Thursday, Dec 08, 2022
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film commando 3 movie review in hindi

Movie Review: देशभक्ति-धर्म परिवर्तन के बावजूद भी फीकी पड़ी विद्युत जामवाल की Commando 3

  • Updated on 11/29/2019

फिल्म - कमांडो 3/Commando 3
निर्देशक - आदित्य दत्त
स्टारकास्ट - विद्युत जामवाल, गुलशन देवैया,
अदा शर्मा, अंगीरा धर, राजेश तैलंग, सुमीत ठाकुर 
रेटिंग - 3/5 स्टार

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कमांडो, कंमाोडो 2 के बाद दर्शक कमांडो 3 (commando 3) का बेसब्री से इंताजार कर रहे थे। वहीं मार्शल आर्ट्स चैंपियन विद्युत जामवाल (vidyut jammwal) स्टारर फिल्म 'कमांडो 3' आज 28 नवंबर को सभी सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकि है। हिंदी सिनेमा में आंतकवादियों पर आधारित तो हमने कई सारी फिल्में देखी हैं लेकिन इस बार फिल्म के डायरेक्टर विपुल अम्रतलाल कमांडो 3 में कुछ नया लेकर आए हैं।

जी हां, यह फिल्म हामारे देश में धर्म के नाम पर हो रहे है आतंकवाद के खिलाफ छिड़ी एक दौर की कहानी है। फिल्म में हिंदू-मुस्लिम बगावत, धर्म परिवर्तन, देशभक्ति..... सबकुछ दिखाया गया है।

कहानी
फिल्म में बुराक अंसारी (गुलशन देवैया) एक खतरनाक आतंकवादी होता है जो लंदन में बैठे-बैठे भारत में बम ब्लास्ट करवाना चाहते है। जिसके लिए वो भारते में छिपे युवा आतंकवादियों का ब्रेनवाश करता है। वहीं जब इसकी भनक भारत सरकार को लगती है तब वो अपने यहां मौजूद सर्वश्रेष्ठ कमांडो करणवीर सिंह डोगरा (विद्युत जामवा) और एंनकाउंटर स्पेशलिस्ट भावना रेड्डी (अदा शर्मा) को लंदन भेजते हैं जहां उनका मिश्न होता है बुराक अंसारी को कहीं से भी खोज निकालना।

इसके बाद ये दोनों लंदन के ब्रटिश इंटेलिजेंस अरमान (सुमित ठाकुर) और मल्लिका सूद (अंगिरा धार) से मिलते जो इस मिशन के को पूरा करने में उनका मदद करता है। अब यहां से शुरु होता है चूहे-बिल्ली का खेल। जहां ये भातरीय एजेंट बुराक को खोजने में जी-जीन लगा रहे होते हैं वहीं बुराक को पहले सा ही इनकी हर चाल खबर होती है। अब इस चूहे-बिल्ली के खेल की किसीकी हार होती है और किसकी जीत, इसके लिए तो आपको सिनेघर तक जाना ही पड़ेगा।  

विद्युत जामवाल ने एक्शन सीन्स को लेकर खोले कई राज, देखें Video

एक्टिंग
बात करें विद्युत जामवाल के एक्टिंग करियर की तो उन्होंने अभी तक चार फिल्में की हैं और सारी ही कामोंडी की फ्रैंचाइजी है। विद्युत की एक्टिंग की बात करें तो वह फिल्म में कुछ खास जान नहीं डाल पाए हैं। इसलिए फिल्म निर्देशक ने फिल्म में एक्शन सीन्स पर ज्यादा जोर दिया है। बात करें एक्ट्रेसेस अदा शर्मा और अंगीरा धर की एक्टिंग की बात करें तो दोनों ने ही अपनी तरफ से पूरी मेहनत की लेकिन कहीं न कही उनकी मेहनत पर्दे पर दर्शकों को बिल्कुल भी पंसद नहीं आई। हमने बॉलीवुड में कई सारी फिल्में देखी हैं जो आंतकवाद की काली सच्चाई दिखाती हैं लेकिन इस फिल्म में कोई खास नयापन नहीं है। विद्युत मार्शल आर्ट्स के खिलाड़ी तो हैं पर फिल्म में वह उसके सटीक नहीं बैठ पा रहे हैं। 

डायरेक्शन 
बात की जाए फिल्म के पहले हाफ की तो फिल्म में कुछ खास मजा नहीं आया। फिल्म में हिंदू-मुस्लिम बगावत,धर्म परिवर्तन और देशभक्ति सब कुछ है लेकिन फिर भी आदित्य दत्त फिल्म में कुछ खास मजा नहां दे पाएं है। ये एक एक्शन फिल्म है फिर भी फिल्म एक्शन कोरियोग्राफी भी कोई दम नहीं बना पाई है। बात करें VFX तो वह भी बकवास है, मानों सब कुछ नकली हो। 

देखें या न देखें 
ये फिल्म कुछ नयापन नहीं परोस पाई है। यह फिल्म आतंकवाद पर बनाई गई है और ये इस मुद्दे के बीच ही फस कर रह गई है। ये फिल्म कुछ नया नहीं दिखा पाई। ये फिल्म बस विद्युत जामवाल के फैंस के लिए है जो उनकी एक्टिंग के पीछे पागल हैं।

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