Thursday, Apr 02, 2020

‘मरता नहीं कभी इश्क ओ मिर्जा... 'मिर्जया' देखने से पहले पढ़ें Review

  • Updated on 10/7/2016
  • Author : Usha Khokhar

Navodayatimesनई दिल्ली(टीम डिजिटल): हिंदी सिनेमा को 'रंग दे बंसती’ और 'भाग मिल्खा भाग' अद्भुत फिल्में देने वाले राकेश ओमप्रकाश मेहरा दर्शकों के लिए एक खास फिल्म लेकर आए हैं। इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर इश्क की सदियों पुरानी 'मिर्जा और साहिबा' की प्रेम कहानी दिखी। फिल्म 'मिर्जया' की स्टार कास्ट से लेकर कॉस्ट्यूम और लोकेशन्स पर मेहरा ने खूब मेहनत की है और वो आपको फिल्म में भी दिखाई देगा। 

कहानी 

फिल्म की कहानी उस लोहार गली से शुरू होती है जहां हर एक पल लोहा जलती आग में दहकता रहता है ठीक वैसे ही जैसे कोई आशिक इश्क की आग में जलता है। इसी के साथ ओमपुरी अपनी बुलंद आवाज में कहते हैं , 'लोहारों की गली है ये, ये गली है लोहारों की, हमेशा दहका करती है...यहां पर गरम लोहा जब पिघलता है, सुनहरी आग बहती है कभी चिंगारियां उड़ती हैं भट्ठी से कि जैसे वक्त मुट्ठी खोल कर लमहे उड़ाता है।'

'मिर्जया' के लिए घर छोड़ने को तैयार हो गए थे सैयामी-हर्ष!

इसी ठीक बाद आता है मिर्जा और साहिबा की कहानी का एक दृश्य जिसमें मिर्जा को साहिबा के भाइयों से लड़ता दिखता है। असल मिर्जा- साहिबा की कहानी जब तक पर्दे पर दिखती है तो स्क्रीन से नजरे हटाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन जैसे ही सुचित्रा और मुनीष उर्फ आदिल की कहानी शुरू होती है आप खुद को कहानी से कटा हुआ महसूस करने लगते हैं। 

Navodayatimesसुचि और आदिल की कहानी बचपन से शुरू से होती है जो एक घटना के बाद एक दूसरे से बिछड़ जाते हैं और कई सालों बाद जवानी में मिलते हैं। आदिल पहले से ही जानता है कि वो उसका बचपन का प्यार है जो कई साल बाद देश लौटा है लेकिन सुचि उसे पहचान नहीं पाती। कुछ वक्त बीतने के बाद आदिल उसे बताता है कि वही मुनीष है जिसने उस हादसे के बाद अपना नाम बदल लिया। वहीं इसी बीच सुचि की शादी एक प्रिंस से तय हो जाती है। बस यहीं से आदिल सूचि, इस जमाने में भी मिर्जा और साहिबा की कहानी दोहराने लगते हैं और ऑनर किलिंग का शिकार हो जाते हैं। 

अभिनय

इस फिल्म से अनिल कपूर के लाडले हर्षवर्धन कपूर और सैयामी खेर अपनी बॉलीवुड की पारी की शुरुआत कर रहे हैं। पहले फिल्म के हिसाब से दोनों का ठीक-ठाक रहा। फिल्म के कई सीन ऐसे रहे जिसमें इन दोनों का अभिनय अपको निराश करता भी दिखेगा। लेकिन अंजली पाटिल और अनुज चौधरी ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। फिल्म में भले ही अंजली का किरदार छोटा सा है लेकिन वो अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। 

प्यार की एक अनूठी कहानी बयां करेगी 'मिर्जया', देखें Video

संगीत

फिल्म का सबसे खास हिस्सा है इसका संगीत। फिल्म में करीब 15 छोटे-बड़े गाने हैं। फिल्म में आधी कहानी को गीतों के माध्यम से बताया गया है। गुलजार साहब ने प्यार के हर जज्बात को बखूबी शब्दों में पिरोया है। शंकर एहसान और लॉय ने भी अपना काम अच्छा किया है। वहीं, दिलेर महंदी, नूरान सिस्टर्स और शंकर ने अपनी बुलंद आवाज से नई जान भर दी है।

क्यों देखें

अगर आप ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन को पसंद करते हैं तो आप फिल्म देख सकते हैं। इस में भी आपको दो कहानियां एक साथ दिखेंगी जिसमें एक कहानी पिछले दौर की कहानी बताएगी व दूसरी आज के दौर की। पिछले वक्त की कहानी को बिना किसी डायलॉग के भी मेहरा ने बखूबी पर्दे पर उतारा है और उससे नजर हटाना बेहद मुश्किल है। साथ ही इसमें आप बेहद संजीदा और रूह को छू लेने वाला संगीत मिलेगा। लेकिन अगर आप किसी हार्ड कोर रोमांटिक और इमोशनल फिल्म के इंतजार में हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है और आपको निराशा ही हाथ लगेगी। 

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