Sunday, Sep 19, 2021
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fans prayer and light candles outside dilip ancestral home in pakistan jsrwnt

पाकिस्तान में घर के बाहर फैंस ने नमाज पढ़कर और मोमबत्ती जलाकर दिलीप कुमार को दी श्रद्धांजली

  • Updated on 7/9/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार (dilip kumar) के निधन से पूरे भारत में शौक की लहर दौड़ गई ,तो वहीं पाकिस्तान में भी उनके चाहने वाले कम नहीं थे। दिलीप कुमार पेशावर के पुराने मोहल्ले खिसा ख्वानी बाजार में 11 दिसंबर 1922 को पैदा हुए थे और कुछ ही सालों बाद उनका परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया था।

दिलीप कुमार आखिरी दम तक अपने पैदाइशी पुश्तैनी घर को नहीं भूले थे यही नहीं पेशावर के लोग भी दिलीप साहब को बहुत चाहते हैं। जैसे ही दिलीप साहब के निधन की खबर पाकिस्तान पंहुची उसके बाद से ही पेशावर स्थित उनके पुश्तैनी घर के बाहर उनके फैंस और रिश्तेदारों ने नमाज-ए-जनाजा (अंतिम संस्कार में होनी वाली नमाज) पढ़ी। साथ ही मोमबत्तियां जलाकर उन्हें श्रद्धांजली दी।

बता दें कि 1998 में पाकिस्तान की सरकार ने दिलीप कुमार को निशान-ए-इम्तियाज पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। इसके अलावा पाकिस्तान में दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर को राष्ट्रीय विरासत का दर्जा दिया गया है। जिसे जल्द म्यूजियम के रूप में तब्दील किया जाएगा।

कुछ दिन पहले दिलीप कुमार ने सोशल मीडिया पर आग्रह किया था कि 'पेशावर के सभी लोगों से अनुरोध करता हूं कि जिनके पास भी मेरे पुश्तैनी घर की तस्वीरें हैं, वो प्लीज #DilipKumar हैशटैग के साथ शेयर करें।' वहीं दिलीप कुमार के इस पोस्ट के कुछ देर बाद ही लोग उनके घर की तस्वीरें शेयर करने लगे थे। 

इसके बाद पाकिस्तान के एक पत्रकार ने दिलीप कुमार को टैग करते हुए उनके पुश्तैनी घर की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थी जो 100 साल पुरानी पाकिस्तान के पेशावर शहर के केंद्र में स्थित है। वहीं इन तस्वीरों को देखते हुए दिलीप कुमार को अपना बचपन याद आ गया और वह बेहद भावुक हो गए थे। उसके बाद दिलीप कुमार ने उस पत्रकार को तहे दिल से शुक्रिया अदा किया था।

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