Thursday, Oct 28, 2021
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Exclusive: महामारी के दौर में मदद करना नहीं था आसान- आनंद पंडित

  • Updated on 6/7/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना महामारी में बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई चेहरों ने मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है। इन्हीं चेहरों में एक चेहरा है 'बिग बुल' और 'चेहरे' के प्रोड्यूसर आनंद पंडित (Anand Pandit) का जिन्होंने इस महामारी से लड़ने के लिए एक वन मैन आर्मी की तरह शुरुआत की लेकिन जैसे-जैसे वो आगे बढ़ते गए कई और चेहरे उनसे जुड़ते गए। इसी बीच आनंद पंडित ने पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स से खास बातचीत की और कई बातों पर रोशनी डाली। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

ग्राउंड में आने वाली परेशानियों को समझता हूं 
मैं एक ही बात मानता हूं कि अगर ऊपर वाले ने हमें कुछ दिया है, समाज ने हमें कुछ दिया है तो समय आ गया है कि अब हम उनके लिए कुछ करें। ऐसा मौका हमें दोबारा नहीं मिलेगा जहां हम लोगों की मदद कर सकते हैं। इस स्थिति को समझते हुए और लोगों की तकलीफें देखते हुए मैंने सोचा कि जो हम कर सकते हैं वो सब हमें करना चाहिए। पिछले साल जब महामारी आई तब हमने 1000 लोगों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाकर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को दिए थे जिसका इस्तेमाल आज भी किया जा रहा है। इसके साथ ही हमने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री और रियल स्टेट में काम करने वाले मजदूरों को राशन भी बांटा, उनका ख्याल रखा और उन्हें मेंटली सपोर्ट किया।

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कोरोना की दूसरी लहर में इंडस्ट्री के बड़े चेहरों ने बढ़ाया मदद का हाथ
कोरोना की जब दूसरी लहर आई तब हमने अजय देवगन के साथ मिलकर 20 बेड का आईसीयू हॉस्पिटल खड़ा किया और बीएमसी को दिया। इसके बाद एक-एक करके इंडस्ट्री के लोग हमसे जुड़ने लगे और मदद के लिए आगे आने लगे। अमिताभ बच्चन भी पहले से ही लोगों की मदद के लिए कुछ करना चाहते थे, तो हमने उनके साथ मिलकर जुहू में ऑक्सीजन की सुविधा के साथ 25 बेड का कोविड सेंटर शुरू किया जिसे उन्होंने ही स्पॉन्सर किया।

मदद करना भी नहीं था आसान
महामारी के दौरान हॉस्पिटल खड़ा करना आसान नहीं होता, हमारे लिए भी ये मुश्किलों से भरा था। फिल्म इंडस्ट्री से कई बड़े चेहरों का मेरे पास फोन आया कि वो इस महामारी में लोगों की मदद करना चाहते हैं। मैं रियल स्टेट से भी जुड़ा हुआ हूं इसलिए मैं ग्राउंड में आने वाली परेशानियों को समझता हूं। इन परेशानियों को कम करने के लिए हमने एक काम किया जो हमारे लिए काफी मददगार साबित हुआ और वो था स्कूल, कॉलेज और बैंकेट हॉल का इस्तेमाल। इन जगहों को हमने हॉस्पिटल और आइसोलेशन सेंटर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जिससे कि काम तेजी में हो सके और लोगों तक मदद जल्दी से जल्दी पहुंचाई जा सके।

बॉलीवुड को करना चाहिए अभी और इंतेजार
कोरोना से हर एक फैमिली, हर एक सोसाइटी, हर एक इंडस्ट्री को नुकसान हुआ है जिसमें से बॉलीवुड भी एक है। बॉलीवुड में काम करने का एक अलग तरीका होता है जहां सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करना मुश्किल होता है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए बॉलीवुड का काम देर से ही शुरू करना ठीक होगा। इसके साथ ही हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि जब भी ये शुरुआत हो, उस दौरान बहुत ही सख्त पॉलिसी होनी चाहिए, नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए वरना फिर से ये महामारी लोगों को परेशान करेगी।

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इस महामारी में ओटीटी को बनाई अपनी जगह
इस खराब स्थिति में एक जो अच्छी चीज हुई है वो है ओटीटी को अपनी जगह मिलना। इस महामारी के दौरान ओटीटी ने अपनी वो जगह बना ली है जो सामान्य स्थिति में बनाने में काफी समय लग जाता। ओटीटी आने से इंडस्ट्री और बड़ी हो रही है और लोगों को ज्यादा काम मिल रहा है। इससे एक नई स्ट्रीम को जन्म मिल गया है जो कि इसकी खास बात है। एक और अच्छी बात ये है कि ओटीटी और थिएटर दोनों एक दूसरे को कॉम्प्लीमेंट करते हैं। ओटीटी के आने से फिल्म मेकिंग के एक और तरीके की शुरुआत हो गई है।

थिएटर में रिलीज करना चाहते हैं 'चेहरे'
फिल्म 'बिग बुल' की शूटिंग हम पहले ही कर चुके थे, वो थिएटर में रिलीज होती तो भी सुपरहिट होती, लेकिन मैंने और अजय देवगन ने इसे ओटीटी पर रिलीज करने का फैसला लिया और यहां भी इसे बहुत ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म 'चहरे' को हम अभी भी थिएटर में रिलीज करना चाहते हैं इसलिए इसे फिल्हाल थोड़ा होल्ड किया हुआ है, अब आगे क्या फैसला होता है ये स्थिति पर निर्भर करेगा।

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