Monday, Sep 26, 2022
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सुशांत के परिवार ने शेयर की 9 पेज की चिट्ठी, कहा- मिल रही हैं धमकियां

  • Updated on 8/12/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। सुशांत सिंह राजपूत केस में रोजाना नए नए खुलासे हो रहे हैं। इन्हीं खुलसों के बीच सुशांत के परिवार ने 9 पेज की चिट्ठी जारी की है जिसमें उन्होंने कहा कि हमें धमकियां मिल रही हैं। 

जलालपुरी के शेर से हुई चिट्ठी की शुरूआत
चिट्ठी की शुरुआत फिराक जलालपुरी के शेर से की गई है। चिट्ठी में लिखा है- 'तू इधर-उधर की ना बात कर ये बता कि काफिला क्यूं लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं तेरी रहबरी का सवाल है।' इसके आगे लिखा है कि 'अखबार पर अपना नाम चमकाने की गरज से कई फर्जी दोस्त, भाई, मामा बन अपनी अपनी हांक रहे हैं। ऐसे में बताना जरूरी हो गया है कि आखिर ‘सुशांत का परिवार’ होने का मतलब क्या है?

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सुशांत के माता पिता कमाकर खाने वाले लोग थे। उनके हंसते खेलते पांच बच्चे थे। उनकी परवरिश ठीक हो इसलिए नब्बे के दशक में गांव से शहर आ गए। रोटी कमाने और बच्चों को पढ़ाने में जुट गए। एक आम भारतीय माता पिता की तरह उन्होंने मुश्किलें खुद झेली। बच्चों को किसी बात की कमी नहीं होने दी।'

देखें चिट्ठी

परिवार को लेकर कहा गया ये
चिट्ठी में आगे लिखा है कि 'पहली बेटी में जादू था। कोई आया और चुपके से उसे परियों के देश ले गया। दूसरी राष्ट्रीय टीम के लिए क्रिकेट खेली। तीसरे ने कानून की पढ़ाई की तो चौथे ने फैशन डिजाइन में डिप्लोमा किया। पांचवां सुशांत था। पूरी उम्र सुशांत के परिवार ने ना कभी किसी से कुछ लिया और ना कभी किसी का अहित किया।

सुशांत के परिवार को पहला झटका तब लगा जब मां असमय गुजर गईं। फैमिली मीटिंग में फैसला हुआ कि कोई ये ना कहे कि मां चली गई और परिवार बिखर गया, सो कुछ बड़ा किया जाए। सुशांत के सिनेमा में हीरो बनने की बात उसी दिन चली। अगले आठ दस साल में वो हुआ जो लोग सपनों में देखते हैं लेकिन अब जो हुआ है वो दुश्मन के साथ भी ना हो।

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बिना नाम लिए साधा इनपर निशाना
इसके बाद सुशांत के परिवार ने नाम लिए बगैर कुछ लोगों पर निशाना साधा और कहा, 'एक नामी आदमी को बदमाशों और लालचियों का झुंड घेर लेता है। इलाके के रखवाले को कहा जाता है कि बचाने में मदद करें। अंग्रेजो के वारिश हैं एक अदना हिंदुस्तानी मरे, इन्हें क्यों परवाह हो? चार महीने बाद सुशांत के परिवार का भय सही साबित होता है।

सुशांत के परिवार को कहते हैं कि तुम्हारा बच्चा पागल था। हमसे कहा जाता है कि ऐसा करो पांच दस मोटे मोटे लालों का नाम लिखवा दो, हम उसका भूत बना देंगे। सुशांत के परिवार को शोक मनाने का भी समय नहीं मिलता। हत्यारों को ढूंढ़ने के बजाय रखवाले उसके मृत शरीर की फोटो प्रदर्शनी लगाने लगते हैं। उनकी लापरवाही से सुशांत मरा। इतने से भी मन नहीं भरा तो मानसिक बीमारी की कहानी चला उसके चरित्र को मारने में जुट जाते हैं।

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