Sunday, Jun 13, 2021
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शिवसेना ने मुखपत्र 'सामना' में जम्मू-कश्मीर और कंगना रनौत को लेकर ऐसे निकाली अपनी भड़ास

  • Updated on 10/28/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के कथित कार्यकर्ताओं द्वारा श्रीनगर के लाल चौक पर जब तिरंगा फहराने की कोशिश करने और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को मिली सुरक्षा को लेकर शिवसेना के मुख्यपत्र सामना के जरिए सवाल उठाए गए हैं। 

शिवसेना ने बिना नाम लिए अभिनेत्री कंगना रनौत पर भी निशाना साधा है। साथ ही जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव हुए और आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद क्या हालात बने हुए हैं इस पर तंज किए हैं। 

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आर्टिकल 370 हटने के बाद 
सामना में लिखा गया है, “लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए गए भाजपा के कार्यकर्ताओं को कश्मीर की पुलिस ने रोका और उन्हें बंदी बना लिया। यह तस्वीर क्या कह रही है? मतलब कश्मीर की स्थिति अब भी सुधरी नहीं है। जो ठीक-ठाक दिख रहा है, वह सिर्फ ऊपरा-ऊपरी मेकअप ही है। अब कश्मीर की तीन प्रमुख पार्टियां एक हो गई हैं और उन्होंने अनुच्छेद-370 फिर से लाने के लिए लड़ाई करने की ठानी है।“

सामना ने संपादकीय में लिखा, “कश्मीर में तिरंगा न फहरा पाना, एक प्रकार की हार है। तिरंगा फहराने गए युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया। यह पुलिस पाकिस्तान की नहीं थी। इसी मिट्टी की थी। कश्मीर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन है अर्थात वहां दिल्ली का हुक्म चलता है। लेकिन लाल चौक पर तिरंगा फहराना अपराध साबित हो गया। फिर अनुच्छेद-370 हटाने के बाद बदला क्या?”

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कंगना पर साधा निशाना 
बिना नाम लिए शिवसेना ने अभिनेत्री कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कहा, “मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर कहनेवाली डुप्लीकेट मर्दानी रानी को दिल्ली की सरकार केंद्रीय सुरक्षा का कवच देती है। उस कवच कुंडल में वह महारानी मुंबा माता का अपमान करती है। लेकिन कश्मीर में भारत माता के सम्मान में तिरंगा फहराने वाले युवकों को खींचकर ले जाया जाता है। उन लड़कों को कोई सुरक्षा नहीं और तिरंगे को भी कोई सुरक्षा नहीं। यह विचित्र है। हिंदुत्व का संबंध राष्ट्रीयत्व से है। एकाध भूमि पर तिरंगा फहराने की मनाही है। इसका सीधा अर्थ ऐसा है कि हम उस भूमि के स्वामी नहीं हैं! उस भूमि पर किसी दूसरे का हुक्म चल रहा है। वे हुक्मबाज या तो आतंकवादी हैं या बाहरी हैं।“ 

शिवसेना ने ये भी कहा कि “मुंबई में आज भी तिरंगा लहरा रहा है अर्थात यह भाग पाकियों का नहीं। जहां पाकियों की मर्जी चलती है, वहां तिरंगे का अपमान होता है। वह अभिनेत्री लाल चौक पर न फहराए जा सके तिरंगे के लिए संताप की चिंगारी उड़ाए। असली मर्दानगी और मर्दानी वहीं पर है!”

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