Wednesday, Aug 10, 2022
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Review: चाहत, सत्ता और लत की कहानी है 'दास देव'

  • Updated on 4/27/2018
  • Author : Jyotsna Rawat

स्टार कास्ट: राहुल भट्ट,रिचा चड्ढा,अदिति राव हैदरी,सौरभ शुक्ला,विनीत सिंह

डायरेक्टर: सुधीर मिश्रा

रेटिंग: 3 स्टार 

नई दिल्ली/ ज्योत्सना रावत। सुधीर मिश्रा के निर्देशन में बनीं फिल्म ‘दास-देव’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है।मशहूर बंगाली साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के कालजयी उपन्यास ‘देवदास’ के जितने रूप फिल्मों पर आए हैं, उतने शायद ही किसी और साहित्यिक रचना के आए होंगे। हिंदी सिनेमा में देवदास को अलग-अलग वक्त और अंदाज में पर्दे पर उतारा जा चुका है।

 

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अब देवदास को नए कलेवर में पेश किया गया है, जिसका टाइटल ‘दासदेव’ रखा गया है, जिसमें बॉलीवुड के उम्दा कलाकार सौरभ शुक्ला के साथ अभिनेत्री ऋचा चड्ढा, अदिति राव हैदरी और राहुल भट्ट दिखेंगे। 

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'दास-देव' एक रोमांटिक राजनीतिक थ्रिलर फिल्म है। फिल्म में पारो, देव और चांदनी के लव ट्राएंगल को दिखाया है। इसके साथ ही राहुल और अदिति के कई इंटिमेंट सीन भी है। 

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राहुल भट्ट ने देव के किरदार को अपने बेहतरीन अभिनय से सजा दिया है। रिचा चड्डा और अदिति राव ने भी अपने किरदारो के साथ पूरा न्याय किया है। रही बात सौरव शुक्ला की तो उन्होंने हमेशा की तरह इस बार भी बहुत अच्छी एक्टिंग की है।इनके अलावा विनीत सिंह, दीपराज राणा, दलीप ताहिल जैसे सभी कलाकारों ने अपने किरदारों में जान डालकर कहानी को विश्वसनीय बनाया है। मेहमान कलाकार के रूप में अनुराग कश्यप मजबूत रहे हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है।  

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कहानी 

फिल्म की कहानी यूपी की है, देव (राहुल भट्ट) बहुत छोटा था, जब एक हेलीकॉप्टर हादसे में उसके पिता (अनुराग कश्यप) की मौत हो जाती है। देव को उसके मुख्यमंत्री चाचा अवधेश (सौरव शुक्ला) ने पाल-पोसकर बड़ा किया है। फिल्म में पारो यानी की रिचा देव की बीवी बनना चाहती है। देव राजनीतिक घराने का उत्तराधिकारी है और वह अपने परिवार की विरासत को संभालने की जिम्मेदारी लेता है, लेकिन इसी दौरान उसे अपने प्यार के कारण कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। देव नशे और अय्याशी का आदि भी है लेकिन पारो देव को नशे और नकारेपन से निकालने की कोशिश करती है।  

 

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खानदान की राजनीतिक विरासत को आगे संभालने के लिए चांदनी (अदिति राव हैदरी) को लाया जाता है, जो देव से प्यार करने लगती है। चांदनी राजनेताओं को भी खुश रखने का काम करती है। चांदनी कुछ ऐसी चाल चलती है कि देव को राजनीति की बागडोर हाथ में लेनी पड़ती है, मगर इस चाल की वजह से पारो और देव के बीच टकराव होता है और अपने आदर्शों और गरिमा को हमेशा ऊंचा रखनेवाली पारो विपक्ष के नेता (विपिन शर्मा) से शादी कर लेती है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है, देव, पारो और चांदनी के सामने बहुत पुराने- पुराने खुलासे होते चले जाते हैं। इन सबके बाद देव किसका होता है ये जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना पड़ेगा।

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