Monday, Jan 24, 2022
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Review: मां बेटी के मासूम रिश्ते से सजी है 'नील बट्टे सन्नाटा'

  • Updated on 4/22/2016

Navodayatimesनई दिल्ली (टीम डिजिटल)।  'नील बट्टे सन्नाटा' के जरिए अश्विनी अय्यर तिवारी फिल्म डायरेक्टर भी बन गई हैं। अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी के हिस्सों को छू जाने वाली फिल्मों को पसंद करते हैं, तो ये फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी।

फिल्म में रोहन विनायक ने अच्छा म्यूजिक दिया है। फिल्म के गाने, कहानी के साथ अच्छे से मैच करते हैं। वहीं अश्विनी अय्यर तिवारी ने शॉट्स के लिए लोकेशन्स का अच्छे से यूज किया है। एक कामवाली बाई के घर से लेकर स्कूल और गली के सीन्स को अश्विनी ने काफी अच्छे से फिल्माया है।

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एक मां के किरदार में स्वरा भास्कर ने बेहतरीन एक्टिंग की है। वहीं बेटी के किरदार में रिया शुक्ला ने भी कहानी के हिसाब से बहुत अच्छी परफॉर्मेंस दी है।

Navodayatimesकहानी
फिल्म की कहानी एक मां चंदा सहाय (स्वरा भास्कर) और उसकी बेटी अपेक्षा उर्फ अप्पू (रिया शुक्ला) की है। चंदा एक नौकरानी है जो चमड़े के जूते की फैक्ट्री में भी काम करती है जिससे उसकी बेटी के स्कूल की पढ़ाई और घर का खर्च चल सके।

लेकिन अप्पू का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता और खास तौर से उसका मैथ्स में डब्बा गुल है जिसकी वजह से चंदा काफी परेशान रहती है। इसलिए वो अपनी बेटी को मैथ्स में अव्वल बनाने के लिए खुद 10वीं में दाखिला लेती है, ताकि वो अपनी बेटी की मैथ्स में मदद कर सके। लेकिन यह बात अपेक्षा को अच्छी नहीं लगती। मां और बेटी के बीच पढ़ाई के लेकर कॉम्पीटिशन होने लगता है। जिसमें कभी मां तो कभी बेटी की जीत होती है।

अब क्या चंदा की इतनी सारी कोशिशे अप्पू को समझा पाने में कामयाब होती है और क्या अप्पू पढ़ाई के लिए सीरियस हो पाती है ...ये तो आपको सिनेमाघरो में जाकर ही पता चलेगा।

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