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जानकी नवमी आज: सीता के जन्मदिवस पर ही दूरदर्शन पर धरती में समाएंगी सीता

  • Updated on 5/2/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। शनिवार को वैसाख नवमी के दिन को सीता नवमी के तौर पर भी मनाया जाता है। माना जाता है कि आज ही के दिन जनकपुरी के राजा जनक के हल से टकरा कर खेत में गड़े घड़ें में सीता जी निकली थी। जिन्हें बाद में राजा जनक ने जनक नंदिनी सीता के तौर पर राजकुमारी की तरह पाला-पोसा था। मगर दूरदर्शन पर मार्च में शुरु की गई रामायण में आज ही सीता के वापस धरती में समाने का एपिसोड टेलीकास्ट किया जाएगा।

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वैसाख में शुक्ल पक्ष की नवमी होती है जानकी नवमी
वैसाख माह की नवमी तिथि को जानकी नवमी के तौर पर मनाया जाता है। सीता के जन्म के विषय में भी कई सारी कहानियां और दंत कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि रावण वन में तपस्या करने वाले ऋषियों और मुनियों से कर के तौर पर खून को जमा करता था। इसी रक्त को घड़े में भर कर ऋषियों ने खेत में गाड़ दिया था। इसी घड़े से टकराने से सीता का जन्म हुआ था। इसीलिए उन्हें भूमि सुता भी कहा गया। हालांकि उनका नाम सीता रखने पीछे भी यही कारण माना जाता है। हल की नोंक को संस्कृत में सीता कहा जाता है। इससे टकराने से सीता का जन्म हुआ था। लिहाजा उनका नाम ही सीता रख दिया गया।

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रामायण में प्रसारित होगा सीता के वापस धरती में समाने का चित्रांकन
दूरदर्शन पर 34 सालों बाद दोबारा रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण किया गया। इस धारावाहिक के बाद उत्तर रामायण का प्रसारण किया गया है। आज इस धारावाहिक का आखिरी एपिसोड प्रसारित किया जाएगा। इसी किश्त में सीता वापस धरती में ही समा जाएंगी। लिहाजा अपने जन्म दिन के दिन ही सीता जी के वापस धरती में समाने के एपीसोड का प्रसारण किया जाएगा। धारावाहिक में सीता और राम का किरदार निभा रहे अरुण गोविल और दीपिका चिकलिया इतने ज्यादा लोकप्रिय हो चुके हैं कि कई मंदिरों में आज भी भगवान की तस्वीरों में इन्हीं का चेहरा लगा मिल जाता है।

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सीता की पूजा करने से दूर होते हैंं सभी कष्ट
पंडित संजीव शर्मा बताते हैं कि इस दिन माता सीता की आराधना करने और व्रत रखने से अद्भुत फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सच्चे दिल से सीता की पूजा करने वालों के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। जानकी नवमी पर भगवान राम और सीता की एकसाथ पूजा करने से तरक्की मिलती है। राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से भगवान राम स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।

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