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107 children killed in kota jk lon hospital rajasthan pigs roaming in hospital

राजस्थान: 107 बच्चों की मौत पर हुआ बड़ा खुलासा- डॉक्टर की जगह अस्पताल में घूम रहे थे सुअर

  • Updated on 1/4/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजस्थान (Rajasthan) के कोटा (Kota) अस्पताल में बीते दिसंबर महीने से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। यहां अब तक मरने वाले बच्चों की संख्या 105 से पार पहुंच गई है। अस्पताल में दम तोड़ रहे नवजात बच्चों की मौत पर सरकार हरकत में आ गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जांच के दौरान पाया कि अस्पताल में किसी भी खिड़की के शीशे नहीं थे। वहीं, दरवाजे टूटे हुए थे। इसके अलावा आयोग ने सुअर के बच्चों को अस्पताल के परिसर में घुमते देखा। ये सब देखने के बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राज्य के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने को कहा। यही नहीं आयोग ने जिले के मुख्यचिकित्साधिकारी को 7 जनवरी तक सभी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध होने का आदेश दिया।

rajasthan kota j k lon hospital

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सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब
दरअसल, कोटा के जेके लोन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के प्रमुख प्रियंक कानूनगी ने 29 दिसंबर को अपनी जांच टीम के साथ अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जरूरत की चीजें भी उपलब्ध नहीं थी। वहीं, साफ-सफाई को लेकर भी उन्होंने शिकायत की। आयोग ने अपनी जांच पड़ताल में पाया कि अस्पताल में पर्याप्त साधनों का कोई लेखा-जोखा नहीं है।

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शिक्षा विभाग को नोटिस मिलने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं
चिकित्सालय में नवजात शिशुओं की मौत के मामले में बढ़ती लापरवाही को लेकर आयोग ने 30 जनवरी को राजस्थान के चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव वैभव गैलरिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके मुताबिक तीन दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया। लेकिन इसके बावजूद नोटिस पर अभी तक वैभव गैलरिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसकी जानकारी खुद आयोग ने दी। उन्होंने बताया कि इससे पता चलता है कि बच्चों की मौत को कितने हल्के में लिया जा रहा है।

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अस्पताल में कर्मचारियों की कमी
इसके साथ ही आयोग टीम ने अपनी जांच में पाया कि जेके लोन अस्पताल की इतनी खराब हालत है कि वहां सिर्फ 15 वेंटिलेटर है और उनमें से भी सिर्फ 9 वेंटिलेटर ही काम कर रहे है। जिसके बाद अब आयोग ने पूरे मामले की जांच करने के लिए उन सभी उपकरणों की लिस्ट मांगी हैं जिस वक्त उन 10 बच्चों ने दम तोड़ा था। वहीं जांच के दौरान यह भी पाया गया कि उस अस्पताल की मशीने खराब तो हैं ही और यहां पर कर्मचारियों की भी कमी है। 

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बच्चों की मौत पर राजनीति शुरू
बच्चों की मौत को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई है। जहां एक ओर राजस्थान में विपक्षी पार्टी बनी बीजेपी (BJP) राज्य सरकार पर बच्चों की मौत पर असवेंदनशील होने का आरोप लगा रही है तो वहीं कांग्रेस सरकार (Congress Government) का कहना है कि यह सब पिछली सरकार यानी पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार (Vasundhara Raje Government) की कमियों की वजह से हुआ है। 9 दिन बाद अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा (Raghu Sharma) ने कहा कि जिन बच्चों को बचाया जा सकता है उन्हें बचाया जा रहा है। बीजेपी इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को डॉक्टरों को डेमोरलाइज कर रही है। 

raghu sharma

मौतों के लिए BJP को ठहराया जिम्मेदार
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज जो लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक बिस्तर पर 2 बच्चे हैं, वे 5 साल से सत्ता में थे। 60 बेड जिन्हें हमने 2012 में मंजूरी दी थी, वे कहां चले गए हैं? जवाब देने वाला कौन है?

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