Sunday, May 22, 2022
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REVIEW: पति- पत्नी के प्यार और समाज की कुरीतियों से संघर्ष की कहानी है 'जयेशभाई जोरदार'

  • Updated on 5/13/2022

फिल्म : जयेशभाई जोरदार (Jayeshbhai Jordaar) 
निर्देशक : दिव्यांग ठक्कर (Divyang Thakkar) 
कलाकार : रणवीर सिंह (Ranveer Singh), शालिनी पांडे (Shalini Pandey), रत्ना पाठक शाह (Ratna Pathak shah), बोमन ईरानी (Boman Irani) 
रेटिंग : 4/5

ज्योत्सना रावत। बॉलीवुड में अपने अतरंगी फैशन के साथ-साथ अपनी दमदार एक्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता रणवीर सिंह फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' को लेकर चर्चा में हैं। फैंस उनकी इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब ये इंतजार खत्म हो चुका है। फिल्म आज यानी की 13 मई तो सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

दिव्यांग ठक्कर के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म गुजरात की पृष्‍ठभम‍ि पर आधारित है। यशराज बैनर की यह फिल्म भ्रूण हत्या और जेंडर इक्वालिटी जैसे बड़े सामाजिक मुद्दों पर बनी है। फिल्म में रणवीर सिंह एक ऐसे शख्स का रोल निभा रहे हैं, जो समाज में स्त्री-पुरुष के बराबर अधिकारों के लिए लड़ता है। फिल्म में इतने बड़े सोशल मैसेज को कॉमेडी के तड़के के साथ परोसा गया है।

कहानी 
बोमन ईरानी गांव के सरपंच हैं उनका इकलौता बेटा जयेशभाई जोरदार (Ranveer singh) है। जयेशभाई की एक बेटी है लेकिन फैमिली को वंश बढ़ाने के लिए बेटे की चाह है। इसी बीच, जयेशभाई की बीवी मुद्रा (शालिनी पांडे) एक बार फिर प्रेग्नेंट हो जाती है। इस पर सरपंच की फैमिली जेंडर टेस्ट करवाती है। पता चलता है कि मुद्रा एक बार फिर बेटी को जन्म देने वाली है। अब जयेश के पिता भ्रूण हत्या का फैसला करते है। लेकिन जयेश भ्रूण हत्या नहीं होने देना चाहता। वह अपनी पत्नी और बेटी से बहुत प्यार करता है हालांकि अपने परिवार में किसी को दिखाता नहीं। इसके बाद उसे अपने परिवार का विरोध झेलना पड़ता है। इस विरोध के दौरान कहानी में कई ट्वीस्ट आते हैं। वह अपनी गर्भवती पत्नी और बेटी के साथ घर छोड़कर भाग जाता है। इसी बीच बहुत से उतार - चढ़ाव आते है। अब ये जानने के लिए कि इस लड़ाई में जीत किसकी होती है पिता की या जयेश भाई की, यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

एक्टिंग

रणवीर सिंह ने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है। वहीं शालिनी पांडे ने भी उनकी पत्नी के किरदार के साथ न्याय किया है। वहीं रत्ना पाठक शाह औऱ बोमन ईरानी जैसे मंझे हुए कलाकारों की उपस्थिति फिल्म को खास बनाती है। 

डायरेक्शन

फिल्म का संगीत काफी अच्छा है। वहीं सिनेमेटोग्राफी भी ठीक- ठाक है। फिल्म को और बेहतर बनाया जा सकता था कहीं -कहीं फिल्म ज्यादा लंबी लगती है।

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