Tuesday, Jul 23, 2019

#Exclusive Interview : आतंकवाद से लड़ाई जारी, लोगों का मिल रहा पूरा सहयोग डीजीपी दिनकर गुप्ता

  • Updated on 6/29/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अंतर्राष्ट्रीय सीमा (International border) से सटा होने के कारण पंजाब (Punjab) को कई मोर्चों पर लडऩा पड़ता है। इस लड़ाई में अहम कड़ी के तौर पर पंजाब पुलिस भूमिका निभाती है। पंजाब पुलिस का इतिहास कई कुर्बानियों से भरा है। शायद यह देश के अन्य राज्यों की पुलिस से कहीं अधिक है। पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य कहा जाता है जिसने आतंकवाद के साथ लड़ाई लड़ी और जीत भी हासिल की। लोगों का ही सहयोग है जिसके दम पर अभी भी पंजाब पुलिस लगातार आतंकवाद की सिर उठाने वाली कोशिशों को कुचलने में कामयाब रहती है। इसका श्रेय भी पंजाब पुलिस को दिया जाता है लेकिन एक चीज है जिस पर लगातार कोशिश के बाद भी जीत हासिल नहीं हो पाई है और वो है पंजाब पुलिस की डराने वाली छवि। हालांकि अधिकारी दावा करते हैं कि आतंकवाद का खात्मा लोगों के सहयोग से ही संभव हुआ था लेकिन इसके बावजूद पुलिस की छवि ऐसी ही बनी हुई है कि हर कोई पुलिस की मौजूदगी से सुरक्षित महसूस करने के बजाय डर महसूस करता है। डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने पंजाब पुलिस की छवि बदलने को खुद के लिए चैलेंज के तौर पर लिया है और इसके लिए काम कर रहे हैं। पंजाब केसरी ने कई मुद्दों पर डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता (D.G.P Dinkar Gupta) से बात की। 

पंजाब पुलिस की मौजूदगी लोगों को सुरक्षा के बजाय सहम क्यों महसूस कराती है? यह छवि कब और कैसे बदलेगी?
पंजाब पुलिस (Punjab Police) की इस छवि को बदलना है। पंजाब पुलिस समय के साथ काफी बदली भी है। नई टैक्नोलॉजी के साथ कामकाज में भी काफी बदलाव आया है। नैचुरल है कि बिहेवियर पर असर पड़ता है। मेरे लिए पंजाब पुलिस की ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग भी चैलेंज है और इस पर काम शुरू किया है। मुलाजिमों के ‘बिहेवियर विद सिटीजन’ में भी इम्प्रूवमैंट हुई है लेकिन हम जानते हैं कि अभी रास्ता लंबा है। पुलिस की छवि के कई कारण हैंलेकिन ट्रेनिंग और मोटीवेशन से फर्क आएगा। पिछले 8-9 वर्ष दौरान भर्ती में पढ़े-लिखे युवा आए हैं। उससे काफी हद तक बिहेवियर में चेंज आया है। इसे और बढ़ाया जाना है ताकि इसे वैस्टर्न पुलिसिंग के साथ खड़ा किया जा सके। पुलिस का काम स्ट्रैस वाला है। मुलाजिमों की लिविंग कंडीशंस में इम्प्रूवमैंट, वर्किंग कंडीशंस दुरुस्त करने के साथ ही वीकली ऑफ पर भी काम किया जा रहा है, ताकि स्ट्रैस फ्री समय दिया जा सके। सी.एम. साहब से ‘बड़ा खाना’ जैसे समारोहों के जरिए मिलने का सिलसिला शुरू करने जा रहे हैं ताकि उनसे सीधा संवाद कर समस्याएं सुनी जा सकें। उम्मीद है कि कुछ ही महीनों में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे और आने वाले समय में पुलिस की पुरानी छवि बदलकर ‘मित्र पुलिस’ वाली छवि बनेगी।  

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वूमैन एंड चाइल्ड सेफ्टी के मामले में क्या चुनौतियां हैं। छोटी बच्चियों से रेप के मामले बढ़ रहे हैं, कोई एक्शन प्लान? 
यह अहम मुद्दा है वूमैन व चाइल्ड सेफ्टी। मैं निजी तौर पर भी वूमैन सेफ्टी के लिए ङ्क्षचतित रहता हूं। इसके लिए कमिटेड हूं। चाहता हूं कि ऐसा सुरक्षित माहौल बनाया जाए जिसमें महिलाएं सुरक्षित महसूस करें। चीफ जस्टिस से बात कर फास्ट ट्रैक अदालतों की भी कोशिश की जा रही है। पंजाब पुलिस द्वारा वूमैन हैल्पलाइन के लिए 181 और 112 या डायल 100 जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।


सोशल मीडिया पर चर्चा रही है कि ताजा विदेश यात्रा के दौरान आपको भी नारेबाजी का सामना करना पड़ा?
नहीं, इसमें कोई सच्चाई नहीं। सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार किया गया। मई के आखिरी दिनों में विदेश जरूर गया था, 29 मई को अपनी मंजिल पर पहुंच गया था। सोशल मीडिया पर जो प्रचार किया गया, उसकी सच्चाई यह है कि मैं 1 जून को लंदन में नहीं था, बल्कि मैं 1 जून को यू.के. में ही नहीं था और इस बार की ट्रैवल के दौरान मेरे पास ब्रिटिश वीजा तक नहीं था लेकिन फिर भी कुछ लोगों की ओर से सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया गया। इस झूठ से ही पता चल सकता है कि सोशल मीडिया पर ‘2020’ को लेकर प्रचार करने वालों को लोगों की कितनी सपोर्ट है।

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क्या आप मानते हैं कि पंजाब में नशे का मुकम्मल सफाया हो गया है?
सी.एम. साहब ने भी कई बार कहा है कि ड्रग्स के धंधे की रीढ़ तोड़ी जा चुकी है। पुलिस का काम सप्लाई चेन तोडऩा और रोकना है। इसमें काफी अच्छा काम किया है। 26 हजार केस दर्ज हुए हैं, 30 हजार के करीब लोग गिरफ्तार हुए, 10 हजार के करीब लोग जेल में हैं। हाल ही की बैठक में एन.सी.बी. अधिकारियों ने भी माना है कि दो-अढ़ाई वर्ष दौरान पंजाब में नशे के खिलाफ जो काम हुआ, वैसा किसी भी स्टेट में नहीं हुआ है। वहीं, एस.टी.एफ. द्वारा इन्फोर्समैंट, डी-एडिक्शन एंड प्रीवैंशन पर काम किया जा रहा है। इसके लिए डैपो और बडी प्रोग्राम बहुत कारगर साबित हो रहे हैं। ड्रग्स प्रॉब्लम के कई डायमैंशन हैं। इतना काम होने के बाद भी हम चुप करके नहीं बैठ सकते। ब्लू पिं्रट बनाया गया है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति बनेगी और जिला स्तर पर होने वाले काम को हर माह रिव्यू किया जाएगा। जवाबदेही तय की जा रही है डी.सी.-एस.एस.पी. से लेकर डी.एस.पी. व एस.एच.ओ. स्तर तक।

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सोशल मीडिया के जरिए खालिस्तान के नाम पर भावनाएं भड़काई जा रही हैं, पुलिस क्या कर रही है?
मेरी अपील है उन युवाओं व उन लोगों से, जो दूसरे राज्यों व देशों में बैठे हैं कि पंजाब में हमारे बच्चों को बरगलाने की कोशिश न करें। हमें कोई प्रॉब्लम नहीं कि कोई खालिस्तान मांगे या कुछ और मांगे, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रैशन की हमारा संविधान और जिन देशों में ऐसे लोग बैठे हैं, वहां के संविधान आज्ञा देते हैं लेकिन हमारी कोशिश है कि यह सिर्फ कानून के दायरे में रहते हुए ही हो। मामले में किसी भी तरह की हिंसक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जा सकती।


जेल के अंदर संवेदनशील केस से जुड़े अहम आरोपी की हत्या हो जाना क्या जेल प्रशासन के स्तर पर बड़ी नाकामी नहीं?
जेल के भीतर किसी की हत्या हो जाना प्रशासनिक नाकामी तो है, इसकी जांच हो रही है। मुख्यमंत्री ने फैक्ट फाइंडिंग इन्क्वायरी का आदेश दिया है और ए.डी.जी.पी. जेल की निगरानी में जांच हो रही है। रिपोर्ट आने पर ही जिम्मेदारी तय होगी। 

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