Thursday, Apr 02, 2020

प्यार की एक अनूठी कहानी बयां करेगी 'मिर्जया', देखें Video

  • Updated on 6/9/2016

Navodayatimesनई दिल्ली (उषा खोखर)। राकेश ओमप्रकाश मेहरा ऐसे निर्देशक हैं जो अपनी कहानियों से लोगों के दिलों में न सिर्फ उतर जाते हैं, बल्कि दर्शकों के मन में कुछ सवाल भी छोड़ जाते हैं।

जहां वह फिल्म ‘रंग दे बंसती’ से देश के भ्रष्टाचार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते नजर आते हैं, तो दूसरी तरफ वह ओलंपियन मिल्खा सिंह के जीवन और उनके संघर्ष को खूबसूरती से पर्दे पर उतारते हैं। ओमप्रकाश मेहरा अब लेखक/फिल्ममेकर गुलजार के शब्दों से सजी फिल्म ‘मिर्जिया’ लेकर आ रहे हैं। ‘मिर्जिया’ पंजाब की लोककथा मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी पर आधारित है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी से खास बातचीत की। 

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जो दुनिया से पाया उसे लौटा रहा हूं... 
अपनी फिल्मों की कहानियों के चुनाव के सवाल पर मेहरा बताते हैं, ‘मेरी फिल्मों की कहानियां कहीं न कहीं मेरे ही जीवन से जुड़ी हुई हैं। मिल्खा सिंह के जीवन पर फिल्म बनाने का खयाल मेरे मन में यों ही नहीं आया। मैंने बचपन से सिर्फ दो लोगों का नाम सुना था -मिल्खा सिंह और दारा सिंह।

ठीक वैसे ही ‘मिर्जिया’ की कहानी आज से नहीं, कॉलेज के दिनों से मेरे दिमाग में थी। मुझे हमेशा से एक सवाल परेशान करता था कि आखिर साहिबा ने मिर्जा के तीर क्यों तोड़े? मैंने जब कॉलेज में ये नाटक देखा था, तभी से यह सवाल मेरे जेहन में था।

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फिर एक दिन मैंने गुलजार साहब से कहा कि इसका जवाब ढूंढ़ते हैं तभी से मैं इस कहानी पर काम कर रहा था। साहिर का शेर है-जो दुनिया से पाया है बस वही लौटा रहा हूं। मेरी सभी फिल्मों की कहानियां कहीं न कहीं मेरे अनुभवों या जो मैंने देखा है, उसी को अपने नजरिए से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करता हूं। 

साहिबा की दिलेरी मन को भा गई
जब राकेश मेहरा से पूछा गया कि उन्होंने इसी प्रेम कहानी को क्यों चुना फिल्मी पर्दे पर उतारने के लिए तो उन्होंने कहा, ‘इस प्रेम कहानी के किरदार बेहद अलग हैं। जहां इसमें एक गहरा प्यार है तो वहीं इसमें बगावत भी है।

इसमें मिर्जा बेहतरीन घुड़सवार है और बेहतर तीरंदाजी जानता है, वहीं साहिबा भी शक्तिशाली किरदार है। वह नाजुक और छुईमुई नहीं है, वह अपने प्यार के लिए सारे जहां से बगावत कर जाती है।  

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Navodayatimesमोदी का स्किल इंडिया एक अच्छा कदम 
ओमप्रकाश मेहरा भले ही देश की शिक्षा पद्धति से बहुत खुश नहीं हैं लेकिन वह मोदी सरकार के ‘स्किल इंडिया कैंपेन’ से प्रभावित  हैं। उनका कहना है, ‘मैं मोदी जी के स्किल इंडिया कैंपेन को बेहतरीन कदम मानता हूं। इसके जरिये वह देश में खोते जा रहे स्किल को  नया जीवन देने की कोशिश कर रहे हैं।

देश में डिग्री के अलावा हाथों का स्किल होना भी जरूरी है। इससे हमारे देश के खोते जा रहे कौशल को बचाया जा सकता है। हमारा देश कृषि प्रधान है, ऐसे में इससे जुड़ा और हाथ की कारीगिरी को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाना और आगे आना हिम्मत की बात है। 

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प्रेम को बस कृष्ण ने ही समझा
फिल्म ‘मिर्जिया’ की प्रेम कहानी में जातिवाद और ऑनर किलिंग नजर आती है। इसे लेकर  मेहरा का कहना है कि हमें हमारे बुजुर्गों ने कुछ चीजें अच्छी दी हैं तो कुछ बुरी भी। इन बुरी चीजों में जातिवाद भी एक है। इस मामले में मैं भगवान कृष्ण को सबसे ज्यादा मजबूत व्यक्तित्व का धनी मानता हूं।

उन्होंने जहां दुनिया को एक तरफ सही राह पर चलने का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर लोगों को प्यार का संदेश भी दिया। 
वह सिर्फ इंसान को किसी रेस में भागने को नहीं कहते, वह जिंदगी के हर पहलू को जीने की पैरवी करते नजर आते हैं।

इसके अलावा वह बेहद गहन प्रेमी भी हैं। उन्होंने सही मायनों में प्यार को समझा है और लोगों के समक्ष उदाहरण पेश किया है। 

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