Wednesday, Dec 01, 2021
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Exclusive interview: जिंदगी की जद्दोजहद है रिबन

  • Updated on 11/2/2017
  • Author : National Desk

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। शहरी जीवन में कामकाजी दंपति के सामने कितनी मुश्किलें आती हैं, फिल्म ‘रिबन’ में इसे बखूबी दर्शाया गया है। इसे आप रिश्तों को जोडऩे की कहानी कह सकते हैं। फिल्म में एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन और वेब सीरीज से बड़े पर्दे का सफर तय करने वाले अभिनेता सुमित व्यास मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की कहानी एक ऐसे प्रेमी जोड़े पर आधारित है, जो शादी करते हैं और फिर जब उन्हें पहला बच्चा होता है तो किस प्रकार उनका जीवन बदल जाता है। राखी शांडिल्य द्वारा निर्देशित और  शुक्रवार को रिलीज होने जा रही इस फिल्म के किरदारों ने दिल्ली स्थित नवोदय टाइम्स के दफ्तर में बातचीत की। 

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‘मैटरनिटी लीव’ के बाद ऑफिस में मुश्किलें
फिल्म ‘रिबन’ के बारे में अभिनेत्री कल्कि बताती हैं, ‘मेरा किरदार इसमें साहना का है, जो अपने पति के साथ बहुत खुश है। दोनों नौकरी करते है। दोनों की जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है लेकिन अचानक साहना को पता चलता है कि वह गर्भवती है। वह आत्मविश्वास से भरपूर लड़की है। जब वह मैटरनिटी लीव के बाद फिर से ऑफिस जाना शुरू करती है, तो वहां उसे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, यही फिल्म में दिखाया गया है।’ 

‘कामकाजी गर्भवती के प्रति दयालु नहीं देश’ 
वह कहती हैं, ‘हमारा देश कामकाजी गर्भवती महिला के प्रति दयालु नहीं है। कॉरपोरेट जगत में काम कर रही गर्भवती महिलाओं को ‘मैटरनिटी लीव’ तो मिल जाती है पर दोबारा ऑफिस लौटने के बाद उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस कारण वह अक्सर प्रेरणाहीन महसूस करती हैं। इसके लिए हमें पुरुषों के साथ समानता चाहिए। काम के साथ-साथ मानसिकता में भी समानता हो। यह स्कूल में ही सिखाना पड़ेगा कि दोनों एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं। शिक्षा में अलगाव नहीं होना चाहिए। नौकरी करने वाली वुमन सुपरवुमन हैं।’ 

‘फिल्म से जुड़ाव महसूस करेंगे दर्शक’ 
कल्कि कहती हैं, फिल्म में जो दिखाया गया है वह बिल्कुल सच है। हमारे देश में ऐसा ही होता है। निर्देशक राखी ने लगभग 50 दंपति से बातचीत की और काफी रिसर्च के बाद फिल्म बनाई है। इस फिल्म से बहुत लोग खुद को जुड़ाव महसूस कर पाएंगे, क्योंकि काफी हद तक इसमें सच्चाई है। एक महिला ऑफिस, घर सब देखती है, जो बेहद मुश्किल होता है। फिर भी सभी उसकी काबिलियत पर शक करते है। 

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Navodayatimes‘पालन-पोषण की समस्या’
अभिनेत्री का कहना है, ‘पहले सास-ससुर, दादा-दादी परिवार में सभी होते थे और अब न्यूक्लियर फैमिली होते हैं लेकिन उस हिसाब से अभी हमारे देश में इतने अच्छे क्रेच नहीं है। ऐसे में बच्चों को पालने में मुश्किलें आती हैं। अब नई-नई कंपनियों में इसकी शुरुआत हुई है।’ 

‘मां को ही दांव पर लगाना पड़ता है करिअर’
अभिनेता सुमित का कहना है, ‘आजकल दंपति संयुक्त परिवार के साथ तो रहते नहीं हैं, ऐसे में उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब बच्चा हो जाता है तो वे एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हैं। सबसे बड़ी बात ये कि हमारे समाज में शुरू से यही चलता आ रहा है कि बच्चे का ध्यान मां को ही रखना होता है। एक मां को ही अपना करिअर दांव पर लगाना पड़ता है, भले ही हम साफ  शब्दों में यह न कहें, लेकिन यह धाारण पहले से हमारे मन में बैठी हुई है।’

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‘आखिरी विकल्प हो गया है बच्चा’
वह कहते हैं, ‘शादी के बाद दंपति कई चीजों में फंस जाते हैं। कई जिम्मेदारियां उन पर होती है। इन सभी के बीच वे बच्चे के बारे में सोचते हैं कि कुछ दिन और रुक जाते हैं। जहां बच्चा पहला विकल्प हुआ करता था, अब वह आखिरी में आता है। यह फिल्म नए शादीशुदा जोड़ों और जो इस दौर से निकल चुके हैं, दोनों तरह के लोगों को पसंद आएगी, क्योकि वे खुद को इससे जुड़ाव महसूस करेंगे।’ 

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