Friday, Sep 30, 2022
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कंगना रनौत की बढ़ी मुश्किले, कोर्ट ने दिया FIR दर्ज करने का आदेश

  • Updated on 10/10/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) एक बार फिर से कानूनी पचड़े में फंसती हुई नजर आ रही है। कर्नाटक के एक कोर्ट ने शुक्रवार को पुलिस को आदेश दिया कि वो कंगना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।

कोर्ट ने सुनाया फैसला
आपको बता दें कि हाल ही में पास हुए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसान के खिलाफ कंगना ने ट्वीट किया था।उसी ट्वीट के खिलाफ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) की अदालत ने वकील रमेश नाइक ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसपर कोर्ट ने फैसला सुनाया है।

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कंगना ने किया था ये ट्वीट
कंगना ने ट्वीट करते हुए लिखा प्रधानमंत्री जी कोई सो रहा हो उसे जगाया जा सकता है, जिसे गलतफहमी हो उसे समझाया जा सकता है मगर जो सोने की ऐक्टिंग करे, नासमझने की ऐक्टिंग करे उसे आपके समझाने से क्या फर्क पड़ेगा? ये वही आतंकी हैं CAA से एक भी इंसान की सिटिजेन्शिप नहीं गयी मगर इन्होंने खून की नदियां बहा दी।

उन्होंने आगे लिखा कि जैसे श्री कृष्ण की नारायणी सेना थी, वैसे ही पप्पु की भी अपनी एक चंपू सेना है जो की सिर्फ अफवाहों के दम पे लड़ना जानती है, यह है मेरा अरिजिनल ट्वीट अगर कोई यह सिद्ध करदे की मैंने किसानों को आतंकी कहा, मैं माफी मांगकर हमेशा केलिए ट्विटर छोड़ दूंगी।

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जानें क्या है ये बिल
इस किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020 में किसान और व्‍यापारी विभिन्‍न राज्‍य कृषि उपज विपणन विधानों के तहत अधिसूचित बाजारों के भौतिक परिसरों या सम-बाजारों से बाहर पारदर्शी और बाधारहित प्रतिस्‍पर्धी वैकल्पिक व्‍यापार चैनलों के माध्‍यम से किसानों की उपज की खरीद और बिक्री लाभदायक मूल्‍यों पर करने से संबंधित चयन की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 में कृषि समझौतों पर राष्‍ट्रीय ढांचे के लिए प्रावधान है, जो किसानों को कृषि व्‍यापार फर्मों, प्रोसेसरों, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों या बड़े खुदरा विक्रेताओं के साथ कृषि सेवाओं और एक उचित तथा पारदर्शी तरीके से आपसी सहमति वाला लाभदायक मूल्‍य ढांचा उपलब्ध कराता है। 

इन पार्टियों ने लिया विरोध प्रदर्शन में हिस्सा
बिल के विरोध में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा, द्रमुक, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा, 'कांग्रेस और समान विचार वाले दलों के सभी सांसदों ने किसान विरोधी और मजदूर विरोधी विधेयकों के खिलाफ गांधी प्रतिमा से अंबेडकर प्रतिमा तक विरोध प्रदर्शन किया जिन्हें मोदी सरकार ने अलोकतांत्रिक ढंग से संसद में पारित कराया।'

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