कि देवेन ने थिएटर में काफी निर्देशन किया है। मैं जानता था कि उनमें कुछ अलग करने की चाह और हिम्मत दोनों है इसलिए हमने सोचा कि ‘कमांडो-2’ में कुछ अच्छा करते हैं।’

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