Sunday, Jun 26, 2022
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आखिर सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रही हैं Gulabo Sitabo की 'बेगम'

  • Updated on 6/13/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अमिताभ बच्चन (Amitabh bachchan) और आयुष्मान खुराना (Ayushmann khurrana) की फिल्म 'गुलाबो सिताबो' (Gulabo Sitabo) 12 जून को अमेजॉन प्राइम (Amazon Prime) पर रिलीज हुई है जिसे लेकर लोगों की तरफ से मिलेजुल रिस्पॉन्स मिल रहे हैं। फिल्म को शूजित सरकार (shoojit sircar) ने डायरेक्ट किया है। वहीं खास बात बता दें कि अभिताभ और आयुष्मान से ज्यादा फिल्म में बेगम का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री फारुख जफर (Farukh Jafar) की चर्चा हो रही है। जी हां, दर्शकों को फिल्म में बेगम का किरदार खूब पसंद आ रहा है तभी सोशल मीडिया पर फारुख जफर को उनके अभिनय के लिए खूब सराहा जा रहा है। 

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यहां जानें कौन है बेगम?
वहीं काफी कम लोगों को पता होगा कि आखिर कौन है ये बेगम? तो चलिए आज हम आपको फारुख जफर से जुड़ी कई सारी बातों के बारें में बताएंगे जोकि काफी कम लोगों को पता होगी। 

साल 1981 में हिंदी सिनेमा की आईकोनिक फिल्म 'उमराव जान' से फारुख जफर ने अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने फिल्म में उमराव जान की मां का किरदार निभाया था। वहीं इससे पहले वह रेडियो में काम किया करती थीं। जी हां, सन 1963 में फारुख लखनऊ के विविध भारती में बतौर आनाउंसर काम करती थी। खास बात बता दें कि वे भारत की पहली महिला हैं जोकि रेडियो आनाउंसर थी। वहीं बताया जाता है कि कुछ दिन फिल्मों में काम करने के बाद फारुख ने हिंदी सिनेमा से दूरी बना ली थी जिसके बाद साल 2004 में शाहरुख खान स्टारर फिल्म 'स्वदेश' से उन्होंने वापसी की। बता दें कि फारुख जफर ने सुल्तान, पीपली लाइव, सीक्रेट सुपरस्टार जैसी की सुपरहिट फिल्मों में काम किया है।

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ये है फिल्म की कहानी 
गुलाबो सिताबो की बात करें तो फिल्म में एक 78 साल बुजुर्ग मुस्लिम शख्स मिर्जा (अमिताभ बच्चन) की कहानी को दर्शाया गया है जोकि बेहद झगड़ालू और कंजूस स्वभाव का होता है। वहीं कहानी मिर्जा के इर्द-गिर्द ही घूमती हुई नजर आ रही है जो अपनी सालों पुरानी हवेली से बेइंतहा प्यार करता है जिसका नाम फातिमा महल है।

दिलचस्प बात बता दें कि हवेली के प्रती मिर्जा का प्यार सिर्फ और सिर्फ पैसों की वजह से है। वे पैसों के लिए हवेली की पुरानी चीजों को चोरी से बेचता रहता है। वहीं हवेली मिर्जा की बीवी फातिमा की पुश्तैनी जायदाद होती है जिसे वह जल्द से जल्द अपने नाम करवाना चाहते हैं। यही वजह है कि वह खुद से 17 साल बड़ी फातिमा के मरने का भी बेसब्री से इंतजार करता है।

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वहीं इस हवेली में कई किराएदार रहते हैं जिनमें से एक बांके नाम का एक लड़का अपनी मां और तीन बहनों के साथ रहता है, जिसे मिर्जा बिल्कुल पसंद नहीं करता। ऐसा इसलिए क्योंकि बांके न तो किराया देता है और न ही वहां से जाता है।बांके हमेशा यह बोलकर किराया नहीं देता है कि वह एक गरीब लड़का है जो फैमिली की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा हुआ है। वहीं मिर्जा चाहता है कि या तो बंके किराया दे या फिर हवेली छोड़ कर चला जाए, लेकिन बांके टस से मस नहीं होता है। ऐसे में दोनों आपस में पूरे समय लड़ते-भिड़ते रहते हैं जोकि देखने में काफी मजेदार लग रहा है। वहीं दूसरी तरफ बांके की गर्लफ्रेंड शादी करने के लिए उसपर लगातार दवाब बना रही होती है।

कहानी में ट्वीस्ट तब आता है जब मिर्जा इस पुशतैनी हवेली को बेचने के लिए एक बिल्डर खोज लेता है। वहीं दूसरी तरफ बांके एलआईजी फ्लैट के लालच में आर्कियोलॉजी विभाग के एक अधिकारी से मिलकर इसे पुरातत्व विभाग को सौंपने की योजना बना लेता है। मगर, बेगम का एक दांव इन दोनों की योजनाओं पर पानी फेर देता है और दोनों को ही हवेली से निकलना पड़ता है।

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