Thursday, Aug 16, 2018

B'day Special: कुछ एेसा था फूलन देवी का चंबल के जंगलों से लेकर राजनीति तक का सफर

  • Updated on 8/10/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कम उम्र में इतना दर्द सहने वाली फूलन देवी का जन्म आज ही के दिन यानि की 10 अगस्त 1963 में हुआ था। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव गोरहा में जन्मी फूलन देवी ने जिंदगी में काफी उतार-चढाव देखा। 11 साल की उम्र में उनकी शादी  35 साल बड़े आदमी से कर दि गई थी। 

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सेक्सुअल हराशमेंट के बाद छोड़ा पति को 

शादी के बाद फूलन के पति ने उनके साथ जोर-जबरदस्ती करने की कई बार कोशिश की जिसकी वजह से फूलन की तबीयत खराब रहने लगी। उसके बाद वह अपने मायके चली गईं। जब मायके से दुबारा अपने पति के घर लौटीं तो उनके पति ने दूसरी शादी कर रखी थी। पति और दूसरी पत्नी ने उन्हें घर में घुसने नही दिया। वापस गांव आकर वह पिता के साथ मजदूरी करने लगीं।  

ठाकुरों ने किया गैंग रेप 

फूलन देवी ने गरीबों का शोषण करने वाले दबंग ठाकुरों के खिलाफ मुहीम छेड़ दी, जिसके बाद उन्हें सामूहिक गैंग रेप का सामना करना पड़ा। मात्र 15 साल की कम उम्र उनके उनकी हिम्मत को तोड़ने के लिए गांव के ठाकुरों ने उनके साथ सामूहिक बलात्कर किया। उन्होंने फूलन को तीन हफ्तों तक बंदी बनाए रखा और उसका बलातकार करते रहे। यहां से किसी तरह बच निकलने के बाद फूलन डाकुओं के गैंग में शामिल हो गईं। 

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डकैतों ने किया रेप, डाकू से हुआ प्यार 

इस घटना के बाद फूलन ने दृह संकल्प लिया कि वह किसी भी कीमत पर उन लोगों से बदला लेंगी जिन्होंने उनको प्रताड़ित किया है। अभी वह इस कसमकश से जूझ ही रही थीं कि एक बार फिर से उनके साथ सामूहिक गैंग रेप हुआ। इस बार डैकतों ने गांव में पर हमला किया और फूलन को जंगल उठा ले गए। एक के बाद एक वह यौन हिंसा का शिकार होती रहीं। इस बीच फूलन की मुलाकात विक्रम मल्लाह से हुई और दोनों आकर्षण की डोर में बंध गए। समाज की प्रताड़ना से थक चुकी फूलन ने विक्रम के साथ मिलकर अपना अलग गैंग बनाया। 

फूलन का बदला

अब फूलन के हाथ में बंदूक भी थी और वह ताकतवर भी थीं। 1981 में वह पूरे देश में चर्चित हो गईं जब उन्होंने 22 सवर्ण जाति के लोगों को मौत के घाट उतार दिया। हालांकि फूलन ने हमेशा पूछे जाने पर इस घटना में अंजाम देने से इंकार किया।  

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मिर्जापुर से बनीं सांसद 

विक्रम मल्लाह की मुठभेड़ में जान चली गई, जिसके बाद उनका इकलौता सहारा छिन गया। ऐसे में जब 1983 में इंदिरा गांधी सरकार ने उनसे आत्मसमर्पण के लिए कहा तो वह तैयार हो गईं। हालांकि इसके लिए भी उन्होंने सरकार के सामने शर्त रखी। उनका शर्त था कि उन्हें या उनके किसी साथी को मृत्युदंड नहीं दिया जाए और सजा 8 साल से अधिक ना हो। सरकार ने फूलन की शर्ते मान लीं। 

11 साल तक फूलन जेल में रहीं। 1994 में मुलायम सरकार ने फूलन को रिहा किया और टिकट दिया। दो साल बाद फूलन ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर सीट से लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंच गईं।

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हत्या राजनीतिक साजिश या बदला 

वह एक आम जिंदगी जी रही थी, लेकिन तभी 2001 में शेर सिंह राणा नाम के व्यक्ति ने बदला लेने के उदेश्य से उनके घर पर ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। कहा जाता है राजनीति में फूलन देवी को उभरता हुआ देख कर उनके विरोधियों ने उनकी हत्या करा दी। उनकी हत्या में शामिल होने का आरोप पति उम्मेद सिंह पर भी लगा था। हालांकि यह साबित नहीं हो पाया।  

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