Tuesday, May 26, 2020

Live Updates: 63rd day of lockdown

Last Updated: Tue May 26 2020 10:47 AM

corona virus

Total Cases

145,354

Recovered

60,706

Deaths

4,174

  • INDIA145,354
  • MAHARASTRA52,667
  • TAMIL NADU17,082
  • GUJARAT14,468
  • NEW DELHI14,053
  • RAJASTHAN7,376
  • MADHYA PRADESH6,859
  • UTTAR PRADESH6,497
  • WEST BENGAL3,816
  • ANDHRA PRADESH2,886
  • BIHAR2,737
  • KARNATAKA2,182
  • PUNJAB2,081
  • TELANGANA1,920
  • JAMMU & KASHMIR1,668
  • ODISHA1,438
  • HARYANA1,213
  • KERALA897
  • ASSAM549
  • JHARKHAND405
  • UTTARAKHAND349
  • CHHATTISGARH292
  • CHANDIGARH266
  • HIMACHAL PRADESH223
  • TRIPURA198
  • GOA67
  • PUDUCHERRY49
  • MANIPUR36
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS33
  • MEGHALAYA15
  • NAGALAND3
  • ARUNACHAL PRADESH2
  • DADRA AND NAGAR HAVELI2
  • DAMAN AND DIU2
  • MIZORAM1
  • SIKKIM1
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
easily find out the disease of dryness in the eyes

आंखों में सूखेपन की बीमारी का आसानी से लगाएं पता

  • Updated on 10/7/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आंखों में सूखेपन की बीमारी का आसानी से पता लगाने और उसका इलाज करने के लिए शोधकर्ताओं ने नई‘नॉन इनवेसिव इमेजिंग टेकनीक’ विकसित की है। आंखों में सूखेपन की बीमारी (ड्राई आई सिंड्रोम) में आंखों में जलन होती है और धुंधला दिखाई देता है। नई तकनीक (नॉन इनवेसिव इमेजिंग टेकनीक) में आंखों के भीतर की तस्वीर बिना ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाए ली जाती है।

World Teachers Day 2019: शिक्षक दिवस के दिन उन गुरुओं का करें सम्मान जो दिखाते हैं जीवन की राह

जर्नल ऑफ एप्लाइड ऑप्टिक्स में प्रकाशित शोधपत्र के मुताबिक आंखों के डॉक्टर के पास पहुंचने वाले 60 प्रतिशत मरीजों में आंखों के सूखेपन की शिकायत होती है। शोधकर्ताओं जिनमें अमेरिका की ऑप्टिकल सोसाइटी के शोधकर्ता भी शामिल थे, ने बताया कि यह बीमारी तब होती है जब बाहरी वातावरण से बचाने में कारगर आंसुओं की अंदरुनी परत अस्थिर हो जाती है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकतर मामलों में इलाज मरीज की ओर से बताए गए लक्षणों के आधार पर किया जाता है लेकिन यह पद्धति बीमारी की सटीक अवस्था का पता लगाने में उतनी कारगर नहीं होती।

IIT काउंसिल की मीटिंग में लिया गया बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला

शोधकर्ताओं ने कहा, अबतक आंखों को बचाने वाली आंसुओं की अंदरुनी परत के बारे में जानकारी लेने के लिए जो तरीका इस्तेमाल किया जाता था उससे बाहरी परत को नुकसान पहुंचता था और पलक झपकने की वजह से सटीक जानकारी भी नहीं मिल पाती थी। इजरायल स्थित एड्ओम एडवांस्ड ऑप्टिकल मेथड्ज लिमिटेड के प्रमुख शोधकर्ता योएल एरियेली ने कहा, कि इस तकनीक के तहत आंसू की आंतरिक परत की तस्वीर उतारने वाला हमारा उपकरण नैनोमीटर विभेदन के आधार पर कार्य करता है।

CBSE बोर्ड का ऐलान, मार्च के पहले हफ्ते से शुरू होगी परीक्षाएं

अध्ययन में कहा गया कि नये उपकरण से सुरक्षित हेलोजन रोशनी आंखों में डाली जाती है और उससे बनने वाले प्रतिङ्क्षबब का विश्लेषण किया जाता है।

शोधपत्र के मुताबिक यह उपकरण पूरी तरह से स्वचालित है और मात्र 40 सेकेंड में आंखों के ऊपर मौजूद आंसुओं की अंदरुनी परत में आए बदलाव का पता लगा लेता है जिससे डॉक्टर सटीक तरीके आकलन कर पाते हैं खासतौर पर आंतरिक उप परत का। शोधकर्ताओं ने कहा कि उप-परत सूखी आंख की बीमारी में अहम भूमिका निभाती है लेकिन अन्य तरीकों से इसका विश्लेषण मुश्किल होता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.