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#exclusive interview with anupam kher

#Exclusive : क्राइम थ्रिलर है अनुपम की फिल्म 'One Day'

  • Updated on 7/3/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हाल ही में सिनेमा में 35 साल भी पूरे करने वाले बॉलीवुड (Bollywood) के द‍िग्‍गज अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher)  इन दिनों अपनी फ‍िल्‍म 'वन डे: जस्टिस डेलिवर्डट' (One Day: Justice Delivered) को लेकर चर्चा में हैं। अशोक नंदा के न‍िर्देशन में बनी यह फ‍िल्‍म 5 जुलाई को रिलीज हो रही है। इस फ‍िल्‍म में अनुपम खेर के अलावा ईशा गुप्‍ता (Isha Gupta) और कुमुद मिश्रा भी लीड रोल में हैं। फिल्म में अनुपम खेर एक रिटायर जज का किरदार निभा रहे हैं जबकि ईशा गुप्ता क्राइम ब्रांच की एक ऑफिसर बनी हैं। फिल्म प्रमोशन के लिए दिल्ली पहुंचे अनुपम और ईशा ने पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/ हिंद समाचार से खास बातचीत में बताया कि इस फिल्म के जरिए हमने सिस्टम पर कई सवाल खड़े किए है।  

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एक जज की कहानी
फिल्म की कहानी पर बात करते हुए अनुपम खेर ने कहा कि इसमें एक ऐसे जज की कहानी है, जो जिस दिन रिटायर होता है, उस दिन ऐसी घटना होती है कि उसे रियलाइज होता है कि उसने जो अब तक फैसले सुनाए उनमें से चार फैसले में ऐसा होता कि जिसमें यह जानते हुए भी कि वो लोग मुजरिम हैं, लेकिन वह सबूत के अभाव में छूट जाते हैं। रिटायरमेंट के बाद वो जज उन चार मुजरिमों को ढूंढता है और उन्हें टॉर्चर करता है और उनसे उनका जुर्म कबूल करवाता है। ये एक निजी मामला होता है। फिर क्राइम ब्रांच उन्हें ढूंढती है कि कौन आदमी उन्हें मार रहा है। हालांकि फिल्म में एक जज कानून अपने हाथ में लेता है लेकिन रियल लाइफ में नहीं ले सकता। 

Navodayatimes
35 साल में बहुत कुछ बदल गया 
अनुपम कहते हैं कि समाज बदल गया। दुनिया बदल गई। लोग बदल गए, उसी हिसाब से सिनेमा में भी बदलाव आया है। इन 35 साल में मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। पहले रिश्ते मज़बूत और दोस्ती गाढ़ी हुआ करती थी। ऐसे दिन रात फोन में नहीं लगे रहते थे। शूटिंग के बीच हम लोग पेड़ के नीचे बैठकर बातें किया करते थे।

बदलाव हरदम अच्छा है पर हर बदलाव के साथ इंसान अपनी मासूमियत खोता जा रहा है। अनुपम खेर कहते हैं कि मैं उन कलाकारों में से हूं जो हरदम नए तरह के सिनेमा का साथ देता है। इस बात का उदाहरण है खोसला का घोसला। मैं फर्स्ट टाइम डायरेक्टर्स के साथ भी काम करने के लिए तैयार रहता हूं। आज ऐसा समय है कि आप कम बजट की बिना बड़े सितारों की फिल्में बना सकते हैं। आज के दौर में बड़े स्टार की फिल्म हिट होने की कोई गारंटी नहीं है। 

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अनुपम सर से बहुत कुछ सीखा
अनुपम खेर की स्टूडेंट रही चुकी हैं ईशा गुप्ता से फिल्म साइन करने की वजह पूछने पर बताया कि फिल्म को हां करने की वजह अनुपम सर हैं। मैंने 2011 में एक्टिंग क्लास शुरू की। अनुपम सर से मैंने क्लास में ही नहीं, बल्कि स्टेज पर भी एक्टिंग सीखी। फिल्म में कॉप का किरदार निभाकर मुझे मजा आया है।

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सिस्टम पर सवाल है ये फिल्म
फिल्म पर बात करते हुए ईशा ने बताया कि ये फिल्म अदालती कार्यशैली के खिलाफ रिवोल्यूशन लाने की बात करती है। सिस्टम से जुड़े लोगों से गलती हो सकती है, पर सिस्टम को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आम लोगों का सिस्टम पर विश्वास बना रहे। आम लेागों का यह विश्वास रहे कि हां मुझे यहां न्याय मिलेगा। आम इंसान को पता होना चाहिए कि गरीब होते हुए भी उसे न्याय मिलेगा। सरकार फिर से अध्ययन कर कानून /संविधान संशोधन करना चाहेगी। सरकार ऐसा संविधान संशोधन करें कि हर जज की जवाबदेही तय हो सके। यदि जज तय समय में किसी मुकदमे पर निर्णय न दें, तो उसे हटाया जाए। कानून ऐसा हो कि गवाह को गुमराह न किया जा सके।  भ्रष्टाचार पर लगाम हो और कानून खरीदा न जा सके।

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