Friday, Dec 02, 2022
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indian folk singer kailash kher is celebrating his 45th birthday

B'dy Spcl- फोक गायक 'कैलाश खेर' के बर्थडे पर जानिए उनके संघर्ष की कुछ अनकही बातें

  • Updated on 7/7/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारतीय गायकों की लिस्ट में एक नाम ऐसा है जिसने अपने फोक गानों के दम पर पूरे हिंदुस्तान को अपना दिवाना लिया। जी हां हम बात कर रहे हैं फोक गीतों के सरताज कैलाश खेर (Kailash kher) की जो आज अपना 45वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इंडस्ट्री में जब भी कोई फोक गीत की बात होती है तो उसमें कैलाश खेर के गीतों को काफी महत्व दिया जाता है।

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जानिए उनके संघर्ष की कहानी 
दिल छू देने वाले कैलाथ खेर के गीत बूढ़ों से लेकर आज के युवाओं तक सभी को भाते हैं और अगर कोई प्यार में है तो उनके लिए कैलाश के गीत उनके इमोशन्स को जाहिर करने वाले बन जाते हैं। आज जिन बुलंदियों पर कैलाश खेर हैं उन तक पहुंचने के लिए इस अद्भुत गायक को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, एक समय था जब कैलाश के पास उनका संगीत तो था लेकिन जेब में पैसे नहीं थे। तो उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताते हैं उनके जीवन के संघर्ष की दास्तान।

कैलाश खेर को संगीत मानों विरासत में मिली हो। उनके पिता पंडित 'मेहर सिंह खेर' पुजारी थे और अक्सर घरों में होने वाले इवेंट में ट्रेडिशनल फोक सॉन्ग गाया करते थे। कैलाश ने बचपन में पिता से ही संगीत की शिक्षा ले ली थी। लेकिन वे कभी भी बॉलीवुड गाने सुनना पसंद नहीं करते थे और ना ही सुना करते थे पर उनको संगीत से लगाव काफी था। 

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संगीत सीखने के लिए घर से की थी बगावत 
कैलाश जब 13 साल के थे तभी वो संगीत की बेहतर शिक्षा लेने के लिए घरवालों से लड़कर दिल्ली आ गए थे। यहां आकर उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी, लेकिन साथ में पैसे कमाने के लिए छोटा सा काम भी शुरू कर दिया। बता दें विदेशी लोगों को संगीत सिखाकर कैलाश पैसे कमाते थे।

बिजनेस में घाटा होने पर करना चाहते थे सुसाइड 
दिल्ली में रहते हुए 1999 तक कैलाश खेर ने अपने एक फैमिली फ्रेंड के साथ एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरु किया। इसी साल उन्हें इस कारोबार में इतना बड़ा घाटा हुआ जिसमें वह अपनी सारी जमा पूंजी गंवा चुके थे। उस वक्त कैलाश इतने डिप्रेशन में चले गए थे कि वो जिंदगी से तंग आकर सुसाइड करना चाहते थे। इन सब से किसी तरह से निकलने के बाद कैलाश पैसे कमाने के लिए सिंगापुर और थाइलैंड चले गए। जहां 6 महीने रहने के बाद वो वापस भारत आकर ऋषिकेश चले गए और कुछ दिनों तक वहीं रहे। वहां वे साधू-संतो के लिए गाना गाया करते थे। कैलाश के गाने सुनकर बड़े से बड़ा संत झूम उठता था, इससे कैलाश का खोया विश्वास वापस आया और वह मुंबई चले आए।

मुंबई आने के बाद कैलाश ने काफी गरीबी में दिन गुजारें।  कैलाश वहां चॉल में रहते थे। उनके हालात कैसे थे वो इसी बात से पता चलता है कि उनके पास पहनने के लिए एक सही चप्पल भी नहीं थी। वह एक टूटी चप्पल ले 24 घंटे स्टूडियो के चक्कर लगाते रहते ताकि कोई तो उनकी आवाज को सुन उनको गाने का मौका दे दे।

एक दिन उन्हें राम संपत ने एक ऐड का जिंगल गाने के लिए बुलाया, जिसके लिए उन्हें 5000 रुपए मिले। तब पांच हजार रुपए भी कैलाश को बहुत ज्यादा लगे और इनसे उनका कुछ दिन का काम चल गया। 'अल्ला के बंदे हम' ने उनको एक अलग पहचान दिलाई।

कैलाश के मुंबई में कई सालों तक स्ट्रगल करने के बाद फिल्म अंदाज से उन्हें ब्रेक मिला। इस फिल्म में कैलाश ने 'रब्बा इश्क ना होवे' में अपनी आवाज दी। लेकिन कैलाश की किस्मत का तारा तब चमका जब उन्होंने फिल्म वैसा भी होता है में 'अल्ला के बंदे हम' गाने में अपनी आवाज दी। ये गाना आजतक कैलाश के हिट गानों में से एक है।

18 भाषाओं में गाए गानें 
कैलाश खेर अब तक 18 भाषाओं में गाने गा चुके हैं। 300 से अधिक गाने कैलाश ने सिर्फ बॉलीवुड में गाए हैं। कैलाश को अपने गानों के लिए दर्जनों अवार्ड मिल चुके हैं। कैलाश खेर ने 2009 में मुंबई बेस्ड शीतल से शादी की। आज उनका एक चार साल का बेटा है, जिसका नाम कबीर है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Kabir edited this picture.. #happyfathersday

A post shared by Kailash Kher (@kailashkher) on Jun 16, 2019 at 3:38am PDT

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