Wednesday, Dec 02, 2020

Live Updates: Unlock 7- Day 2

Last Updated: Wed Dec 02 2020 09:31 AM

corona virus

Total Cases

9,499,710

Recovered

8,931,798

Deaths

138,159

  • INDIA9,499,710
  • MAHARASTRA1,823,896
  • ANDHRA PRADESH1,648,665
  • KARNATAKA884,897
  • TAMIL NADU781,915
  • KERALA602,983
  • NEW DELHI570,374
  • UTTAR PRADESH543,888
  • WEST BENGAL526,780
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • ODISHA318,725
  • TELANGANA269,816
  • RAJASTHAN268,063
  • CHHATTISGARH237,322
  • BIHAR235,616
  • HARYANA234,126
  • ASSAM212,776
  • GUJARAT209,780
  • MADHYA PRADESH206,128
  • CHANDIGARH183,588
  • PUNJAB152,091
  • JAMMU & KASHMIR110,224
  • JHARKHAND109,151
  • UTTARAKHAND74,340
  • GOA45,389
  • HIMACHAL PRADESH40,518
  • PUDUCHERRY36,000
  • TRIPURA32,723
  • MANIPUR23,018
  • MEGHALAYA11,810
  • NAGALAND11,186
  • LADAKH8,415
  • SIKKIM4,990
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS4,710
  • MIZORAM3,825
  • DADRA AND NAGAR HAVELI3,327
  • DAMAN AND DIU1,381
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
this-new-technique-will-help-in-lowering-medicine-side-effect

इस नए तरीके से नहीं होंगे दवाओं के साईड इफेक्ट

  • Updated on 7/9/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वैज्ञानिकों का कहना है कि सीधे कोशिकाओं पर असर करने वाली इस नई तकनीक के जरिए बाकी के शरीर पर होने वाले दवाईओं के साईड इफेक्ट को रोका जा सकता है। अमेरिका में वर्जीनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अलग-अलग कोशिकाओं के भीतर सेल में मौजूद अलग-अलग कण को ठीक करने का तरीका निकाल लिया है। 

शोधकर्ताओं ने बताया कि एक जैसे कण अलग-अलग काम करते हैं। अब वैज्ञानिक ये तय कर सकते हैं कि दवा से किस हिस्से पर असर डालना है ताकि हानिकारक साइड इफेक्ट्स से बाकि हिस्सों को बचाया जा सके। वर्जीनिया विश्वविद्यालय के जे जूलियस झू ने इस बारे में कहा कि साइड इफेक्ट्स के साथ समस्या इसलिए होती है क्योंकि आप उसी सेल में अलग-अलग चीजों को करने वाले कणों को अलग नहीं कर सकते हैं।

कॉफी पीने वाले जीते हैं लंबा और स्वस्थ जीवन

यदि आपने कणों को अवरुद्ध कर दिया तो ये फिर उसके काम से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। इससे आमतौर पर अनचाहे साइड इफेक्ट्स होते हैं। लगभग हर दवा जो किसी बीमारी का इलाज कर सकती है उसके दुष्प्रभाव होते हैं। चाहे वो छोटी हो या बड़ी।

अब तक दवाओं ने कणों को सामान्य तरीके से ठीक किया है। अगर एक कण हानिकारक माना जाए तो शोधकर्ता इसे पूरी तरह से अवरुद्ध करने के लिए एक दवा विकसित करने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि एक कण कोशिका के एक हिस्से में जो कुछ भी कर रहा है उसके कारण समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लेकिन साथ ही वही कण अन्य हिस्सों में पूरी तरह से कुछ अलग कर रहा है। पूरी तरह से इसे बंद करना किसी और हिस्से के लिए हानिकारक हो सकता है। 

नाक से खून आना सामान्य बात नहीं, इन बातों का ध्यान रखना है जरुरी

कई काम कर रहे कण को अवरुद्ध करने की कोशिश करने की बजाय डॉक्टर एक हिस्से में एक कण को टारगेट कर सकते हैं। इससे मरीज की जरूरत के हिसाब से सटीक दवा बनाई जा सकती है। ये तकनीक कई अलग-अलग बीमारियों के लिए उपयोगी होगी, लेकिन विशेष रूप से कैंसर और न्यूरोलॉजिकल स्थितियों जैसे ऑटिज्म और अल्जाइमर के लिए उपयोगी होगी।

यह तकनीक शोधकर्ताओं को नए इलाज को अधिक तेजी से समझने के लिए भी मदद करेगी। इससे वो जान पाएंगे की कण क्या कर रहे हैं और उन्हें कहां टारगेट करना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.